Published : Jan 18, 2020, 11:54 AM ISTUpdated : Jan 18, 2020, 12:09 PM IST
नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों की फांसी पर दुनिया भर में चर्चा है। इस पर अब जमकर बवाल हो रहा है जब एक महिला ने दोषियों को माफ कर देने की मांग कर डाली। ये महिला कोई और नहीं महिला अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने वाली सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह हैं। इंदिरा के बयान पर भले बवाल हो रहा हो लेकिन उन्होंने अपने पूरे करियर में महिलाओं के अधिकारों की पैरवी की है। पर निर्भया के दरिंदों को माफ करने की बात करने वाली इस वकील के बारे में और भी बहुत कुछ है जो आपको जानना चाहिए...............
निर्भया गैंगरेप के मामले में 7 साल बाद चारों दोषियों का फांसी का फरमान जारी हो गया है। कोर्ट ने अब 1 फरवरी 2020 को सुबह 6 बजे फांसी की तारीख तय की है। इन सब के बीच देश की सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की मां से माफी की अपील कर दी। उन्होंने निर्भया की मां से कहा है कि वह दोषियों को माफ कर दें। जयसिंह ने ट्वीट कर लिखा, "हम आशा देवी के दर्द को पूरी तरह से समझते हैं। मैं उनसे निवेदन करती हूं कि वह सोनिया गांधी को फॉलो करते हुए दोषियों को माफ कर दें।" हम आपके साथ है पर मौत की सजा के खिलाफ।"
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जयसिंह के माफी वाले बयान के बद निर्भया की मां आशा देवी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए माफ न करने की बात कही। उन्होंने कहा कि, इंदिरा जी माफी की बात कैसे कर सकती हैं, मैं सात साल से न्याय के लिए चक्कर काट रही हूं। मैं तो क्या भगवान भी मुझसे आकर कहे तो भी अपनी बेटी के दरिंदों को माफ नहीं करूंगी।
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इंदिरा जयसिंह भारत की मशहूर वकील रही हैं। साल 2018 में फॉर्च्यून मैगजीन ने दुनिया के टॉप 50 लीडर्स में उन्हें 20वां स्थान दिया। लॉयर्स कलेक्टिव नाम का उनका एक एनजीओ भी है। इसकी स्थापना इंदिरा जयसिंह ने अपने पति आनंद ग्रोवर के साथ 1981 में की थी। ये संस्था खासतौर पर महिला अधिकारों की लड़ाई के लिए है। महिलाओं को उनके हक और न्याय दिलवाने के लिए है।
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1986 में इंदिरा जयसिंह बॉम्बे हाईकोर्ट की पहली सीनियर एडवोकेट बनीं थीं। साथ ही 2009 में जयसिंह को भारत की पहली महिला अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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इंदिरा जयसिंह का जन्म मुंबई में एक सिंधी हिंदू परिवार में हुआ है। उन्होंने बैंगलोर यूनिवर्सिटी से बीए और 1962 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी से एलएलएम की डिग्री हासिल की। इंदिरा ने अपने करियर की शुरुआत से ही मानवाधिकार और महिला अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने केरल में रहने वाली क्रिस्चियन महिलाओं को प्रॉपर्टी का अधिकार दिलाए।
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इंदिरा ने एक रेप पीड़िता को न्याय भी दलिवाया है। उन्होंने साल 1988 में रुपन देओल बजाज के लिए भी लड़ाई लड़ी। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रुपन देओल बजाज ने पंजाब के तत्कालीन डीजीपी केपीएस गिल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
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17 साल की लंबी लड़ाई के बाद इस केस में इंदिरा जयसिंह ने रुपन को जीत दिलाई और केपीएस गिल को यौन उत्पीड़न का दोषी पाया गया। (पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीइस गिल और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रूपन देओल बजाज की फाइल फोटो)
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इंदिरा कई केसों में योद्धा रही हैं। वे केस हाथ में लेती हैं तो पीड़ित को न्याय जरूर मिलता है। उनके खाते में कई केस रहे हैं जिनमें उन्होंने पीड़ितों के हक की लड़ाई लड़ी। इसमें भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के केस भी शामिल हैं।
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इंदिरा ने फुटपाथ पर सोने वाले गरीबों को अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन से मुआवजा दिलाने के लिए केस लड़ा। 2 दिसंबर 1984 में भोपाल में हुई भीषण गैस त्रासदी में हजारों लोगों की जान चली गई थी। इनमें कई मृतकों के गरीब परिवार के लिए इंदिरा जयसिंह ने मुआवजा दिलाने की लड़ाई लड़ी थी।
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इंदिरा एक मजबूत शख्सियत रखती हैं। वो नारावादी महिला हैं ऐसे में वो किसी की पत्नी बुलाए जाने पर भी नाराज हो गई थीं। ये वाक्या भी काफी चर्चा में रहा। एक बार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इस दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इंदिरा जयसिंह को आनंद ग्रोवर की पत्नी कहकर संबोधित कर दिया। इस पर इंदिरा को गुस्सा आ गया और उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेरी निजी हैसियत है और मैं मात्र किसी की पत्नी नहीं हूं।
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इंदिरा जयसिंह के पति की बात की जाए तो आनंद ग्रोवर एक वरिष्ठ वकील हैं जो समलैंगिकता और एचआईवी से संबंधित भारतीय कानून में कानूनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। अपनी पत्नी इंदिरा जयसिंह के साथ, वे वकीलों के समूह के संस्थापक सदस्य हैं। वह अगस्त 2008 से जुलाई 2014 तक स्वास्थ्य अधिकारो के लिए यूनाइटेड नेशंस स्पेशल रैपॉर्टेरिटी रहे हैं।
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