DU Admission Form Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी फॉर्म में मुस्लिम, बिहारी को बताया मातृभाषा, विवाद गहराया

Published : Jun 20, 2025, 11:21 AM IST
DU Admission Form Controversy

सार

DU Admission Form Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी के एडमिशन फॉर्म में उर्दू की जगह मुस्लिम लिखे जाने से बवाल मचा है। शिक्षकों और छात्रों ने इसे सांप्रदायिक और संविधान की आठवीं अनुसूची का उल्लंघन बताया है। मातृभाषा लिस्ट में और भी जाति सूचक शब्द हैं।

DU Admission Form Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के अंडरग्रेजुएट एडमिशन फॉर्म को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार यूनिवर्सिटी के फॉर्म में "मातृभाषा" वाले कॉलम में उर्दू का नाम हटाकर उसकी जगह "मुस्लिम" लिखा गया है, जिससे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों में भारी नाराजगी फैल गई है। यह मामला अब सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची और देश की सामाजिक समरसता पर सवाल उठाने लगा है।

क्या है पूरा मामला?

हर साल दिल्ली यूनिवर्सिटी अपने अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों से उनकी मातृभाषा पूछती है। इस बार भी वैसा ही किया गया, लेकिन फॉर्म में उर्दू भाषा का ऑप्शन ही नहीं है। इसके बजाय "Muslim" शब्द को मातृभाषा के रूप में लिस्ट किया गया है। इतना ही नहीं, फॉर्म में "बिहारी", "चमार", "मजदूर", "देहाती", "मोची", "कुर्मी" जैसे जाति और पेशे से जुड़े शब्द भी मातृभाषा की लिस्ट में शामिल किए गए हैं। यह देख कर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर विश्वविद्यालय का उद्देश्य क्या है?

DU के शिक्षकों और विशेषज्ञों का गुस्सा

किरोरी मल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और डीयूटीए (DUTA) के सदस्य रुद्राशीष चक्रवर्ती ने इस कदम को "सुनियोजित सांप्रदायिकता" करार दिया। उनका कहना है कि अगर यह पागलपन है, तो यह एक सुनियोजित पागलपन है। उर्दू को हटाना सिर्फ एक भाषा को मिटाना नहीं है, बल्कि एक साझा सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को मिटाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि DU ने शायद यह मान लिया कि उर्दू केवल मुस्लिमों की भाषा है, इसलिए भाषा की जगह धर्म का नाम डाल दिया। यह भारत की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक आबादी को हाशिए पर धकेलने की कोशिश है।

DU की जानबूझकर की गई हरकत या लापरवाही?

DU की पूर्व प्रोफेसर और शैक्षणिक कार्यकर्ता आभा देव हबीब ने कहा कि इस फॉर्म को 3 लाख से ज्यादा छात्र भरेंगे, ऐसे में इस तरह की गलती को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने इसे "DU का व्यवस्थित पतन" बताया और कहा कि यह सीधे-सीधे संविधान की आठवीं अनुसूची का उल्लंघन है, जिसमें उर्दू एक मान्यता प्राप्त भाषा है। उनका सवाल था "क्या दिल्ली यूनिवर्सिटी को नहीं पता कि मुस्लिम भी बाकी भारतीयों की तरह क्षेत्रीय भाषाएं बोलते हैं?" उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक भाषा का अपमान नहीं है, बल्कि यह एक खतरनाक सांप्रदायिक सोच की ओर इशारा करता है।

टर्मिनोलॉजी पर भी उठे सवाल

रुद्राशीष चक्रवर्ती ने यह भी बताया कि किसी आधिकारिक फॉर्म में "मातृभाषा" की जगह सही शब्द "नेटिव लैंग्वेज" होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गैर-आधिकारिक शब्दों का इस्तेमाल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए उचित नहीं है।

मामले पर DU का अब तक क्या जवाब आया है?

अब तक दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से इस विवाद पर कोई ऑफिशियल बयान या सफाई नहीं दी गई है। लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है और देशभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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