ये 4 श्मशान है बहुत खास, गुप्त नवरात्रि में यहां लगता है तांत्रिकों का जमघट

Published : Jun 20, 2020, 12:01 PM IST

उज्जैन. इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 22 जून, सोमवार से 29 जून तक रहेगी। इस नवरात्रि में वामाचार (तंत्र) पद्धति से उपासना की जाती है। इसमें प्रलय एवं संहार के देवता महाकाल एवं महाकाली की पूजा की जाती है। साथ ही उनके गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना भी की जाती है। यह साधनाएं बहुत ही गुप्त स्थान पर या किसी सिद्ध श्मशान में की जाती हैं। तंत्र क्रियाओं के लिए भारत में 4 श्मशान बहुत विशेष माने गए हैं। पहला हैं तारापीठ का श्मशान (पश्चिम बंगाल), दूसरा कामाख्या पीठ (असम) का श्मशान, तीसरा त्रयंबकेश्वर (नासिक) और चौथा उज्जैन स्थित चक्रतीर्थ श्मशान। गुप्त नवरात्र में साधक दूर-दूर से यहां साधनाएं करने आते हैं।

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ये 4 श्मशान है बहुत खास, गुप्त नवरात्रि में यहां लगता है तांत्रिकों का जमघट

1. कामाख्या शक्तिपीठ
असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका तांत्रिक महत्व है। पूर्वोत्तर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले असम राज्य की राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के प्रमुख शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है। यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है। यह स्थान तांत्रिकों के लिए स्वर्ग के समान है। यहां स्थित श्मशान में भारत के विभिन्न स्थानों से तांत्रिक तंत्र सिद्धि प्राप्त करने आते हैं।
 

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2. नासिक
त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में है। यहां के ब्रह्म गिरि पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम है। मंदिर के अंदर एक छोटे से गड्ढे में तीन छोटे-छोटे लिंग है, ब्रह्मा, विष्णु और शिव- इन तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं। ब्रह्मगिरि पर्वत के ऊपर जाने के लिये सात सौ सीढिय़ां बनी हुई हैं।
इन सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद रामकुंड और लक्ष्मण कुंड मिलते हैं और शिखर के ऊपर पहुंचने पर गोमुख से निकलती हुई भगवती गोदावरी के दर्शन होते हैं। भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है। तंत्र और अघोरवाद के जन्मदाता भगवान शिव ही हैं। यहां स्थित श्मशान भी तंत्र क्रिया के लिए प्रसिद्ध है।
 

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3. तारापीठ
यह मंदिर पश्चिम बंगाल के वीर भूमि जिले में स्थित है। इस मंदिर में मां काली का एक रूप तारा मां की प्रतिमा स्थापित है। रामपुर हाट से तारापीठ की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। बंगाल क्षेत्र की प्रसिद्द देवी तारा की पूजा का प्रमुख केन्द्र होने के कारण ही इसका नाम तारापीठ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। इसलिए इस स्थान को नयन तारा भी कहा जाता है। तारापीठ 52 शक्तिपीठों के अन्तर्गत माना गया है।
 

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4. उज्जैन
महाकालेश्वर मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव को अत्यन्त पुण्यदायी माना जाता है। भगवान महाकाल की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। मान्यता है कि पहले चिता भस्म से भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती है, लेकिन बाद में ये परंपरा बंद हो गई। तंत्र शास्त्र में भी शिव के इस शहर को बहुत जल्दी फल देने वाला माना गया है। यहां के श्मशान में दूर-दूर से साधक तंत्र क्रिया करने आते हैं। उज्जैन स्थित श्मशान को चक्रतीर्थ कहते हैं।
 

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