उज्जैन. भगवान श्रीगणेश का स्वरूप देखने में बहुत ही रहस्यमयी लगता है। उनके शरीर का हर अंग बहुत ही विचित्र है जैसे- हाथी के समान मुख, सूंड, बड़े-बड़े कान, छोटी-छोटी आंखें, बड़ा पेट आदि। देखने में भले ही श्रीगणेश का स्वरूप विचित्र लगे, लेकिन गणेशजी के इन सभी अंगों में बिजनेस मैनेजमेंट से जुड़े खास सूत्र छिपे हैं, जरूरत है तो उन्हें समझने की। श्रीगणेश से जुड़े बिजनेस मैनेजमेंट के इन सूत्रों को आजमाकर आप अपने बिजनेस को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। आज हम आपको बिजनेस मैनेजमेंट के यही सूत्र बता रहे हैं-
गणेशजी का बड़ा सिर हमें बताता है कि बिजनेस में बड़ी सोच रखकर ही आगे बढ़ना चाहिए। जब हमारे पास बड़ा टारगेट और एक पुख्ता प्लान होगा तो निश्चित रूप में हम अपने बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सफल होंगे।
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बड़े कान हमें बताते हैं कि बिजनेस में हमेशा सजग रहना चाहिए। हमारा सूचना तंत्र इतना मजबूत होना चाहिए कि बिजनेस को प्रभावित करने वाली हर बात हमें तुरंत पता होनी चाहिए ताकि हम समय पर रणनीति बना सकें।
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छोटी आंखें हमें बताती हैं कि बिजनेस में हमें सदैव अपना लक्ष्य निर्धारित रख कर आगे बढ़ना चाहिए। छोटी आंख वाले सभी जीवों की नजर बहुत तेज होती है और उनका ध्यान पूरी तरह अपने लक्ष्य पर ही होता है।
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श्रीगणेश का एक दांत हमें बताता है कि हमें बिजनेस की पूरी जानकारी होना चाहिए। टूटा हुआ दांत संसाधन का प्रतीक है। यानी संसाधन कम भी हो तो बाद में जुटाए जा सकते हैं, लेकिन बिजनेस का पूरा ज्ञान जरूरी है।
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जैसे हाथी की सूंड बड़ी होती है, उसी तरह हमारे बिजनेस संपर्क भी दूर-दूर तक होना चाहिए ताकि उनका लाभ भी हमें मिलता रहे। सूंड की पकड़ भी मजबूत होती है, उसी तरह कर्मचारियों पर भी हमारी पकड़ मजबूत रहे।
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बिजनेस में लाभ-हानि होती रहती है। कभी-कभी हानि का अनुपात ज्यादा हो जाता है। ऐसी स्थिति में गणेशजी का बड़ा पेट हमें सीखाता है कि हमारे अंदर हानि पचाने की भी पूर्ण क्षमता होनी चाहिए।
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चूहे की प्रवृत्ति होती है कुतरने की। अत: ये कुतर्क (बुरे विचार) का प्रतीक है। गणेश बुद्धि के देवता हैं। यानी बिजनेस को बढ़ाने के लिए आपके हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और कुतर्क को काबू में रखना चाहिए।
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