
नाना पाटेकर के निधन के बाद तनुश्री दत्ता के ‘ईविल डेड’ बयान पर विवाद के बीच सिंगर सोना महापात्रा और एक्ट्रेस संध्या मृदुल ने उनका समर्थन किया है। सोना ने कहा कि किसी कलाकार के लिए शोक मनाना अलग बात है, लेकिन अपने अनुभव बताने वाली महिला को चुप कराना अलग। उन्होंने नाना की समाजसेवा का हवाला देकर तनुश्री की आलोचना करने वालों की सोच पर सवाल उठाए। वहीं, संध्या ने पूछा कि क्या किसी की मौत से कथित बदसलूकी का असर मिट जाता है। उन्होंने कहा कि सर्वाइवर उस दर्द के साथ जिंदगी भर रहता है और वह हमेशा पीड़ित के साथ खड़ी रहेंगी।
नाना पाटेकर के निधन के बाद तनुश्री दत्ता को उनके ‘ईविल डेड’ बयान के लिए आलोचना झेलनी पड़ रही है। इसी बीच सोना महापात्रा ने एक्स और इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर तनुश्री को सपोर्ट किया। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी एक्टर के निधन पर शोक जताना और सेक्शुअल हैरेसमेंट का अपना अनुभव बताने वाली महिला को चुप रहने के लिए कहना दो अलग बातें हैं। सोना ने अपने पोस्ट में लिखा, “मौत सम्मान की हकदार है। जीवित लोग भी। किसी एक्टर के निधन पर शोक मनाना एक बात है। अपने सदमे और तकलीफ के बारे में बोलने वाली महिला से चुप हो जाने की मांग करना दूसरी बात है। आखिर कब से मौत असहज सच्चाइयों को मिटाने लगी? क्या उम्रदराज होना अपने-आप में कोई गुण है? मौत = संतत्व?”
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सोना ने कहा कि गलत बात के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें अक्सर लोगों के बीच अलोकप्रिय होने की आदत पड़ गई है। नाना के निधन पर शोक जताने वालों पर उन्हें आपत्ति नहीं थी, लेकिन तनुश्री को निशाना बनाए जाने से वह परेशान थीं। उन्होंने कहा, “नाना पाटेकर का कल निधन हो गया। वह एक सम्मानित एक्टर थे और लोग उनके लिए शोक मना रहे हैं, जो समझ में आता है। मुझे इससे कोई समस्या नहीं है। मुझे जो परेशान कर रहा है, वह है लोगों का तनुश्री दत्ता पर हमला करना। सच में, आप उससे क्या उम्मीद करते हैं?”
तनुश्री के पक्ष में बात रखते हुए सोना ने उस मुश्किल दौर का जिक्र किया, जिसका सामना एक्ट्रेस ने नाना पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने के बाद किया था। उन्होंने कहा, “इस महिला ने इस सज्जन के साथ सेट पर हुए यौन उत्पीड़न के बारे में आवाज उठाई। एक थका देने वाली लड़ाई लड़ी। सार्वजनिक अपमान और पेशेवर परिणाम झेले। और अब, उससे उम्मीद की जा रही है कि वह अपना अनुभव भूल जाए और आपके लिए क्या दिखावा करे? शोक? क्या इससे आपको सुकून मिलेगा?”
