Nana Patekar Helped Financially Sai Deodhar Family: नाना पाटेकर के करीबी लोग उनके निधन की खबर से बिल्कुल टूट गए हैं। इन्हीं में एक नाम साई देवधर का है। साई कहती हैं, “वो मेरे मुंह बोले मामा थे। मेरे माता-पिता उनके दोस्त थे…।'
'नाना पाटेकर कमाई का 10% मेरी मां को देते थे...' साई देवधर ने खोले अनसुने राज
बॉलीवुड में नाना पाटेकर के जाने के बाद हर तरफ शोक छाया हुआ है। आठ अक्टूबर को गोवा में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया। उम्र सिर्फ 75 साल थी। इंडस्ट्री वाले तो सदमे में हैं ही, लेकिन उनके करीबी लोग तो बिल्कुल टूट गए हैं। इन्हीं में एक नाम है साई देवधर का। फिल्म डायरेक्टर और टीवी एक्ट्रेस साई ने एक्सक्लूसिव बातचीत में नाना काका के वो किस्से सुनाए हैं जो पहले कभी सामने नहीं आए थे। उन्होंने बताया कि नाना सिर्फ अभिनेता नहीं थे, बल्कि उनके परिवार के हिस्से जैसे थे। साई की मां को बहन मानते थे और अपनी कमाई का दस फीसदी हिस्सा उनके खाते में ट्रांसफर कर देते थे। ये बात सुनकर तो दिल भर आता है। साई कहती हैं कि वो अभी भी यकीन नहीं कर पा रही हैं कि नाना काका अब नहीं रहे।
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नाना काका की मौत की खबर सुनकर परिवार में छाया सन्नाटा
साई देवधर बताती हैं कि वो आज ही नाना काका को फोन करने वाली थीं। उनकी नई फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए बुलावा देने के लिए। लेकिन खबर आ गई कि वो चले गए। सिर्फ चार दिन पहले साई की मां ने उनसे बात की थी। पूरा परिवार बहुत करीब था। साई कहती हैं, “वो मेरे मुंह बोले मामा थे। मेरे माता-पिता उनके दोस्त थे, तब जब वो स्टार भी नहीं बने थे। रात को आ जाते थे, हमें डिनर पर ले जाते या आइसक्रीम खिलाने।” उनके पिता देबू देवधर नाना के राइट हैंड जैसे थे और मां शारबानी देवधर भी फिल्मों में काम करती थीं।
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प्रहार फिल्म के दिनों की वो यादें जो कभी नहीं भूलेंगी
नाना पाटेकर की डायरेक्टोरियल फिल्म प्रहार में साई ने डिंपल कपाड़िया के बेटे का किरदार निभाया था। उस फिल्म के दौरान परिवार और नजदीक आ गया। साई याद करती हैं कि एक बार रात को आइसक्रीम खाने गए तो दोनों तरफ से पैसे नहीं निकले। नाना सोचते थे कि साई के पिता के पास पैसे हैं और पिता सोचते थे कि नाना के पास हैं। आखिर में बिना पैसे के ही आइसक्रीम खाई। फिल्म शुरू होने पर पांच-छह असिस्टेंट डायरेक्टर थे, लेकिन आखिर तक सिर्फ साई की मां ही बचीं। नाना काका को संभालना आसान नहीं था। साई कहती हैं कि उनके पिता भी नाना जितने ही पागल थे।
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शादी के दिन नाना काका का प्यार और सुरक्षा का भाव
साई की शादी शक्ति आनंद से हुई तो नाना वहां मौजूद थे। पंडित जी से कहा कि रस्में जल्दी खत्म करो, हमें मजा लेना है। शक्ति से बोले कि अगर साई परेशान करे तो मुझे बताना, लेकिन उसे कुछ मत कहना। साई कहती हैं कि वो हमेशा उनका ख्याल रखते थे। जब उनके पिता का निधन हुआ तो नाना उनके साथ खड़े रहे। एक बार उन्होंने अपनी पहली कार सफारी खरीदी तो रात को सबको जगाया और ड्राइव पर ले गए। प्रहार के दिनों में साई के लिए एक दुकान खुलवाई और वीडियो गेम खरीद दिया। वो उन्हें बेटी की तरह मानते थे और खूब लाड़ करते थे।
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चॉल में रहने वाले परिवार के लिए नाना की दरियादिली
सबसे ज्यादा दिल छू लेने वाली बात ये है कि साई के माता-पिता चॉल में रहते थे। नाना काका अपनी कमाई का दस फीसदी हिस्सा साई की मां के खाते में ट्रांसफर कर देते थे। वो उन्हें अपनी बहन मानते थे। साई कहती हैं, “ये चीजें तो बेमोल हैं। मल्हार और मैं साथ में बड़े हुए।” नाना बच्चे जैसे थे। अचानक गुस्सा भी आ जाता था, लेकिन दिल के सच्चे थे। साई बताती हैं कि वो किसी को तकलीफ नहीं देना चाहते थे। कहते थे कि जाएंगे तो ऐसे जाएंगे। भगवान ने उनकी इज्जत रखी। अस्पताल में बीमार हालत में देखना सबसे दर्दनाक होता। वो शेर थे, राजा की तरह गए।
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यादों में हमेशा हंसी और प्यार के साथ रहेंगे नाना काका
साई कहती हैं कि वो नाना काका को सिर्फ हंसी में याद करेंगी। आखिरी बातचीत में वो उनकी बेटी यानी अपनी पोती से मिलना चाहते थे। साई उन्हें हमेशा अपने पागल मामा के रूप में याद रखेंगी। नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे में उनके घर पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ। इंडस्ट्री में कई लोग उनके साधारण जीवन और बड़े दिल की बातें कर रहे हैं। साई की ये यादें बताती हैं कि नाना सिर्फ स्क्रीन पर ही नहीं, असल जिंदगी में भी कितने बड़े इंसान थे।
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