रेखा ने 3 साल में फेस किया कैमरा, 13 की उम्र में अकेले मुंबई आईं, फिर ऐसे बनीं सुपरस्टार

Published : Sep 21, 2026, 02:07 PM IST

Rekha Bollywood Superstar Journey: रेखा का सफर इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जिस करियर को कभी अपनी पसंद नहीं माना था, उसी में अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर ऐसी जगह बनाई कि वह हिंदी सिनेमा की आइकॉनिक अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।

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रेखा ने 3 साल में फेस किया कैमरा, 13 की उम्र में अकेले मुंबई आईं, फिर ऐसे बनीं सुपरस्टार

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस रेखा आज हिंदी सिनेमा की सबसे मशहूर और सम्मानित अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। अपनी खूबसूरती, शानदार अदाकारी और अलग अंदाज से उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसी पहचान बनाई, जो दशकों बाद भी कायम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेखा ने कभी एक्ट्रेस बनने का सपना देखा ही नहीं था? एक पुराने इंटरव्यू में रेखा ने अपने फिल्मी सफर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि वह अपनी मर्जी से फिल्मों में नहीं आई थीं। उन्हें कम उम्र में ही फिल्मों में काम करने के लिए मजबूर किया गया था। यहां तक कि महज 13 साल की उम्र में वह अकेले बॉम्बे यानी आज की मुंबई आ गई थीं। उस वक्त उन्हें हिंदी भी ठीक से नहीं आती थी।

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‘मैं कभी एक्ट्रेस बनना ही नहीं चाहती थी’

साल 1986 में बीबीसी इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में रेखा ने अपने बचपन और फिल्मों में एंट्री को लेकर खुलकर बात की थी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी मां ने उन्हें एक्ट्रेस बनने के लिए प्रोत्साहित किया था, तो रेखा ने साफ कहा था कि वह खुद कभी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थीं। रेखा ने बताया था कि आमतौर पर जब किसी एक्टर से पूछा जाता है कि वह एक्टर क्यों बना, तो वह कहता है कि बचपन से ही उसका यही सपना था। लेकिन उनके मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं था। उन्होंने कहा था कि वह एक्ट्रेस नहीं बनना चाहती थीं और उन्हें काफी दबाव के बीच फिल्मों में लाया गया।

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3 साल की उम्र से कैमरे के सामने कर रही थीं काम

रेखा का फिल्मों से रिश्ता काफी कम उम्र में ही जुड़ गया था। उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि वह सिर्फ 3 साल की उम्र से ही चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं। यानी जिस उम्र में बच्चे स्कूल और खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में रेखा फिल्म सेट पर काम कर रही थीं। हालांकि, उस वक्त फिल्मों में काम करना उनका अपना फैसला नहीं था। उन्होंने बताया था कि शुरुआती 6-7 साल तक उन्हें यह काम बिल्कुल पसंद नहीं था। वह शूटिंग और डबल शिफ्ट से भी परेशान रहती थीं।

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13 साल की उम्र में अकेले पहुंचीं बॉम्बे

रेखा के शुरुआती फिल्मी सफर का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा यह था कि वह महज 13 साल की उम्र में अकेले बॉम्बे आ गई थीं। इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि वह अपने माता-पिता के साथ मुंबई आई थीं या अकेले, तो उन्होंने बताया था कि वह अकेली आई थीं। उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं थी और वह उनके साथ नहीं आ सकीं। उस समय रेखा हिंदी भी नहीं बोल पाती थीं। इसके बावजूद उनकी किस्मत उन्हें हिंदी फिल्मों की तरफ ले आई।

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जब हिंदी फिल्म के लिए हुआ था ऑफर

रेखा ने बताया था कि दो लोग नई हीरोइन की तलाश में मद्रास आए थे। किसी ने उन्हें बताया कि एक साउथ इंडियन लड़की है, जिसे थोड़ी-बहुत हिंदी आती है। जब वे रेखा से मिले तो उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वह हिंदी जानती हैं। रेखा ने जवाब दिया था कि नहीं। इसके बाद उनसे पूछा गया कि क्या वह हिंदी फिल्मों में काम करना चाहती हैं। रेखा ने इसका जवाब भी ‘नहीं’ में दिया था। इसके बावजूद उन लोगों ने उन्हें साइन करने का फैसला कर लिया। रेखा को लगा कि शायद यही उनकी किस्मत है और उन्हें हिंदी फिल्मों में काम करना ही है।

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पहली फिल्म के बाद भी एक्टिंग में नहीं आई दिलचस्पी

रेखा ने यह भी बताया था कि पहली फिल्म करने के बाद भी उनके मन में एक्टिंग को लेकर कोई खास दिलचस्पी पैदा नहीं हुई थी। जब इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या पहली फिल्म के बाद उनका एक्टिंग में इंटरेस्ट बढ़ा, तो उन्होंने साफ कहा था- बिल्कुल नहीं। उन्होंने बताया कि कई साल तक वह फिल्मों में काम करती रहीं, लेकिन उन्हें यह काम पसंद नहीं था। उनके लिए यह कुछ ऐसा था, जिसे वह अपनी इच्छा से नहीं बल्कि परिस्थितियों के कारण कर रही थीं।

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‘सावन भादों’ की सफलता ने बदली सोच

रेखा के करियर में बड़ा बदलाव उनकी फिल्म ‘सावन भादों’ की सफलता के बाद आया। यह फिल्म 1970 में रिलीज हुई थी और रेखा के करियर की बड़ी कामयाबी साबित हुई। फिल्म की सफलता के बाद उन्हें रातों-रात स्टार के तौर पर पहचान मिलने लगी। रेखा ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि उनके स्कूल के दोस्त अभी पढ़ाई कर रहे थे और जब उन्होंने फिल्म देखी तो रेखा को अपने लिए गर्व महसूस हुआ। हालांकि, उस समय उन्हें खुद भी पूरी तरह समझ नहीं था कि वह क्या कर रही हैं।

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‘घर’ ने पहली बार एक्टिंग को समझने का मौका दिया

रेखा के लिए सिर्फ ‘सावन भादों’ ही अहम नहीं रही। उन्होंने बताया था कि साल 1975 के बाद आई फिल्म ‘घर’ ने उनके एक्टिंग को लेकर नजरिए को पूरी तरह बदल दिया। रेखा ने कहा था कि ‘घर’ देखने और उसमें काम करने के बाद पहली बार उन्हें लगा कि उन्हें एक्टिंग को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्हें फिल्म का काम काफी वास्तविक लगा और यहीं से उनके अंदर अभिनय को लेकर एक नई दिलचस्पी पैदा हुई।

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जिस एक्टिंग से कभी भागती थीं, वही बन गई जिंदगी

रेखा ने इंटरव्यू के आखिर में बताया था कि अब उनकी एक्टिंग को लेकर सोच पूरी तरह बदल चुकी थी। कभी जो लड़की एक्ट्रेस नहीं बनना चाहती थी, वही आगे चलकर अभिनय को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा मानने लगी। उन्होंने कहा था कि अब वह एक्टिंग को समझती हैं और उन्हें यह काम पसंद है। उनके लिए एक्टिंग उनकी जिंदगी की सबसे सच्ची चीजों में से एक बन गई और वह इसे काफी एंजॉय करती हैं।

रेखा का सफर इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जिस करियर को कभी अपनी पसंद नहीं माना था, उसी में अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर ऐसी जगह बनाई कि वह हिंदी सिनेमा की आइकॉनिक अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। एक चाइल्ड आर्टिस्ट से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे स्टारडम और फिर शानदार अभिनय की पहचान तक पहुंचा।

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