पत्थर तोड़कर गुजारा कर रहा है पूर्व क्रिकेट कप्तान, सरकार से लगाई गुहार- 'कोई अच्छी सी नौकरी दे दो'

Published : Jul 28, 2020, 05:40 PM ISTUpdated : Jul 28, 2020, 05:44 PM IST
पत्थर तोड़कर गुजारा कर रहा है पूर्व क्रिकेट कप्तान, सरकार से लगाई गुहार- 'कोई अच्छी सी नौकरी दे दो'

सार

धामी को 3 साल की उम्र में पैरालिसिस हो गया था, जिसके बाद से वह 90 फीसदी दिव्यांग हैं। मजदूरी करने से पहले धामी कुछ बच्चों को पिथौरागढ़ में ही क्रिकेट कोचिंग देते थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण सब ठप्प हो गया।

स्पोर्ट्स डेस्क. Rajendra Singh Dhami: भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राजेंद्र सिंह धामी इन दिनों मजबूरी में पत्थर तोड़कर अपना परिवार पाल रहे हैं। धामी पिथौरागढ़ जिले में स्थित अपने गांव रायकोट में मनरेगा योजना के तहत सड़क निर्माण में मजदूरी कर रहे हैं। धामी ने 2017 मे भारत-नेपाल-बांग्लादेश त्रिकोणीय व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज में भारत का नेतृत्व किया था।

कलेक्टर डॉक्टर विजय कुमार जोगदंडे को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने जिला खेल अधिकारी को राजेंद्र सिंह को तुरंत आर्थिक सहायता मुहैया कराने के लिए कहा है।

पिथौरागढ़ के कलेक्टर जोगदंडे ने बताया कि वर्तमान में राजेंद्र सिंह की आर्थिक स्थिति काफी खराब दिख रही है। उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना या किसी और स्कीम के तहत मदद की जाएगी, ताकि वे भविष्य में अपनी आजीविका जुटा सकें।

राजेंद्र सिंह ने सरकार से नौकरी मांगी

धामी ने बताया कि उन्हें एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेना था, लेकिन कोरोना के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। मैं सरकार से यही गुहार लगाना चाहता हूं कि वे मेरी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के मुताबिक मुझे नौकरी दें।

कोरोना के कारण उनकी क्रिकेट कोचिंग बंद

धामी को 3 साल की उम्र में पैरालिसिस हो गया था, जिसके बाद से वह 90 फीसदी दिव्यांग हैं। मजदूरी करने से पहले धामी कुछ बच्चों को पिथौरागढ़ में ही क्रिकेट कोचिंग देते थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण बच्चों ने आना छोड़ दिया, जिसके बाद परिवार पालने के लिए उन्हें गांव लौटकर मजदूरी करनी पड़ी।

सोनू सूद ने की मदद


मदद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग मेरी मदद के लिए आगे आए हैं। उनमें अभिनेता सोनू सूद भी हैं। सोनू सूद ने धामी को 11 हजार रुपए भेजे थे। रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में भी कुछ लोगों ने आर्थिक मदद की। लेकिन यह काफी नहीं था। जीने के लिए किसी भी तरह का काम करने में कोई समस्य नहीं है। मैंने मनरेगा में काम करने का फैसला इसलिए किया कि घर के नजदीक रह सकूं। यह मुश्किल समय है, लेकिन इससे भी निकल जाएंगे।’’

 

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