Published : Jun 26, 2020, 05:08 PM ISTUpdated : Jul 01, 2020, 02:59 PM IST
नई दिल्ली. भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में किसी तरफ से गोली नहीं चली। एलएसी पर हथियारों के इस्तेमाल पर रोक है। इसलिए चीन अपने सैनिकों को लाठी भाले और डंडा रॉड के जरिए युद्ध लड़ने की ट्रेनिंग दे रहा है। बता दें कि 15 जून की रात को पूर्वी लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीन के भी 40 जवानों ने दम तोड़ दिया।
तिब्बत के पठार इलाके में रहने वाले ये लड़ाके चीनी सेना को नुकीली चीज या लाठी, डंडों से लड़ने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।
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चीन अब इन भाड़े के लड़ाकों के जरिए सीमा विवाद को बढ़ाने की फिराक में है।
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भारत और चीन ने दोनों देशों के बीच 1996 और 2005 में एक समझौता किया था, जिसके मुताबिक, दोनों पक्ष गश्त के दौरान आमना-सामना होने पर एक दूसरे पर गोली नहीं चला सकते हैं।
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दोनों देश एलएसी के दो किमी के दायरे में गश्त के दौरान अपने रायफल के बैरल को भी जमीन की ओर झुकी रखते हैं।
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दोनों देशों ने बिना सूचना के एलएसी के 10 किलोमीटर के भीतर सैनेय विमानों के उड़ान को भी रोक दिया है। इसी समझौते के कारण 1975 से एलएसी पर शांति बनी रही, लेकिन जून 2020 में चीन ने इस समझौते को तोड़ दिया।
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भारत ने चीन के साथ लगी करीब 3500 किमी. की सीमा के पास अग्रिम मोर्चों पर तैनात थल सेना और वायु सेना को अलर्ट कर दिया है।
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15 जून की रात पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों में हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए। वहीं चीन के भी 40 सैनिक मारे गए हैं। हिंसक झड़प के बाद से ही दोनों देशों में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
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