
National Maritime Day 2025: हर साल 5 अप्रैल को भारत राष्ट्रीय समुद्री दिवस (National Maritime Day) मनाता है। यह दिन ना सिर्फ समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार की अहमियत को बताता है, बल्कि उन जाबाज अफसरों, नाविकों और समुद्री उद्योग से जुड़े लोगों को भी सम्मान देता है, जो इस क्षेत्र की नींव मजबूत करते आए हैं। जानिए 5 अप्रैल को क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय समुद्री दिवस, देश के पहले अपने जहाज से लेकर भारत के समुद्री नेटवर्क की जानकारी।
भारत में समुद्री इतिहास की एक बड़ी और गर्व भरी शुरुआत 5 अप्रैल 1919 को हुई थी, जब एसएस लॉयल्टी (SS Loyalty) नाम का जहाज मुंबई से लंदन के लिए रवाना हुआ। ये कोई आम जहाज नहीं था, बल्कि ये भारत का पहला स्वदेशी जहाज था, जिसे 'Scindia Steam Navigation Company' ने चलाया। उस दौर में समुद्री रास्तों पर ब्रिटिश हुकूमत का राज था, ऐसे में SS Loyalty की यह यात्रा भारत के आत्मनिर्भर बनने की पहली झलक थी।
भारत सरकार ने 1962 में ‘मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग’ की स्थापना की और फिर 1964 में 5 अप्रैल को 'राष्ट्रीय समुद्री दिवस' के तौर पर मान्यता दी गई। ये दिन अब हर साल उन लोगों को सलाम करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूती दी।
सामान पहुंचाने के लिए समुद्री रास्ते आज भी दुनिया के सबसे सस्ते और कारगर तरीकों में से एक हैं। एक बार में हजारों टन माल ले जाने की क्षमता और कम लागत की वजह से आज भी यह तरीका बेहद अहम है। लेकिन इस सेक्टर को पर्यावरण प्रदूषण, समुद्री कानून और बदलते वैश्विक ट्रेड रूट्स जैसी कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है।
हर साल इस दिन ‘NMD Award of Excellence’ उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने भारत के समुद्री क्षेत्र में शानदार योगदान दिया है। ये अवॉर्ड केवल सम्मान नहीं, बल्कि अगली पीढ़ियों को प्रेरित करने का जरिया भी बनता है।
5 अप्रैल का दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे एक छोटे से जहाज ने भारत की समुद्री पहचान की नींव रखी। आज जब भारत ग्लोबल ट्रेड मैप पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, तो हमें उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहिए जो समंदर की लहरों पर भारत का भविष्य बना रहे हैं।
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