
करियर डेस्क : मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के स्कूलों में जल्द ही मुगल शासकों का इतिहास पुराने दिनों की बात हो जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार (Inder Singh Parmar) ने बताया है कि सरकार जल्द ही सेलेबस में बदलाव किया जाएगा। जिसमें मुगल साम्राज्य और मुगलों से जुड़ी कहानियों को हटा दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में न अकबर का जिक्र होगा और ना ही सिराजुद्दौला, टीपू सुल्तान की। उन्होंने बताया कि सीबीएसई बोर्ड की तरह एमपी बोर्ड भी मुगलों की गाथाओं को अब आगे न पढ़ाने का फैसला किया है। जल्द ही इसको अंतिम रुप दिया जाएगा।
इतिहास होगा मुगलों का 'इतिहास'
स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने फैसला किया है कि जो किताबें या सिलेबस बच्चों को पढ़ाई जाती हैं, उनमें मुगल साम्राज्य को शामिल नहीं किया जाएगा। नए पाठ्यक्रम में न मुगल शासक और ना ही गाथाओं को शामिल किया जाएगा। बच्चों को भारत का गौरवशाली इतिहास ही पढ़ाया जाएगा। जिससे वे हमारी संस्कृति, परंपराओं और इतिहास से रूबरू हो सकें और उसको जान सकें। शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत में मुगल शासकों के शासन करने के तरीकों को गलत तरीके से पेश किया गया है। जिस अब हटाने की जरुरत है।
भारत की गरिमा वाली हो शिक्षा
वहीं, सरकार के इस फैसले का कई प्रबुद्धजनों ने समर्थन किया है। उनका कहना है कि बच्चों के सेलेबस में 21वीं सदी के तौर-तरीकों और उसमें आ रही चुनौतियों को लेकर काफी कुछ होना चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो शांति-सद्भाव को बढ़ावा दे। बच्चों को समाज के बारें में जानकारी मिल सके। उनके भविष्य को बनाने पर जोर हो। शिक्षा का मतलब भारत की गरिमा को बताना और दिखाना होता है। भारत की महान संस्कृति और परंपराओं को जान बच्चे देश को आगे बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। समाज में संस्कृति और सद्भाव को बढ़ाने का जिन्होंने प्रयास किया, उनकी गाथाएं, उनकी कहानियां सेलेबस का हिस्सा बने तो बच्चों का सर्वांगिण विकास होगा।
हमारा इतिहास गौरवशाली लेकिन वर्षों के शासन का क्या- कांग्रेस
वहीं, सेलेबस से मुगल साम्राज्य को हटाने को लेकर कांग्रेस का कहना है कि हमारे देश का इतिहास निश्चित ही काफी गौरवशाली है। लेकिन अंग्रेजों ने हमारे देश में 300 साल तक शासन किया तो क्या उसे छुपाया या नकारा जा सकता है। ठीक उसी प्रकार मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया यहीं आकर बस गए तो इसको कैसे नकार सकते हैं। सरकार का यह फैसला प्रगति के रास्ते में कोई बड़ा कदम नहीं है। कांग्रेस ने बीजेपी की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।
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