Published : Feb 17, 2020, 03:05 PM ISTUpdated : Feb 17, 2020, 03:24 PM IST
करियर डेस्क. फरवरी में CBSE बोर्ड के साथ अन्य बोर्ड के एग्जाम भी स्टार्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही बैंक, रेलवे, इंजीनियरिंग, IAS-IPS के साथ राज्य स्तरीय नौकरियों के लिए अप्लाई करने वाले स्टूडेंट्स प्रोसेस, एग्जाम, पेपर का पैटर्न, तैयारी के सही टिप्स को लेकर कन्फ्यूज रहते है। यह भी देखा जाता है कि रिजल्ट को लेकर बहुत सारे छात्र-छात्राएं निराशा और हताशा की तरफ बढ़ जाते हैं। इन सबको ध्यान में रखते हुए एशिया नेट न्यूज हिंदी ''कर EXAM फतह...'' सीरीज चला रहा है। इसमें हम अलग-अलग सब्जेक्ट के एक्सपर्ट, IAS-IPS के साथ अन्य बड़े स्तर पर बैठे ऑफीसर्स की सक्सेज स्टोरीज, डॉक्टर्स के बेहतरीन टिप्स बताएंगे। इस कड़ी में आज हम आपको 2011 बैच की IAS टॉपर रुक्मणि रायर की कहानी बताने जा रहे हैं।
रुक्मणि रायर का जन्म चंडीगढ़ में सेवानिवृत डिप्यूटी डिस्ट्रिक अटॉर्नी होशियारपुर बलजिंदर सिंह के यहां हुआ था। घर में शुरू से ही पढ़ाई का माहौल था। इसलिए रुक्मणि को लेकर भी पैरेंट्स ने तरह-तरह के सपने सजाए थे।
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रुक्मणि क्लास 6 में ही फेल हो गईं। उसके बाद उनका पढ़ाई से दिल ही टूट सा गया। उन्हें किसी के सामने जाने में शर्म आने लगी। लोग उनके फेल होने पर उनके बारे में क्या सोचेंगे इसलिए वह अपने परिवार वालों के भी सामने जाने में शर्माने लगीं।
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6वीं में फेल होने के बाद उनके पेरेंट्स ने उन्हें आगे कि पढ़ाई करने के लिए डलहौजी के सेक्रेड हार्ट स्कूल में भेज दिया। इतने छोटी उम्र से ही मां-बाप से दूर होना रुक्मणि के लिए बेहद दुखदायी था। ऊपर से बोर्डिंग स्कूल के दबाव को झेलना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था। उनका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। धीरे-धीरे रुक्मणि अवसादग्रस्त रहने लगी।
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रुक्मणि के जेहन में एक ख्याल आया कि बहुत से लोग फेल होते हैं वो फिर से पास होते हैं और अच्छा काम करते हैं। बस इसी सोच ने उन्हें फिर से ऊर्जावान बना दिया। रुक्मणि ने अब दिल लगाकर पढ़ना शुरू कर दिया। उसके बाद उसने जिंदगी में कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
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शुरुआती पढ़ाई के बाद रुक्मणि मास्टर्स डिग्री पाने के लिए मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में दाखिला ले लिया। इसके साथ ही वह कई स्वयं सेवी संथाओं के लिए भी काम करती थीं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद रुक्मणि सिविल सर्विस की तैयारी में लग गईं। वह रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं।
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रुक्मणि ने साल 2011 में UPSC की परीक्षा दिया। रिजल्ट आया तो खुद रुक्मणि को भी कुछ देर तक विशवास विश्वास नहीं हुआ। रुक्मणि ने पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। ये उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा था कि क्लास 6 में ही फेल हो जाने वाली लड़की UPSC की परीक्षा में सेकेंड टॉपर बनी थी।
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रुक्मणि राजस्थान राजस्थान कैडर की IAS अफसर हैं। IAS में सिलेक्शन होने के बाद उन्होंने साल 2012 बैच के IAS अफसर सिद्धार्थ सिहाग से शादी की। सिद्धार्थ भी राजस्थान कैडर के IAS अफसर हैं। रुक्मणि ने राजस्थान के कई जिलों में कलेक्टर के पद पर रहते हुए लोगों के हित में काम किया। वह पढ़ाई के दौरान ही स्वयं सेवी संस्थाओं से जुडी रही थीं इसलिए उन्होंने लोगों के दुःख दर्द को भी समझने व उसे दूर करने भरपूर प्रयास किया है।
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