India-China FaceOff : देश के लिए शहीद हुआ पति, अब पत्नी बनी डिप्टी कलेक्टर, मिली बड़ी जिम्मेदारी

Published : Jun 22, 2020, 02:01 PM ISTUpdated : Jun 29, 2020, 06:39 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में कर्नल संतोष बाबू शहीद हो गए थे। अब राज्य सरकार ने उनकी पत्नी को डिप्टी कलेक्टर नियुक्त किया है। तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव ने उन्हें सूर्यपेट जिले का डिप्टी कलेक्टर बनाया है। 15 जून को पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प ने भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। उसमें कर्नल संतोष बाबू भी थे। कर्नल संतोष के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। उनके पिता फिजिकल एजुकेशन टीचर हैं। शहीद संतोष ने हैदराबाद के सैनिक स्कूल में पढ़ाई की, फिर वे एनडीए के लिए चुने गए थे।

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India-China FaceOff : देश के लिए शहीद हुआ पति, अब पत्नी बनी डिप्टी कलेक्टर, मिली बड़ी जिम्मेदारी

शहीद कर्नल संतोष बाबू तेलंगाना के सूर्यपेट के रहने वाले थे। तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव ने कर्नल बाबू की पत्नी को सरकारी नौकरी, 5 करोड़ रुपए और 600 गज जमीन देने का फैसला किया है। सीएम खुद उनकी पत्नी को 5 करोड़ रुपए का चेक सौपेंगे।  

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पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच झपड़ में भारत के कर्नल रैंक के अधिकारी सहित 20 जवान शहीद हो गए। इस घटना पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि चीन ने ऐसा क्यों किया? मंत्रालय ने साफ-साफ शब्दों में कह दिया कि 15 जून को देर शाम और रात को चीन की सेना ने वहां यथास्थिति बदलने की कोशिश की। यथास्थिति से मतलब है कि चीन ने एलएसी बदलने की कोशिश की। भारतीय सैनिकों ने रोका और इसी बीच झड़प हुई।

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तेलंगाना के सूर्यापेट के रहने वाले संतोष बाबू बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। परिवार में माता-पिता के अलावा दो बच्चे और पत्नी हैं। उनकी पत्नी अपने एक बेटे और एक बेटी के साथ दिल्ली में रहती हैं।

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संतोष बाबू के पिता रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं। शहादत से पहले संतोष बाबू की पोस्टिंग हैदराबाद होने वाली थी। संतोष बाबू की पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में थी।

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संतोष बाबू भारतीय सेना में 2004 में शामिल हुए। पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में थी।

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रविवार को उन्होंने अपनी मां से फोन पर बात की थी। दोनों के बीच बातचीत का ज्यादातर हिस्सा लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के इर्द गिर्द रहा।

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उनके पिता ने एक अखबार से बात करते हुए बताया था कि उनकी प्रेरणा से संतोष ने सेना में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश के सैनिक स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद एनडीए और फिर आईएमए गए। 15 साल के सेवाकाल में संतोष बाबू को चार प्रमोशन मिले। कुपवाड़ा में आतकंवादियों से बहादुरी के साथ मुकाबला करने पर सेना प्रमुख की तरफ से उनको सराहना भी मिली थी। संतोष बाबू के पिता को देश की खातिर जान न्योछावर करनेवाले बेटे की वीरगति पर गर्व है।

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मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि दोनों सेनाओं के बीच 15 जून को 1 बार नहीं बल्कि तीन बार झड़प हुई थी। इसके अलावा भारतीय सैनिकों ने अपने इलाके में बनी चीनी पोस्टों को भी उखाड़ फेंका था। इतना ही नहीं झड़प के बाद भारत ने चीनी सैनिकों के शव भी उन्हें सौंपे थे।

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इंडिया टुडे ने गलवान घाटी में तैनात अफसरों से इस घटना को लेकर बात की है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 दिन पहले यानी 6 जून को दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बात हुई थी। इसके बाद दोनों सेनाएं पीछे हटने को तैयार हुई थीं। दोनों देशों की आर्मी एलएसी के काफी करीब आ गई थीं।

