प्रभास के करियर की पहली हॉरर कॉमेडी फिल्म 'द राजा साब' रिलीज हो गई है। मारुति दासारी ने इस फिल्म का डायरेक्शन किया है और संजय दत्त, बोमन ईरानी, मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल, रिद्धि कुमार और ज़रीना वहाब जैसे कलाकार भी दिख रहे हैं। जानिए कैसी है फिल्म...
यह कहानी असल में एक पोते और उसके दादा की आत्मा के बीच टकराव की है। राजू (प्रभास) अपनी दादी (ज़रीना वहाब) के साथ रहता है, जो कि अल्जाइमर की मरीज है और सबकुछ भूल चुकी है। लेकिन वह अपने पति (संजय दत्त) को हमेशा याद करती है, जो कि तांत्रिक था। दादी को लगता है कि उसके पति को देश निकाला मिला है। राजू अपने दादा की तलाश में हैदराबाद पहुंचता है और वहां उसे पता चलता है कि उसके दादा की मौत हो चुकी है, लेकिन आत्मा भटक रही है और वह बेहद खतरनाक है। राजू इस रहस्य की जड़ तक जाता है तो उसे अपने दादा के काले अतीत और लालच के बारे में पता चलता है। दादा और पोते के बीच के टकराव के इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है, जिसे समझने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
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कैसा है 'द राजा साब' का डायरेक्शन
'द राजा साब' की कहानी सुनने में दिलचस्प लगती है। लेकिन मारुति इसे उतने बेहतर तरीके से ना लिख सके हैं और ना ही पर्दे पर उतार सके हैं। फर्स्ट हाफ कहानी के हिस्सों को जोड़ने में सफल नहीं हो पाया है। फिल्म बिखरी-बिखरी लगती है। फिल्म की गति इसी की सबसे कमजोर कड़ियों में शामिल है, जिसके चलते यह जबरदस्ती खींची हुई लगती है। हालांकि, सेकंड हाफ में कुछ सीन बढ़िया बन पड़े हैं, लेकिन पूरी फिल्म पर ये बेअसर मालूम होते हैं।
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'द राजा साब' की स्टार कास्ट की एक्टिंग
प्रभास पहली बार फुल फ्लेज्ड कॉमेडी रोल में हैं। उन्होंने दर्शकों को हंसाने में जान झोंक दी है, लेकिन उनके सीन असर नहीं छोड़ पाते हैं। इसकी वजह उनके सीन्स की कमज़ोर राइटिंग भी है। उनके सीन उनके फैन्स को निराश कर सकते हैं। मालविका मोहनन अपने तेलुगु तेलुगु में असर नहीं छोड़ पाती हैं। निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार के लिए फिल्म में करने लायक ज्यादा कुछ नहीं हैं। संजय दत्त अपने किरदार में खूब जमे हैं। या यूं कहें कि वे इस फिल्म की जान हैं। खासकर प्रभास के साथ उनके सीन दिलचस्प लगते हैं। ज़रीना वहाब ने अच्छा काम किया है और बाकी स्टार कास्ट ने भी अपने हिस्से में एक्टिंग की छाप छोड़ी है।
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'द राजा साब'' का संगीत
यह फिल्म म्यूजिक के लेवल पर भी कमज़ोर नज़र आती है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक निराश करता है। ऐसा लगता है कि थमन एस. ने इस फिल्म के लिए आधे-अधूरे मन से काम किया है। फिल्म के गाने जबरदस्ती ठूंसे हुए लगते हैं। ये फिल्म की गति को धीमा करते हैं। खासकर 'नाचे-नाचे' गाने की फिल्म के कोई जरूरत ही समझ नहीं आती।
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देखें या ना देखें 'द राजा साब'
अगर आप हार्ड कोर हॉरर कॉमेडी फिल्मों के शौक़ीन हैं तो यह फिल्म आपको निराश करेगी। क्योंकि इसमें ना आपको पूरी तरह डर महसूस होगा और ना ही आप पेट पकड़कर हंसने को मजबूर होंगे। प्रभास के फैन्स भी इस फिल्म से संतुष्ट नहीं होंगे। संजय दत्त के फैन्स इस फिल्म को एक बार देख सकते हैं। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार।
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