
Idioms For Competitive Exams: मुहावरे हिंदी भाषा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो भाषा को रोचक और प्रभावशाली बनाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे SSC, बैंक, UPSC और अन्य सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में मुहावरों से जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए, इनका सही मतलब और इस्तेमाल जानना न केवल भाषा में निपुणता दिखाता है, बल्कि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में भी मदद करता है। जानिए कुछ प्रमुख हिंदी मुहावरे और उनके अर्थ को विस्तार से, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।
मुहावरा- "उंगलियों पर नाचना"
मुहावरे का अर्थ: पूरी तरह से काबू में होना। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति किसी और के इशारे पर सब कुछ करता है, बिना अपनी मर्जी से कुछ करने के।
मुहावरा- "धाक जमाना"
मुहावरे का अर्थ: प्रभाव स्थापित करना। इसका मतलब है किसी व्यक्ति का दूसरों पर प्रभाव स्थापित करना या अपने ज्ञान, शक्ति या गुणों के कारण लोगों के बीच सम्मान या डर बनाना। यह मुहावरा तब इस्तेमाल किया जाता है जब कोई व्यक्ति अपनी उपस्थिति या कार्यों से दूसरों पर गहरी छाप छोड़ता है।
मुहावरा- "आगे कुआं पीछे खाई"
मुहावरे का अर्थ: दोनों तरफ से मुश्किल में होना। यह मुहावरा तब इस्तेमाल किया जाता है जब कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में फंस जाता है जहां उसके पास किसी भी दिशा में जाने का विकल्प नहीं होता, और दोनों ही रास्ते खतरनाक होते हैं। यह बताता है कि स्थिति कितनी कठिन और संकटपूर्ण है।
मुहावरा- "मुंह में पानी आना"
मुहावरे का अर्थ: किसी चीज को देखकर या सोचकर लालच होना। यह तब प्रयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति स्वादिष्ट भोजन या अपनी पसंदीदा चीज को देखकर लालच में आ जाता है। यह लालच केवल खाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि किसी भी वस्तु की इच्छा के संदर्भ में भी हो सकता है।
मुहावरा- "अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारना"
मुहावरे का अर्थ: खुद ही अपने लिए मुसीबत खड़ी करना। यह मुहावरा तब प्रयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति अपनी ही गलतियों या गलत निर्णयों के कारण खुद को नुकसान पहुंचाता है। इसका मतलब है कि अपने ही कार्यों से अपने लिए मुसीबत खड़ी करना।
मुहावरा- "आटे में नमक बराबर"
मुहावरे का अर्थ: बहुत कम मात्रा में। जब किसी चीज की मात्रा बहुत ही कम हो, तब यह मुहावरा कहा जाता है। इसका मतलब है कि वह चीज नगण्य है या उसका कोई विशेष महत्व नहीं है।
मुहावरा- "चना के झाड़ पर चढ़ाना"
मुहावरे का अर्थ: किसी को झूठी तारीफ से फुसलाना। इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति दूसरे को अत्यधिक झूठी तारीफ करके उसे भ्रमित करता है या उसे ऊंचा दिखाने की कोशिश करता है।
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