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गलवान नदी के किनारे चीन का एक पोस्ट भारतीय सीमा में था। बातचीत के दौरान चीन की सेना इसे हटाने को लेकर तैयार भी हो गई थी। बातचीत के बाद चीनी सेना ने इस पोस्ट को हटा भी लिया था। लेकिन बाद में इस पोस्ट को दोबारा बना लिया गया।

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15 जून की शाम को बिहार बटालियन के कमांडिंग अफसर कर्नल बी संतोष बाबू ने फैसला किया था कि वे इस पोस्ट के पास जाकर जानकारी लेंगे कि यह यहां कैसे बन गई। वहीं, बटालियन के अन्य जवान इसे उखाड़ फेंकना चाहते थे। लेकिन कर्नल बाबू अपने स्वभाव के अनुरूप बातचीत से मामला सुलझाने के पक्ष में थे।

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15 जून की शाम को कर्नल बाबू 35 जवानों के साथ उस पोस्ट पर गए थे। यहां जब ये लोग पोस्ट पर पहुंचे तो, चीनी सैनिक बदले हुए नजर आ रहे थे। यहां वे सैनिक नहीं थे जो सामान्य तौर पर ड्यूटी पर होते हैं। भारतीय सेना को पता चला है कि यहां मई में ही दूसरे सैनिकों को भेजा गया है।

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कर्नल बाबू जब पोस्ट पर बातचीत करने पहुंचे और इस पोस्ट के बार में पूछा तो एक जवान ने उन्हें धक्का दे दिया। इसके अलावा चीनी भाषा में अभद्र टिप्पणी भी की। इसके बाद भारतीय जवानों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।

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भारतीय जवान चीनियों पर टूट पड़े। 30 मिनट तक चली झड़प में दोनों ओर के लोग चोटिल हुए। लेकिन भारतीय जवानों ने पोस्ट को तोड़ दिया।

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इस झड़प के बाद कर्नल बाबू ने सूझबूझ का परिचय देते हुए घायल सैनिकों को पोस्ट पर भेजा और पोस्ट से ज्यादा जवान भेजे जाएं। लेकिन कर्नल बाबू ने भारतीय जवानों को शांत रखा।

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भारत और चीन की सेना के बीच एक बार नहीं तीन बार हिंसक झड़प हुई थी। ये झड़पें करीब 5-6 घंटे तक चलीं। भारत की तुलना में चीन के सैनिक ज्यादा था।

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दूसरी झड़प में कर्नल बाबू को सिर में पत्थर लगा था। इसके बाद वे नदी में गिर गए। कर्नल बाबू के शहीद होने के बाद भारतीय सैनिक चीन पर टूट पड़े। लेकिन घाटी सकरी होने के चलते दोनों देशों के कई जवान नदी में गिर गए।

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इसके बाद यह पूरी झड़प 11 बजे शांत हुई। इसके बाद दोनों देशों ने अपने जवानों को खोजा। इस दौरान शवों की अदला बदली भी हुई। भारत ने चीन को 16 सैनिकों के शव सौंपे थे। इनमें 5 अफसर भी थे। इसी दौरान गलती से भारत के 10 जवान चीन के कब्जे में आ गए थे।

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गलवान घाटी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अक्साई-चिन से सटी हुई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन तस्वीरों से पता चलता है कि चीन गलवान घाटी के परिदृश्य को काफी पहले से बदलने में लगा है। घाटी के रास्ते चौड़े किए जा रहे हैं। इन तस्वीरो को देखकर साफ तौर से जाहिर हो रहा है कि जैसे चीन गलवान नदी पर पुल का निर्माण कर रहा हो।

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बात इतने पर ही खत्म नहीं होती है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल रहा है कि चीन ने इस इलाके में बुल्डोजर भी तैनात किए थे, जिसके निशान तस्वीरों में साफ तौर से देखने के लिए मिल रहे हैं। इन सभी गतिविधियों से चीन की मंशा जाहिर हो रही है।

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