
Google AI Non-Compete Agreement: क्या आपने कभी सोचा है कि कोई कंपनी आपको नौकरी से निकालकर सालभर सैलरी दे, लेकिन शर्त ये हो कि आप कहीं और जॉइन न करें? सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन गूगल ने कुछ ऐसा ही किया है और वह भी दुनिया के सबसे होनहार AI ब्रेन्स के साथ। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस तेज हो रही है, बड़ी कंपनियां अपने सीक्रेट्स और टैलेंट को किसी भी कीमत पर बचाने में लगी हैं। इसी कड़ी में Google ने UK में अपने DeepMind AI कर्मचारियों पर Non-Compete Agreement थोप दिया है।
Google के DeepMind AI कर्मचारियों पर लगाए गए Non-Compete Agreement का मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, तो वह अगले 12 महीनों तक किसी कंपीटिटर AI कंपनी में काम नहीं कर सकता। इस नियम के तहत कर्मचारियों को Garden Leave दिया जाता है, जिसमें उन्हें नौकरी से तो हटा दिया जाता है, लेकिन उन्हें पूरे साल सैलरी दी जाती है, शर्त यह होती है कि वे किसी और कंपनी में जॉइन नहीं कर सकते। यानी सैलरी मिलेगी लेकिन काम करने की आजादी नहीं। गूगल का यह कदम काफी चर्चा में है और इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Microsoft AI के वाइस प्रेसिडेंट और DeepMind के पूर्व डायरेक्टर नांडो डी फ्रेटास ने सोशल मीडिया पर गूगल की इस नीति की आलोचना की। उनका कहना है कि ये एग्रीमेंट प्रोफेशनल्स के लिए मानसिक और करियर से जुड़ी परेशानियां खड़ी कर रहे हैं।
गूगल का कहना है कि ये कदम उनकी खास और सीक्रेट AI टेक्नोलॉजी को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। वो नहीं चाहते कि उनका कोई कर्मचारी दूसरी कंपनी में जाकर उनके प्रोजेक्ट्स की जानकारी लीक करे। मामले में एक्स-एम्प्लॉयीज का कहना है कि ये एग्रीमेंट उनकी करियर ग्रोथ रोक देता है। मानसिक तनाव और कुछ कर ना पाने की भावना भारी पड़ती है। इस वजह से कई टैलेंटेड प्रोफेशनल्स इनोवेशन से दूर हो जाते हैं।
बहुत से एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस तरह की पाबंदियां AI इंडस्ट्री की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। जब टैलेंट और आइडियाज का फ्री फ्लो रुकता है, तो इनोवेशन भी थमने लगता है। गूगल की ये चाल उसकी प्रोजेक्ट सिक्योरिटी के लिए तो फायदेमंद है, लेकिन इससे कर्मचारियों की आजादी और इंडस्ट्री की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।
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