निर्भया: क्या दोषियों को अलग अलग फांसी होगी, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जानिए क्या तर्क दिए गए

Published : Feb 02, 2020, 03:22 PM ISTUpdated : Feb 02, 2020, 06:48 PM IST
निर्भया: क्या दोषियों को अलग अलग फांसी होगी, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जानिए क्या तर्क दिए गए

सार

निर्भया के हत्यारों की फांसी अलग-अलग हो सकती है या नहीं, इसपर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख टालने के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

नई दिल्ली. निर्भया के हत्यारों की फांसी अलग-अलग हो सकती है या नहीं, इसपर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख टालने के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा। तुषार मेहता ने कहा कि दोषियों के रवैये से साफ है कि वो कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्भया के दोषियों को एक फरवरी को फांसी होनी थी, लेकिन दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी की तारीख को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया। 

तुषार मेहता ने कर्नाटक एनकाउंटर का जिक्र किया

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने दलील दी, कर्नाटक में क्या हुआ। जब एनकाउंटर हुआ पता नहीं, सही था या गलत। ये जांच का विषय है। लेकिन लोगों ने एनकाउंटर को सेलिब्रेट किया। ऐसे ही मामलों की वजह से यह हो रहा है।

"गुनहगार कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं"

तुषार मेहता ने कहा, गुनहगार कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। देश के सब्र की परीक्षा ले रहे है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से तेलंगाना एनकाउंटर के बाद लोगों ने जश्न मनाया था।

निर्भया के दोषियों को अलग-अलग फांसी दी जा सकती है : तुषार मेहता

केंद्र सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाइकोर्ट में दलील दी, नियम के हिसाब से मौजूदा वक्त में निर्भया के हत्यारों को अलग अलग फांसी दी जा सकती है। जैसे ही राष्ट्रपति दया याचिका खारिज करते हैं फांसी हो सकती है। 

निर्भया केस में केंद्र सरकार कहां से आ गई: दोषी के वकील

मुकेश के वकील ने कोर्ट में कहा, सरकार इस केस में खुद को ला रही है जबकि उसका इस केस से सीधे तौर पर कोई लेना-देना नहीं है। इससे पहले तो ये कभी नहीं आये थे तो अब क्यों। उन्होंने कहा, इन्होंने कैसे याचिका दायर कर दी, क्योंकि वो तो इसमें पार्टी ही नहीं है। इसमे तो निर्भया के माता पिता और दिल्ली सरकार ही पार्टी थे। केंद्र इस मामले में जबरन खुद को क्यों लाना चाहती है।

शनिवार को हुई थी सुनवाई

इस मामले में शनिवार को सुनवाई हुई थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि निर्भया मामले में दोषियों ने कानून की प्रक्रिया का मजाक बना दिया है और फांसी को टालने में लगे हैं। 

"बिना देर किए फांसी होनी चाहिए"

तुषार मेहता ने कहा था कि दोषी को एक बार यदि उसकी मौत के बारे में सूचना दे दी जाती है तो बिना विलंब फांसी होनी चाहिए। नहीं तो इसका दोषी पर अमानवीय प्रभाव पड़ेगा।

इतनी देर से जागी केंद्र सरकार : दोषी की वकील

दोषी मुकेश की वकील रेबेका जॉन ने कहा, केंद्र सरकार दोषियों को फांसी देने में देर करने का आरोप लगा रही है, लेकिन खुद ही दो दिन पहले जागा है।

'अंतिम सांस तक हर विकल्प के इस्तेमाल का अधिकार'

वकील रेबेका जॉन ने कहा, मेरे कानूनी उपायों का उपयोग करने के लिए आप मेरी निंदा नहीं कर सकते हैं। संविधान के अनुसार मुझे अपने जीवन के अंतिम सांस तक हर विकल्प का इस्तेमाल करने का अधिकार है।

दोषी के वकील एपी सिंह ने कहा, इतनी जल्दबाजी क्यों?

दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि इस मामले में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि दोषी गरीब, ग्रामीण और दलित परिवारों से हैं। सुप्रीम कोर्ट और संविधान में फांसी देने के लिए कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है।

2 बार टाली जा चुकी है फांसी

निर्भया केस के चारों दोषियों की फांसी की तारीख 2 बार टाली जा चुकी है। सबसे पहले दोषियों को 22 जनवरी को फांसी होनी थी, लेकिन याचिका दायर होने की वजह से फांसी टाल दी गई। इसके बाद अगली तारीख 1 फरवरी को तय की गई। लेकिन दया याचिका पेंडिंग होने की वजह से दोबारा फांसी की तारीख टाल दी गई।

मौत से बचने के लिए दोषियों के पास कितने विकल्प?

दोषी मुकेश और विनय की सुप्रीम कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद रिव्यू, क्यूरेटिव और फिर दया याचिका खारिज हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में रिट डालने का अधिकार हमेशा रहता है। अक्षय की रिव्यू और क्यूरेटिव खारिज हो चुकी है, लेकिन दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। पवन की क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका दोनों ही बची है।

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