
Meta Job Cuts: ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक दुनिया की बड़ी कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. (Meta Platforms Inc.) एक बार फिर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार सैकड़ों लोगों पर असर पड़ सकता है। कंपनी के अलग-अलग विभाग जैसे सेल्स, भर्ती (Recruiting) और Reality Labs में काम करने वाले कर्मचारी इससे प्रभावित हो सकते हैं। इस छंटनी से अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कर्मचारियों के प्रभावित होने की संभावना है। जानिए AI पर अरबों खर्च के बीच कंपनी क्या बड़ा बदलाव कर रही है और छंटनी का सबसे ज्यादा असर किन विभागों पर पड़ेगा।
एक आधिकारिक बयान में, मेटा के प्रवक्ता ने बताया कि समय-समय पर होने वाला पुनर्गठन बदलती बिजनेस प्रायोरिटीज के अनुसार टीमों को एडजस्ट करना एक रेगुलर काम है। यह भी कहा कि प्रभावित कर्मचारियों को यथासंभव पुनः तैनात करने के प्रयास कर रही है। इस छंटनी में 1,000 कम स्टाफ के प्रभावित होने की संभवाना है। बता दें कि कंपनी में वर्ष की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर लगभग 79,000 कर्मचारी थे।
सबसे ज्यादा असर रियलिटी लैब्स पर दिख रहा है, जो कंपनी का मेटावर्स प्रोजेक्ट संभालता है। यही वह यूनिट है, जिस पर मेटा ने पिछले कुछ सालों में भारी इनवेस्ट किया था। अब कंपनी यहां बदलाव करते हुए कुछ कर्मचारियों को पहले से ही वर्क फ्रॉम होम पर भेज रही है।
ऐसा जरूरी नहीं है। कंपनी की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि जिन कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित होगी, उन्हें दूसरी टीम में शिफ्ट या दूसरे शहर/देश में काम करने का मौका दिया जा सकता है। यानी मेटा पूरी तरह से टैलेंट खोना नहीं चाहता।
छंटनी को लेकर Meta का कहना है कि यह रूटीन रिस्ट्रक्चरिंग है, यानी समय-समय पर टीमों को नए बिजनेस गोल्स के हिसाब से बदला जाता है। लेकिन असली वजह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की ओर तेजी से बढ़ता फोकस है।
कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (CEO Mark Zuckerberg) ने साफ कहा है कि आने वाला समय AI का है। इसी वजह से Meta इस साल भारी निवेश करने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर इस साल ही करीब 135 अरब डॉलर तक खर्च कर सकती है।
AI से मेटा की नौकरियों पर काफी हद तक असर पड़ रहा है। Meta के अंदर ही इंजीनियर्स अब कोडिंग और दूसरे कामों में AI टूल्स का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे काम तेजी से हो रहा है, लेकिन कुछ रोल्स की जरूरत कम हो रही है। यही वजह है कि कंपनी अपने कर्मचारियों की भूमिका बदल रही है।
बता दें कि मेटा की यह छंटनी पहली बार नहीं है। इसी साल जनवरी में भी Meta ने 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों को निकाला था, खासकर रियलिटी लैब्स से। उस समय भी कंपनी ने मेटावर्स से थोड़ा पीछे हटकर AI और स्मार्ट डिवाइसेज पर ध्यान देने की बात कही थी।
Meta सिर्फ अभी नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए AI पर दांव लगा रही है। कंपनी 2028 तक अमेरिका में ही करीब 600 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना बना रही है। इससे साफ है कि Meta का भविष्य अब मेटावर्स से ज्यादा AI पर टिका है। साफ है कि Meta अब अपनी रणनीति बदल रही है। जहां पहले मेटावर्स पर फोकस था, अब AI सबसे बड़ा लक्ष्य बन चुका है। इस बदलाव का सीधा असर कर्मचारियों पर दिख रहा है। कुछ की नौकरी जा रही है, तो कुछ के काम बदल रहे हैं। आने वाले समय में टेक इंडस्ट्री में ऐसे बदलाव और भी देखने को मिल सकते हैं।
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