अब टैंक से बाहर निकले बिना दुश्मनों पर हमला! भारतीय सेना को मिलेगा AI वाला घातक वेपन सिस्टम

Published : May 27, 2026, 04:40 PM IST
अब टैंक से बाहर निकले बिना दुश्मनों पर हमला! भारतीय सेना को मिलेगा AI वाला घातक वेपन सिस्टम

सार

Zen Technologies Limited ने भारतीय सेना के लिए किस टेंडर में सबसे कम बोली (L-1) लगाई है और इसकी कुल कीमत कितनी है? आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स (ARVs) पर रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम्स (RCWS) लगाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है? RCWS और Phanish प्लेटफॉर्म की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं क्या हैं?

नई दिल्ली: हैदराबाद की डिफेंस कंपनी ज़ेन टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी ने भारतीय सेना के लिए 85.21 करोड़ रुपये के एक टेंडर में सबसे कम बोली (L-1) लगाई है। यह टेंडर आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) ने रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम्स (RCWS) के लिए निकाला था। ये सिस्टम सेना के आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स (ARVs) पर लगाए जाएंगे। इस टेंडर के तहत कुल 81 रिमोट कंट्रोल वेपन स्टेशन की सप्लाई की जानी है। इन सिस्टम्स के लगने के बाद, सैनिक गाड़ी के अंदर सुरक्षित बैठकर ही मशीन गन चला सकेंगे। उन्हें दुश्मन की गोलीबारी में बाहर निकलने का खतरा नहीं उठाना पड़ेगा।

ARVs को हथियारों की ज़रूरत क्यों?

आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स असल में सपोर्ट गाड़ियां होती हैं। इनका काम जंग के दौरान खराब हुए टैंकों—जैसे सेना के T-72 और T-90 बेड़े के टैंक—को खींचकर लाना और उनकी मरम्मत करना होता है। चूंकि ये गाड़ियां सीधे जंग के मैदान में काम करती हैं, इसलिए इन पर दुश्मन की गोलीबारी, ड्रोन हमले और घात लगाकर किए जाने वाले हमलों का खतरा हमेशा बना रहता है। 

एक रक्षा विशेषज्ञ ने बताया, "आज की मॉडर्न लड़ाई में सपोर्ट गाड़ियों का भी लड़ाकू होना ज़रूरी है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट के संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि जंग के मैदान में रिमोट वेपन सिस्टम कितने काम के हैं।"

क्या है ये टेक्नोलॉजी?

RCWS टेक्नोलॉजी की मदद से गाड़ी का क्रू मेंबर बख्तरबंद गाड़ी के अंदर से ही हथियार को रिमोट से ऑपरेट कर सकता है। इसके लिए कैमरे, थर्मल इमेजर, दिन-रात देखने की क्षमता वाले विज़न सिस्टम और ऑटो-ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता है। माना जा रहा है कि ज़ेन टेक्नोलॉजीज़ इस प्रोजेक्ट के लिए अपना 'फनिश' (Phanish) प्लेटफॉर्म पेश करेगी। इस प्लेटफॉर्म पर 12.7mm की हेवी मशीन गन लगाई जा सकती है। यह 14 किलोमीटर तक की दूरी पर टारगेट का पता लगा सकता है और हर मौसम में दिन-रात काम करने में सक्षम है। इस सिस्टम में AI पर आधारित टारगेट पहचानने की तकनीक और फाइबर ऑप्टिक जायरो स्टेबलाइजेशन भी है, जिससे चलती गाड़ी से भी सटीक निशाना लगाया जा सकता है।

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