
India US Educational Collaborations, US University Offshore Campuses India Benefits: भारत और अमेरिका ने हायर एजुकेशन में आपसी सहयोग को बढ़ाने, स्टूडेंट्स की सुविधा के लिए नए कदम उठाने और भारत में अमेरिकी विश्वविद्यालयों के ऑफशोर कैंपस स्थापित करने की संभावनाओं को तलाशने का निर्णय लिया है। यह चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान हुई, जिसमें दोनों देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर मुख्य बिंदुओं पर सहमति जताई। भारत और अमेरिका के इस सहयोग से आने वाले समय में विदेशी हायर एजुकेशन के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे, जिससे भारतीय स्टूडेंट्स को ग्लोबल स्तर पर बेहतरीन करियर ऑप्शन मिलेंगे। आगे जानिए भारत और अमेरिका के बीच Educational Collaborations की मुख्य बातें और ऑफशोर कैंपस स्थापित होने से भारतीय स्टूडेंट्स को कैसे और क्या फायदा होगा।
अमेरिका में 3 लाख से अधिक भारतीय छात्र हर साल करीब 8 अरब डॉलर का आर्थिक योगदान देते हैं, जिससे कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां बनती हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स की आवाजाही को आसान बनाने के लिए लीगल प्रोसेस को सरल बनाने पर सहमति बनी है। साथ ही दोनों देश संयुक्त डिग्री प्रोग्राम, ट्विनिंग अरेंजमेंट और जॉइंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।
भारत सरकार ने अमेरिका को नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत सुधारों का लाभ उठाने और भारतीय छात्रों के लिए ऑफशोर कैंपस खोलने के लिए आमंत्रित किया है। इससे भारतीय छात्रों को अमेरिका जैसी उच्च स्तरीय शिक्षा अपने देश में ही मिलेगी, जिससे वे कम लागत पर वर्ल्ड-क्लास डिग्री प्राप्त कर सकेंगे।
भारत और अमेरिका के बीच स्टूडेंट और प्रोफेशनल्स के लिए वीजा प्रोसेस को सरल बनाने पर भी सहमति बनी है, जिससे भारतीय छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई करने और काम के बेहतर अवसर मिलेंगे। शॉर्ट-टर्म बिजनेस और टूरिस्ट वीजा को आसान बनाने के लिए भी बातचीत हुई।
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अमेरिकी शिक्षा भारत में ही: ऑफशोर कैंपस खोलने से हाई क्वालिटी एजुकेशन अपने देश में ही मिल सकेगी।
कम खर्च में डिग्री: विदेशी विश्वविद्यालयों की पढ़ाई अधिक किफायती होगी।
वीजा और स्टूडेंट मोबिलिटी में आसानी: अमेरिका जाने की प्रक्रिया सरल होगी।
संयुक्त डिग्री प्रोग्राम्स: भारतीय और अमेरिकी विश्वविद्यालयों के बीच कोर्स एक्सचेंज और डिग्री मान्यता आसान होगी।
रिसर्च और इनोवेशन के अवसर: दोनों देशों के स्टूडेंट्स के लिए ज्वाइंट रिसर्च और डेवलपमेंट के रास्ते खुलेंगे।
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