जोशीमठ के लिए एक-एक मिनट महत्वपूर्ण: रोते हुए बोले लोग-कहीं और जाने से अच्छा यही मरना चाहेंगे, 12 Photos

Published : Jan 10, 2023, 08:23 AM ISTUpdated : Jan 10, 2023, 01:26 PM IST

देहरादून(Dehradun). उत्तराखंड के 8वीं सदी के शहर जोशीमठ का अस्तित्व क्या खत्म हो जाएगा? यह सवाल इन दिनों चरम पर है। यहां दरारें धीरे-धीरे बढ़ती जा रही हैं। उत्तराखंड के चीफ सेक्रेट्री ने कहा कि जोशीमठ में अधिक मकानों, इमारतों और सड़कों में दरारें आने से हर मिनट महत्वपूर्ण है। चमोली में डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के एक बुलेटिन में कहा गया है कि धंसने वाले घरों की संख्या बढ़कर 678 हो गई है, जबकि 27 और परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। अब तक 82 परिवारों को शहर में सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। हालात यह हैं कि राहत और बचाव के प्रयासों के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स के कर्मियों को तैनात किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स (NDRF) की एक टीम भी स्थानीय प्रशासन की सहायता के लिए स्टैंडबाय पर है। इस बीच दरकते भवनों को जमींदोज करने का काम 10 जनवरी शुरू हुआ। सबसे पहले उन होटल्स, घर और भवनों को गिराया जाएगा, जो असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। इनमें 2 होटल भी हैं। ये हैं लग्जरी होटल मलारी इन और होटल माउंट व्यू। दोनों 5-6 मंजिला होटल हैं। इन्हें गिराने का काम सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) की निगरानी में होगा। SDRF की टीम भी मौके पर है। इधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सुप्रीम कोर्ट से अर्जेंट हियरिंग की अपील की थी। कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया है। सुनवाई 16 जनवरी को होगी। देखिए कुछ तस्वीरें और पढ़िए बाकी रिपोर्ट...

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जोशीमठ के लिए एक-एक मिनट महत्वपूर्ण: रोते हुए बोले लोग-कहीं और जाने से अच्छा यही मरना चाहेंगे, 12 Photos

जिला प्रशासन ने जोशीमठ के असुरक्षित 200 से अधिक घरों पर रेड क्रॉस का निशान लगा दिया है। इनमें रहने वालों को या तो अस्थायी राहत केंद्रों या किराए के आवास में स्थानांतरित करने के लिए कहा गया है। इसके लिए प्रत्येक परिवार को राज्य सरकार से अगले छह महीनों के लिए प्रति माह 4000 रुपये की सहायता मिलेगी।

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जोशीमठ में 16 स्थान ऐसे हैं, जहां प्रभावित लोगों के लिए अस्थाई राहत केंद्र बनाए गए हैं। इनके अलावा जोशीमठ में 19 और शहर के बाहर पीपलकोटी में 20 होटल, गेस्ट हाउस और स्कूल भवन चिन्हित किए गए हैं।

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सचिव (डिजास्टर मैनेजमेंट) रणित सिन्हा ने मीडिया से कहा कि कस्बे को बचाने और सबसिडेंस जोन में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
 

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सचिव रणित सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित शहर के लोगों के लिए राहत पैकेज पर भी काम कर रही है, जिसे जल्द ही केंद्र को भेजा जाएगा।
 

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जोशीमठ में दो होटल माउंट व्यू और मलारी इन को मैकेनिकली रिमूव करने का निर्णय लिया गया है, जो भूमि धंसाव से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

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प्रभावित क्षेत्र के कई परिवारों को अपने घरों से अपने भावनात्मक संबंधों को तोड़ना और बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।

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मारवाड़ी वार्ड की एक बुजुर्ग निवासी परमेश्वरी देवी, जो कस्बे में सबसे बुरी तरह से प्रभावित है, ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी बचत अपना घर बनाने में खर्च कर दी और अब उसे इसे छोड़कर राहत शिविर में स्थानांतरित होने के लिए कहा जा रहा है। देवी ने एक निजी समाचार चैनल से कहा, "मैं कहीं और जाने के बजाय जहां हूं, वहां मरना पसंद करूंगी। मुझे अपने घर का आराम कहां से मिलेगा?"
 

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जोशीमठ के मनोहरबाग निवासी सूरज कपरवान की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। परिवार अभी भी अपना घर छोड़ने का मन बना रहा है। सिंगधर की रहने वाली ऋषि देवी का घर धीरे-धीरे ढह रहा है और उन्हें अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट होना पड़ा है, लेकिन परिजनों के मना करने के बावजूद वे हर दिन अपने घर लौट आती हैं। देवी अब आंगन में बैठी दरारों से भरी इसकी दीवारों को निहारती रहती हैं। कमरों में दरारें आने के बाद रमा देवी के परिवार को अपने घर के भीतरी बरामदे में सोने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन आखिरकार उन्हें घबराहट में घर छोड़ना पड़ा।

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गांधीनगर की रामी देवी ने कहा, "हमारा कमरा बार-बार हिलता था, हमें डराता था। इसलिए हम बरामदे में सोने लगे। लेकिन कल रात बरामदे में भी दरारें आ गईं। अब हम किराए के मकान में जा रहे हैं।"
 

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प्राथमिक विद्यालय के भवन में शरण लेने वाली सिंगधार की रहने वाली लक्ष्मी का कहना है कि वह स्थायी पुनर्वास चाहती हैं। उन्होंने कहा, "कितने समय तक हम इस अस्थायी राहत शिविर में रहेंगे?" इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जोशीमठ में संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग करने वाले एक याचिकाकर्ता से मंगलवार को अपनी याचिका का उल्लेख करने के लिए कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट जोशीमठ शंकराचार्य की याचिका पर 16 जनवरी को हिमालयी कस्बे में धंसने पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है।

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माना जा रहा है कि जोशीमठ के प्रभावित क्षेत्र में जमीन के नीचे पानी जमा हो रहा है, लेकिन  पानी के स्रोत का पता नहीं चल पाया है।

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सोमवार को गृह मंत्रालय और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों ने सो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर जोशीमठ की स्थिति का जायजा लिया।

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