क्या केजरीवाल सरकार की वजह से टल सकती है निर्भया के दरिंदों की फांसी? दोषियों के वकील के दो बड़े दावे

Published : Feb 21, 2020, 07:55 PM ISTUpdated : Feb 21, 2020, 07:57 PM IST
क्या केजरीवाल सरकार की वजह से टल सकती है निर्भया के दरिंदों की फांसी? दोषियों के वकील के दो बड़े दावे

सार

निर्भया के दोषियों को 3 मार्च को फांसी होगी या नहीं? यह एक बड़ा सवाल है। दोषियों के वकील का तर्क है कि अभी कई कानूनी विकल्प बचे हैं। वहीं निर्भया की मां और उनकी वकील का कहना है कि इस बार की तारीख फाइनल है। 

नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों को 3 मार्च को फांसी होगी या नहीं? यह एक बड़ा सवाल है। दोषियों के वकील का तर्क है कि अभी कई कानूनी विकल्प बचे हैं। वहीं निर्भया की मां और उनकी वकील का कहना है कि इस बार की तारीख फाइनल है। ऐसे में सच क्या माना जाए। ऐसे में उन तर्कों को बताते हैं, जिनके दम पर दोषियों के वकील दावा कर रहे हैं कि 3 मार्च को फांसी नहीं होगी।

मनीष सिसोदिया के हस्ताक्षर से फंस सकता है पेंच?

निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह से Asianet News ने बात की। जाना कि आखिर क्यों 3 मार्च को फांसी नहीं होगी। उन्होंने बताया, 'जब दिल्ली सरकार ने दोषी विनय शर्मा की दया याचिका को खारिज किए जाने की अनुशंसा भेजी थी, उस समय दिल्ली विधानसभा का चुनाव था। आचार संहिता लगी हुई थी। ऐसे में गृह मंत्री मनीष सिसोदिया हस्ताक्षर नहीं कर सकते हैं। यही कारण है कि उनके हस्ताक्षर मूल कॉपी में नहीं हैं।'

सिजोफ्रेनिया बीमारी से टल सकती है फांसी?

वकील एपी सिंह ने कोर्ट में दलील दी थी, विनय का सिर फटा हुआ है। दायां हाथ फ्रैक्चर्ड है। वो अनपी मां को भी नहीं पहचान रहा है। उसे सिजोफ्रेनिया, मानसिक बीमारी है। 
गाइडलाइन्स के मुताबिक, फांसी की सजा पाने वाले कैदी की शारीरिक और मानसिक जांच की जाती है। दोषी को फांसी तभी दो जाती है जब जेल के अधिकारी इस बात को लेकर संतुष्ट होंगे कि वह शख्स स्वस्थ है। ऐसे में यहां पर पेंच फंस सकता है।

किसके पास कितने विकल्प बचे हैं?

चारों दोषियों को 3 मार्च को फांसी होगी, इसकी उम्मीद कम ही है। इसके पीछे वजह है कि अभी दोषी पवन के पास दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। इसके अलावा पवन के पास क्यूरेटिव पिटीशन का भी विकल्प है। अभी पवन ने दया याचिका नहीं दी है। अगर पवन दया याचिका देता है और उसकी याचिका खारिज भी होती है तो खारिज होने की तारीख से 14 दिन तक वक्त दिया जाता है। राष्ट्रपति की तरफ से दया याचिका खारिज होने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। दिल्ली का 2018 का प्रिजन मैनुअल कहता है, जब तक दोषी के पास एक भी कानूनी विकल्प बाकी है, उसे फांसी नहीं हो सकती। अगर उसकी दया याचिका खारिज भी हो जाती है तो भी उसे 14 दिन का समय दिया जाना चाहिए। 

क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड

दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।  

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

मकर संक्रांति: कहीं गर्दन की हड्डी रेती तो कहीं काटी नस, चाइनीज मांझे की बेरहमी से कांप उठेगा कलेजा
Ariha Shah Case: साढ़े 4 साल से Germany में फंसी मासूम, मौसी ने बताया क्या है पूरा मामला