
Javed Akhtar On India Pakistan Refugees : जावेद अख्तर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की सरकारों को 1950 के दशक में दोनों पक्षों के शरणार्थियों (refugees ) को एक साथ लाना चाहिए था और उन्हें अपनी बातें कहने का मौका दिया जाना चाहिए था। उन्हें अपनी कहानियां सुनाने का हक तो था। गीतकार ने सीधे तौर पर ना कहते हुए तत्कालीन सरकार के मुखिया पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
फिल्म समीक्षक-लेखिका ( reviewer-writer) भावना सोमाया की किताब फेयरवेल कराची के रिलीज के अवसर पर उन्होंने कहा, "सुलह के लिए अब थोड़ी देर हो चुकी है। भारत में हमारे लोग ही जानते हैं कि 1947-48 के बाद उनके साथ क्या हुआ था। वहां के लोग जानते हैं कि उनके साथ क्या हुआ था। काश वे सभी एक बार साथ बैठते... 75 साल हो गए हैं, वे अब 90 के दशक में होंगे। उनमें से अब कितने ही जीवित होते?"
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