वो नेता जिन्होंने अरविंद केजरीवाल की AAP को बनाया, मगर जाना पड़ा पार्टी से बाहर

Published : Jan 24, 2020, 05:35 PM ISTUpdated : Jan 25, 2020, 11:06 AM IST

नई दिल्ली: अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी (आप) एक बार फिर से चुनावी मैदान में है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी ने 2015 में 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में 67 सीटें जीती थीं। लेकिन, पांच साल सत्ता में रहने के दौरान पार्टी में अंदरूनी कलह और मनमुटाव के चलते कई नेता पार्टी छोड़ते चले गए इनमें से कुछ सदस्य या तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या कांग्रेस में शामिल हो गए या  खुद को राजनीति से दूर कर लिया। आज हम ऐसे नेताओं की लिस्ट पर नजर डालेंगे जिन्होंने मनमुटाव के चलते या तो पार्टी छोड़ दी या फिर पार्टी से बेदखल कर दिए गए।

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वो नेता जिन्होंने अरविंद केजरीवाल की AAP को बनाया, मगर जाना पड़ा पार्टी से बाहर
प्रशांत भूषण: पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, एक उम्मीद के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए, कि यह पार्टी भ्रष्टाचार से मुक्त है, और अन्य भ्रष्ट पार्टियों से अलग है। लेकिन 2015 में “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आधार पर योगेंद्र यादव और आनंद कुमार के साथ-साथ उन्हें भी पार्टी से बेदखल कर दिया गया था।
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योगेन्द्र यादव: 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नतीजतन वह आम आदमी पार्टी के सह-संस्थापक थे। यादव को मार्च 2015 में ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आधार पर पार्टी से अनौपचारिक ढंग से बरखास्त कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “मै आश्चर्यचकित नहीं हूँ क्योंकि पिछले कुछ दिनों से मामला इसी दिशा में चल रहा था। हालांकि मैं इस बात से इनकार भी नहीं कर सकता कि मुझे इससे काफी चोट पहुंची है। आप से निकाले जाने के बाद में उन्होंने एक अलग पार्टी 'स्वराज इंडिया' की स्थापना की।
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कुमार विश्वास: कवि से नेता बने कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे के नेतृत्व में इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन में साथ शामिल हुए थे फिर साथ में आम आदमी पार्टी की स्थापना भी की थी। 2018 में AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल के साथ मतभेद का हवाला देते हुए पार्टी से खुद को अलग कर लिया था।
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शाजिया इल्मी: शाजिया इल्‍मी ने 24 मई 2014 को आम आदमी पार्टी के सभी पदों से इस्‍तीफा दे दिया था। पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने कहा, 'केजरीवाल पार्टी में ही लोकतंत्र लागू नहीं कर पा रहे हैं। मुझे पार्टी से दरकिनार किया गया। काफी सोचने के बाद मैंने इस्‍तीफा दिया।' शाजिया इल्‍मी एक सामाजिक कार्यकर्ता है। इससे पहले वह स्‍टार न्‍यूज में पत्रकार रह चुकी हैं।
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आशुतोष: आशुतोष केजरीवाल के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में से एक थे जिनके निष्कासन ने पार्टी की आंतरिक राजनीति के बारे में कई सवाल उठाए हैं। वह एक पत्रकार थे जो न्यूज चैनलों में उच्चस्तरीय पद छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए 15 अगस्त को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। लेकिन अफवाहें उड़ रही हैं कि उनका इस्तीफा इस बात को लेकर था कि उन्हें केजरीवाल ने राज्यसभा में एक सीट भी सीट नहीं दी थी।
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आशीष खेतान: पत्रकार से बने राजनेता आशीष खेतान ने 15 अगस्त को आम आदमी पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी छोड़ने के लिए निजी कारणों का हवाला दिया है लेकिन रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने पार्टी छोड़ दी क्योंकि नई दिल्ली से 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने की उनकी मांग को केजरीवाल ने अस्वीकार कर दिया था।
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कपिल मिश्र: कपिल मिश्रा का पार्टी से बाहर निकलना आप सरकार के पहले दो सदस्यों से काफी अलग था। कपिल मिश्रा द्वारा मुख्यमंत्री केजरीवाल और दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद मई 2017 में उन्हे आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) ने बर्खास्त कर दिया था। कपिल मिश्रा ने दावा करते हुए कहा कि इन दोनों लोगों ने 2 करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को “बड़े पैमाने पर” वित्तीय खामियों के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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अलका लंबा: पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट AAP विधायक अलका लांबा ने सितंबर में पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने केजरीवाल से ट्विटर पर "अपना इस्तीफा स्वीकार करने" का आग्रह किया था, उन्होंने कहा कि AAP अब "खास आम आदमी पार्टी" बन गयी है। इसके बाद वह में कांग्रेस में शामिल हो गईं थी।
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अंजलि दमानिया: अरविंद केजरीवाल पर लगे खरीद-फरोख्त के आरोपों के बाद अंजलि दमानिया ने ”आम आदमी पार्टी को छोड़ दिया। अंजलि दमानिया भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए पार्टी में शामिल हुईं और जब पार्टी के भीतर राजनीतिक वातावरण भृष्ट होने लगा तो उन्होंने पार्टी को छोड़ने का फैसला कर लिया।
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विनोद कुमार बिन्नी: विनोद कुमार बिन्नी ने केजरीवाल को “तानाशाह” के रूप में संदर्भित किया और दिल्ली के लोगों ने अपने मूल सिद्धांतों को छोड़कर “धोखाधड़ी” करने में दोषी ठहराया था। उन्होंने कहा कि “यदि पार्टी लोगों के वादे को पूरा करने में विफल रहती है” तो वह जंतर मंतर में एक धरने का आयोजन करेगी। जनवरी 2014 में पार्टी के कार्यों के खिलाफ प्रदर्शन के लिए उन्हें पार्टी की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में उन्होंने 2015 में बीजेपी के साथ हाथ मिलाया।
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जीआर गोपीनाथ: भारत में कम कीमत के हवाई यातायात में प्रमुख भूमिका निभाने वाले कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने 2014 में ही पार्टी जॉइन की और छोड़ भी दी। उन्होंने पार्टी नेतृत्व में बढ़ते मतभेद का हवाला देते हुए अरविंद केजरीवाल की कार्यप्रणाली की आलोचना की।

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