
करियर डेस्क : अडानी-हिंडनबर्ग केस (Adani Hindenburg Case) की जांच अब 6 कानून के जानकारों के हाथ आ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक समिति का गठन किया है, जिसमें 6 सदस्य हैं। इस कमेटी की कमान पूर्व जस्टिस अभय मनोहर सप्रे के हाथ में दी गई है। पूर्व जस्टिस जेपी देवधर, नंदन नीलेकणि, केवी कामथ, ओपी भट्ट और सोमशेखर सुंदरेसन इस कमेटी के मेंबर्स हैं। कमेटी को 2 महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है। कमेटी के मेंबर्स में कोई कानून के एक्सपर्ट हैं तो कोई टेक्नोक्रेट. आइए जानते हैं सभी सदस्यों के बारें में..
जस्टिस अभय मनोहर सप्रे (Justice Abhay Manohar Sapre)
इस समिति के अध्यक्ष अभय सप्रे सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं। 27 अगस्त, 2019 को वह रिटायर हुए थे। उनका जन्म 28 अगस्त, 1954 को हुआ था। उन्हें कानून का अच्छी जानकारी है। 2013-14 में वो गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। मणिपुर हाईकोर्ट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के भी जज रह चुके हैं। एमपी हाईकोर्ट में करीब 20 साल तक वकील रहे हैं। 1999 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का एडिशनल जज बने और अक्टूबर, 2001 में नियमित हो गए।
जस्टिस जेपी देवधर (Justice JP Deodhar)
जेपी देवधर का जन्म 8 अप्रैल, 1951 को हुआ था। उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लॉ में डिग्री और पीजी के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैक्टिस किया। 1982 से वो यूनियन ऑफ इंडिया के वकील हैं। 1985 से आयकर विभाग के भी वकील रह चुके हैं। अक्टूबर, 2001 में बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने और 8 अप्रैल, 2013 को वे रिटायर हुए।
सोमशेखर सुंदरसन (Somashekhar Sundaresan)
सोमशेखर की पिछले खूब चर्चा हुई, जब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 16 फरवरी, 2022 को उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का जज बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया. सोमशेखर ने 1996 में गर्वनमेंट लॉ कॉलेज मुंबई से कानून की पढ़ाई की। पांच साल तक पत्रकारिता करने के बाद वकील बने।
केवी कामथ (KV Kamath)
केवी कामथ का जन्म 2 दिसंबर, 1947 को हुआ था। मशहूर बैंकर कामथ इन्फोसिस के चेयरमैन भी रह चुके हैं। उन्होंने 1971 में IIM अहमदाबाद से पीजी की डिग्री ली थी। ICICI बैंक के नॉन एक्जक्यूटिव चेयरमैन भी रह चुके हैं।
ओपी भट्ट (OP Bhatt )
टाटा कंसलटेंसी सर्विस (TCS) के डायरेक्टर ओपी भट्ट को भी सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी में रखा है। वो इंडियन बैंक एसोसिशन के चेयरमैन के पद पर भी रह चुके हैं। स्टेट बैंक ग्रुप के चेयरमैन पद पर भी रह चुके हैं। उनका नाम देश के बड़े बैंकर में शामिल है।
नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani)
नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून, 1955 को हुआ था। वह इंफोसिस के को-फाउंडर हैं। देश में आधार कार्ड की शुरुआत करने में उनका सबसे बड़ा योगदान है। वह UIDAI के चैयरमैन रह चुके हैं। देश में यूपीआई, फास्टैग, जीएसटी लाने में उनका अहम रोल रहा है। 2006 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
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