नई दिल्ली. कोरोना का कहर दुनिया के 203 देशों पर है। अब तक करीब 42 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 8.5 लाख लोग संक्रमित हैं। दुनियाभर में 1.78 लाख लोग ऐसे हैं, जो अभी तक ठीक हो चुके हैं। भारत में भी अब तक 150 से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। भारत में हाल ही में केरल के 93 साल के शख्स और उनकी 88 साल की पत्नी ठीक हो चुकी हैं। इससे पहले इटली, जहां संक्रमण से अब तक सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं, वहां पिछले दिनों 101 साल के एक शख्स ठीक हुए। उनसे पहले एक 95 साल की महिला संक्रमण से ठीक हुई। ऐसे तमाम मामले हैं, जहां उम्रदराज लोग भी कोरोना से ठीक हो रहे हैं। ऐसे में दो सवाल लोगों के मन में हैं कि अभी तक कोरोना का इलाज नहीं मिला तो लोग कैसे ठीक हो रहे हैं और दूसरा उम्रदराज लोगों को लेकर।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोना वायरस के संक्रमण में सबसे ज्यादा खतरा उम्रदराज यानी 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को है। फिर ये हाल ही में ये उम्रदराज लोग कैसे ठीक हुए।
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कैसे हो रहा इलाज: कोरोना वायरस का अब तक कोई इलाज सामने नहीं आया है। ना ही इसकी कोई दवा या वैक्सीन है। दुनियाभर के तमाम देश इसकी दवा बनाने के लिए कोशिश में जुटे हैं। हालांकि, अभी तक किसी को सफलता नहीं मिली है।
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बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वक्त में संक्रमण के मरीजों का इलाज लक्षणों के आधार पर हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने डॉक्टरों के लिए गाइडलाइन जारी की हैं। इसके मुताबिक, अलग अलग लक्षणों के लिए अलग अलग ट्रीटमेंट बताए गए हैं। दवाओं की मात्रा को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं।
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जैसे साधारण खांसी, जुकाम, हल्के बुखार के लक्षण होने पर मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं भी हो सकती है। या उन्हें दवा देकर इलाज जारी रखा जा सकता है।
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साथ ही मरीजों को निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत, किडनी या दिल की बीमारी होने पर तुरंत आईसीयू में भर्ती कराया जा रहा है। इलाज के दौरान डॉक्टरों को अपने मुताबिक दवा देने की भी मनाही है।
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डॉक्टरों के मुताबिक, जो मरीज भर्ती हैं, उन्हें लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है। साथ ही उनका इम्युनिटी सिस्टम भी वायरस से लड़ने की कोशिश करता है। मरीज आइसोलेशन में रहते हैं, जिससे उनका वायरस अन्य तक ना पहुंचे।
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कुछ मरीजों को निमोनिया बढ़ जाता है। फेफड़ों में जलन भी होती है। ऐसी स्थिति में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। इन्हें हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर पर रखा जा रहा है।
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हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी जानकारी दी है कि भारत में कोरोना के मरीज गंभीर स्थिति में नहीं हैं। सिर्फ 20-25% मरीजों को ही वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत पड़ रही है।
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वेंटिलेटर पर रखने से मरीज की सांस लेने की समस्या के साथ साथ दूसरे अगों पर पड़ने वाले दबाव से भी राहत मिल सकती है। इसके अलावा मरीजों को दर्द रोकने के लिए कुछ दवाएं भी दी जाती हैं।
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बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सुधीर मेहता ने बताया, ICMR और WHO की गाइडलाइन के मुताबिक ही इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गाइडलाइन में यह भी बताया गया है कि हल्के लक्षण के दौरान कैसा इलाज करना है या गंभीर इलाज के दौरान क्या क्या दवा देनी है। इसके लिए पैरामीटर तय हैं।
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क्या HIV की दवा से ठीक हो रहे मरीज: विशेषज्ञों के मुताबिक, एचआईवी और कोरोना वायरस में एक जैसा मॉलिक्युलर स्ट्रक्चर है। ऐसे में ये एंटी ड्रग दिए जा सकते हैं। जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में एचआईवी एंटी ड्रग देकर तीन मरीजों को ठीक किया गया।
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यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले 2003 में जब सार्स वायरस फैला था तो इन दवाओं का इस्तेमाल हुआ। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन दवाओं का एक सीमा तक ही इस्तेमाल होना चाहिए।
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कब मिलेगा इलाज?: कोरोना वायरस की वैक्सीन या कोई दवा कब तक आएगी, यह कहना अभी मुश्किल है। हर देश अपने अपने स्तर पर इसकी दवा खोजने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अभी तक किसी को कोई कामयाबी नहीं मिली।
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