उज्जैन. गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले की दांता तालुका में स्थित अम्बाजी का मंदिर देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है। मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊँचा है। शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं। इस मंदिर में देवी की प्रतिमा की नहीं बल्कि श्रीयंत्र की पूजा होती है।
इस स्थान पर गिरा था देवी सती का ह्रदय
मान्यता है कि इस स्थान पर मां सती का हृदय गिरा था। इसका उल्लेख "तंत्र चूड़ामणि" में भी मिलता है। हाल की खोज से ज्ञात हुआ है कि अम्बाजी के इस मन्दिर का निर्माण वल्लभी शासक, सूर्यवंश सम्राट अरुण सेन ने चौथी शताब्दी, ईसवी में करवाया था।
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गब्बर पहाड़ी पर है माता के पद्चिह्न
मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर गब्बर नामक पहाड़ है। इस पहाड़ पर भी देवी मां का प्राचीन मंदिर स्थापित है। माना जाता है यहां एक पत्थर पर मां के पदचिह्न बने हैं। पदचिह्नों के साथ-साथ मां के रथचिह्न भी बने हैं। अम्बाजी के दर्शन के उपरान्त श्रद्धालु गब्बर जरूर जाते हैं। गब्बर पर्वत पर अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं, जैसे सनसेट प्वाइंट, गुफाएं, माताजी के झूले एवं रज्जुमार्ग का सास्ता।
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कैसे पहुंचें?
अम्बाजी मंदिर गुजरात और राजस्थान की सीमा के करीब है। यहाँ से सबसे नजदीक (45 किमी) रेलवे स्टेशन माउंटआबू है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यह स्थान अन्य प्रमुख शहरों से भी सड़क मार्ग द्वारा सीधा जुड़ा है।
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