स्वच्छ भारत अभियान के 5 साल, आंकड़ों में भारत; देखें कहां पहुंचे हम

Published : Oct 02, 2019, 07:27 AM IST

नई दिल्ली. 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने का उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने ''स्वच्छ भारत'' का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। इसी कड़ी में 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा आरंभ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना और कूढ़ा साफ रखना है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने देश को गुलामी से मुक्त कराया, परन्तु 'स्वच्छ भारत' का उनका सपना पूरा नहीं हुआ।

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स्वच्छ भारत अभियान के 5 साल, आंकड़ों में भारत; देखें कहां पहुंचे हम
स्वच्छ भारत मिशन विसर्जन उपयोग की निगरानी के जवाबदेह तंत्र को स्थापित करने की भी एक पहल सरकार ने 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गांधी के जन्म की 150वीं वर्षगांठ तक ग्रामीण भारत में 1.96 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौंच मुक्त भारत (ओडीएफ) को हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका के न्यूयॉर्क में 24 सितंबर को स्वच्छ भारत अभियान के लिए 'ग्लोबल गोलकीपर्स अवॉर्ड' से नवाजा गया। ये पुरस्कार उन्हें बिल एवं मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से दिया गया है। ये पुरस्कार उन्हें खुद बिल गेट्स ने दिया था। इस दौरान पीएम मोदी ने स्वच्छता के महत्व को लेकर चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने स्वच्छता की दिशा में कीर्तिमान स्थापित किया है और WHO के मानकों को पूरा करते हुए देश को लगभग 100 प्रतिशत खुले में शौच मुक्त बनाया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ने बताया कि 'बीते पांच साल में देश में रिकॉर्ड 11 करोड़ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसी का नतीजा है कि 2014 से पहले जहां ग्रामीण स्वच्छता का दायरा 40% से भी कम था आज वो बढ़कर लगभग 100 प्रतिशत पहुंच रहा है। इस मिशन ने अगर सबसे ज्यादा लाभ किसी को पहुंचाया तो वो देश के गरीब को, देश की महिलाओं को।'
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पीएम मोदी ने UNICEF की एक स्टडी का जिक्र करते हुए कहा कि बीते पांच वर्षों में ग्राउंड वाटर की क्वालिटी बहुत सुधरी है और मैं मानता हूं कि इसमें भी बहुत बड़ा योगदान स्वच्छ भारत का है। स्वच्छ भारत मिशन का एक और प्रभाव है जिसकी चर्चा बहुत कम हुई है। इस अभियान के दौरान बनाए गए 11 करोड़ से ज्यादा शौचालयों ने ग्रामीण स्तर पर इकोनॉमिक एक्टिविटी का एक नया द्वार भी खोल दिया।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की ही रिपोर्ट है कि स्वच्छ भारत की वजह से 3 लाख जिंदगियों को बचाने की संभावना बनी है। आज मुझे इस बात की भी खुशी है कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता का जो सपना देखा था, वो अब साकार होने जा रहा है। गांधी जी कहते थे कि एक आदर्श गांव तभी बन सकता है, जब वो पूरी तरह स्वच्छ हो। आज हम गांव ही नहीं, पूरे देश को स्वच्छता के मामले में आदर्श बनाने की तरफ बढ़ रहे हैं।''

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