उज्जैन. इस बार 7 अप्रैल, बुधवार को पापमोचनी एकादशी है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, यह एकादशी सभी पापों का नाश करने वाली है। पापमोचनी एकादशी के विषय में भविष्योत्तर पुराण में विस्तार से वर्णन किया गया है। इस व्रत में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। इस व्रत की विधि और कथा इस प्रकार है…
- व्रती (व्रत रखने वाला) दशमी तिथि (6 अप्रैल, मंगलवार) को एक समय सात्विक भोजन करें और भगवान का ध्यान करें।
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- एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प करें। संकल्प के बाद षोड्षोपचार (16 सामग्रियों से) सहित भगवान श्रीविष्णु की पूजा करें।
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- पूजा के बाद भगवान के सामने बैठकर भगवद् कथा का पाठ करें या किसी योग्य ब्राह्मण से करवाएं।
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- परिवार सहित बैठकर भगवद् कथा सुनें। रात भर जागरण करें। रात में भी बिना कुछ खाए (संभव हो तो ठीक नहीं तो फल खा सकते हैं) भजन कीर्तन करते हुए जागरण करें।
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- द्वादशी तिथि (8 अप्रैल, गुरुवार) को सुबह स्नान करके विष्णु भगवान की पूजा करें फिर ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करें।
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- इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस प्रकार पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते हैं तथा व्रती के सभी पापों का नाश कर देते हैं।
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पापमोचनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ- 07 अप्रैल सुबह 02:09 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त- 08 अप्रैल 2021 को सुबह 02:28 बजे तक
व्रत पारण का समय- 08 अप्रैल 2021 दोपहर 01:39 से शाम 04:11
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