सोना ने तनुश्री की आलोचना में शामिल महिलाओं को भी सवालों के घेरे में लिया। उन्होंने कहा, “सच में? किसी दूसरी महिला को अपमानित करना क्या आपके लिए जुड़ाव दिखाने का तरीका है?” उन्होंने आगे लिखा, “किसी की मौत से उसकी जिंदगी के असहज अध्याय मिट नहीं जाने चाहिए। आप किसी कलाकार के काम का जश्न मना सकते हैं, उसके निधन पर शोक जता सकते हैं और उसके परिवार के प्रति संवेदना रख सकते हैं। लेकिन आप किसी महिला से यह मांग नहीं कर सकते कि वह अपने इतिहास को दोबारा लिखे, ताकि आपका शोक आरामदायक बना रहे।”
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सोना ने यह भी कहा कि नाना को उनके बेबाक या ‘मुंहफट’ अंदाज के लिए सराहा जाता था, जबकि किसी महिला के सीधे और तल्ख बोलने पर उसे अक्सर बदतमीज कहा जाता है। उन्होंने तनुश्री के अपने अनुभव के बारे में बोलने के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा, “तनुश्री दत्ता को अपने साथ हुई घटना के बारे में अपनी बात रखने का पूरा हक है। और अगर आपकी करुणा के लिए जरूरी है कि आप आवाज उठाने वाली महिला को अपमानित करें, तो वह करुणा बिल्कुल नहीं है। यह आपका पाखंड है। मौत सम्मान की हकदार है, जीवित लोग भी।”
नाना के समाजसेवा कार्यों का हवाला देने वाले एक इंस्टाग्राम यूजर ने सोना से सवाल किया था कि वह ऐसे व्यक्ति की आलोचना क्यों कर रही हैं, जिसने कथित तौर पर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा किसानों और गरीबों को दान किया, और उसके खिलाफ सिर्फ एक महिला ने ही आवाज क्यों उठाई। इस पर सोना ने सवाल किया कि क्या दान-पुण्य किसी व्यक्ति पर लगे दुर्व्यवहार के आरोपों को अप्रासंगिक बना देता है। उन्होंने ब्रिटेन के जिमी सैविल का उदाहरण भी दिया और सवाल उठाया कि ‘सिर्फ एक महिला ने आवाज क्यों उठाई’ कहना अपने-आप में चिंताजनक है।
एक्ट्रेस संध्या मृदुल ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस बहस पर अपनी राय रखी। उन्होंने अपनी पोस्ट में न तो तनुश्री और न ही नाना का नाम लिया, लेकिन सवाल किया कि क्या किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके कथित दुर्व्यवहार का असर खत्म हो जाता है। संध्या ने लिखा, “क्या किसी व्यक्ति की मौत के बाद वह बदसलूकी करने वाला नहीं रह जाता? क्या उसके कारण पहुंचा नुकसान भी गायब हो जाता है? जिन लोगों ने यह सब सहा है, उनके लिए ऐसा नहीं होता।” पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने कहा, “जिस व्यक्ति ने यह सब सहा है, वह अपनी पूरी जिंदगी इसके असर के साथ जीता है। मैं हमेशा पीड़ित के साथ खड़ी रहूंगी।”
संध्या ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में भी इसी मुद्दे पर विस्तार से बात की। उन्होंने लिखा, “किसी व्यक्ति की मौत अपने-आप उस नुकसान को मिटा नहीं देती, जो उसने पहुंचाया हो सकता है। दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति चला जाए, तो दुर्व्यवहार की सच्चाई खत्म नहीं हो जाती। सार्वजनिक श्रद्धांजलियों के बीच पीड़ितों के अनुभव कम वास्तविक नहीं हो जाते। किसी के निधन पर शोक मनाना संभव है, लेकिन यह याद रखना भी जरूरी है कि कुछ लोग उससे जुड़ा दर्द लेकर जी रहे हो सकते हैं। जब केवल प्रशंसा की इजाजत होती है और पीड़ितों को भुला दिया जाता है, तो ऐसा महसूस हो सकता है कि उनकी सच्चाई एक बार फिर मिट रही है।”
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तनुश्री दत्ता ने 2008 में फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। 2018 में #MeToo आंदोलन के दौरान यह मामला व्यापक चर्चा में आया। नाना ने इन आरोपों से इनकार किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2019 में पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण मामले को बंद कर दिया गया था। 2025 में शिकायत दर्ज कराने की कानूनी समय-सीमा से जुड़े आधार पर आपराधिक कार्यवाही भी खारिज कर दी गई थी। नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। इसके बाद तनुश्री के ‘ईविल डेड’ बयान पर विवाद शुरू हुआ, जो सुर्खियां बटोर रहा है।
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