
नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को संसद में स्पष्ट किया कि स्कूलों में योग को अनिवार्य बनाने की उसकी कोई योजना नहीं है हालांकि राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ) 2005 के द्वारा योग को स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाया गया है।
आयुष मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। योग शिक्षा को अनिवार्य बनाने संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है और अधिकतर विद्यालय राज्य सरकारों के कार्यक्षेत्र में आते हैं।
योग शिक्षा देना सरकारों की ज़िम्मेदारी
उन्होंने कहा कि यह संबंधित राज्य सरकार पर निर्भर करता है कि वह छात्रों को उपुयक्त योग शिक्षा प्रदान करे। नाइक ने कहा, ‘‘योग को विद्यालयों में अनिवार्य बनाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। तथापि राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ) 2005 के द्वारा योग को स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाया गया है। इसमें बीमारियों को फैलने से रोकने में योग के प्रभावों का लाभ उठाने की सिफारिश की गयी है।’’
देश में योग विश्वविद्यालय खोलने की सरकार की योजना के बारे में पूछे गये एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि मसौदा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अन्य बातों के साथ साथ यह भी प्रस्तावित है कि योग स्कूली शिक्षा और उच्चतम शिक्षा के पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग होगा।
हालांकि चौबे ने इस बात का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया कि क्या सरकार की योग विश्वविद्यालय खोलने की योजना है? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन से जुड़े एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में नाइक ने बताया कि पिछले पांच साल में इसके आयोजन पर करीब 136 करोड़ रूपये खर्च किए गए हैं।
पिछले साल खर्च हुए 38 करोड़ रुपये
नाइक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन पर 2015 में 16 करोड़ 39 लाख रूपये, 2016 में 18 करोड़ तीन लाख रूपये, 2017 में 26 करोड़ करोड़ 42 लाख रूपये, 2018 में 37 करोड़ 68 लाख रूपये और 2019 में 38 करोड़ 23 लाख रूपये से अधिक व्यय किए गए।
(ये खबर पीटीआई/भाषा की है। एशियानेट हिन्दी न्यूज ने सिर्फ हेडिंग में बदलाव किया है।)
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