Published : Jan 04, 2020, 11:13 AM ISTUpdated : Jan 06, 2020, 04:29 PM IST
नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव के लिए दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। एक ओर जहां सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी (आप) और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिग्गज नेताओं ने स्ट्रेटजी के तहत अपने अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी है वहीं, इस मामले में कांग्रेस भी किसी से पीछे नजर नहीं आ रही है।
2015 के विधानसभा चुनाव में शर्मनाक पराजय के बाद कांग्रेस ने हालिया लोकसभा चुनाव 2019 में संजीवनी हासिल की थी। हालांकि केंद्र शासित राज्य की सात सीटों में से पार्टी के खाते एक भी सीट नहीं आई, मगर पार्टी ने आश्यर्यजनक प्रदर्शन करते हुए सत्ता में काबिज "आप" को तीसरे नंबर पर धकेल दिया। शीला दीक्षित के नेतृत्व में लड़े गए दिल्ली के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सीटों पर सीधे बीजेपी से मुक़ाबला किया और दूसरे नंबर पर रही।
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लोकसभा चुनाव में पार्टी का यह प्रदर्शन विधानसभा में उम्मीद की किरण की तरह है। पिछले ढाई दशक में पहली बार दिग्गज और दमदार नेता शीला दीक्षित के बिना मैदान में उतर रही कांग्रेस ने विधानसभा में अपना पुराना रुतबा हासिल करने के लिए "फूलफ्रूफ प्लान" बनाया है। एक तरह से ये कांग्रेस के "ब्रह्मास्त्र" की तरह है।
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सूत्रों के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी ने इच्छुक उम्मीदवारों के नामों की छंटनी शुरू कर दी है। अगले हफ्ते 10 जनवरी को पार्टी की सेंट्रल इलेक्शन कमिटी नामों पर अंतिम फैसला लेने के लिए बैठक करने वाली है।
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दिल्ली की मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि यानी विधायक नहीं है। जानकारी के मुताबिक राज्य इकाई का एक तगड़ा धड़ा विधानसभा में तगड़ी मौजूदगी और अपने खोए रुतबे को हासिल करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनावी दंगल में उतारने का प्लान बना रही है। कई दिग्गजों ने खुद चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई है। पार्टी के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको ने इस बारे में कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा। मगर संकेतों में उन्होंने कहा, "पार्टी की ओर से किसी सीनियर नेता को लोकसभा की तरह चुनाव लड़ने के लिए नहीं कहा गया है, लेकिन अगर उनकी इच्छा होगी तो इस पर विचार किया जाएगा।"
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बताते चलें कि लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने इस फॉर्मूले पर राज्य में अपने दिग्गजों को मैदान में उतारा था। यहां तक कि तीन बार राज्य की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित को भी लोकसभा चुनाव लड़ाया गया था। हालांकि पार्टी बीजेपी से कोई सीट जीतने में कामयाब तो नहीं रही, मगर इसका नतीजा यह हुआ कि राज्य में तीसरे नंबर पर नजर आ रही कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को पीछे धकेल दिया। पार्टी पांच सीटों पर बीजेपी के बाद दूसरे नंबर पर थी।
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शीला दीक्षित के करीबी रहे पार्टी के कई वरिष्ठ नेता विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा परवेज हाशमी, मास्टर बिजेंदर और कृष्णा तीरथ जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं। हालांकि युवा नेताओं की मौजूदगी की वजह से पार्टी के लिए यह फैसला लेना मुश्किल भी साबित हो सकता है। कहा यह भी जा रहा है कि कई युवा नेता भी टिकट के लिए कतार में हैं और उन्हें टिकट बंटवारे में राहुल गांधी से उम्मीद भी है। राहुल का झुकाव पार्टी में युवा नेताओं पर रहा है और अगर वो अड़े तो कांग्रेस का प्लान भोथरा साबित हो सकता है।
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विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और काफी एग्रेसिव नजर आ रही बीजेपी के सामने शीला के बगैर पार्टी के लिए ये बेहद मुश्किल लड़ाई है। अगले महीने फरवरी तक विधानसभा का गठन होना है। देखना है कि कांग्रेस दिल्ली के लिए क्या एक बार फिर अपने ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल करती है या कोई दूसरा नया रास्ता तलाशती है।
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