मां को 62 बार चाकू से गोदा-दिल गुर्दा आंत निकाल उसपर नमक छिड़कर खाया, कहानी सुन जज भी दंग

Published : Jul 09, 2021, 02:11 PM ISTUpdated : Jul 09, 2021, 06:08 PM IST

कोल्हापुर. साल 2017 में अपनी मां की हत्या और उनके दिल,गुर्दे और आंतें निकाल कर खाने के आरोपी बेटे को स्थानीय कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने गुरुवार को सजा सुनाते हुए कहा कि मैं आज तक ऐसा मामला नहीं देखा। आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। आरोपी 35 साल का सुनील कुचिकोरवी वारदात के बाद से ही जेल में बंद था। आरोपी ने इतनी निर्मम तरीके से मां की हत्या क्यों की?..

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मां को 62 बार चाकू से गोदा-दिल गुर्दा आंत निकाल उसपर नमक छिड़कर खाया, कहानी सुन जज भी दंग

28 अगस्त 2017 को हत्या हुई थी
कोल्हापुर के मक्कडवाला वसाहट में 28 अगस्त 2017 को वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी ने 62 बार मां को चाकू गोदा। बुजुर्ग महिला का शव अलग-अलग हिस्सों में मिला था। शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर नमक मिर्च लगा था। 

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मुंह से टपक रहा था खून
पुलिस ने जब आरोपी को पकड़ा था तब उसके मुंह से खून टपक रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने मां के शरीर के कई हिस्सों को खाया था। आरोपी ने भी मां के अंग खाने की बात कबूल की थी। 

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बेटे ने मां की हत्या क्यों की थी?
जांच में पता चला था कि आरोपी सुनील ने शराब पीने के लिए मां से पैसे मांगे थे। मां ने शराब के लिए पैसे देने से मना कर दिया था। ये बात सुनील को इतनी बुरी लगी कि उसने मां की हत्या कर दी। 

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हत्या के बाद सुनील ने मां के शरीर के दाहिने हिस्से को चीर दिया। फिर गुर्दा, दिल और आंत निकालकर अलग रख दिया। फिर उसमें नमक मिर्च लगाकर खाने लगा। 
 

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इस केस में 12 लोगों ने गवाही दी थी। आरोपी के रिश्तेदार और पड़ोसियों ने कोर्ट के सामने वारदात की पूरी कहानी बताई थी। सभी ने इस बात का जिक्र किया था कि शराब पीने के बाद आरोपी कंट्रोल में नहीं रहता है। 

सरकारी वकील विवेक शुक्ला ने यह कहते हुए मौत की सजा की मांग की थी कि ये दुर्लभतम से दुर्लभतम मामला है। उन्होंने कहा, मैंने फांसी की मांग की। आरोपी समाज के लिए खतरा है। अगर पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंचती तो स्थानीय लोगों ने उसकी हत्या कर दी होती। उसकी पत्नी और बच्चे भी उसे छोड़कर चले गए हैं।

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बचाव पक्ष के वकील विजय लम्बोरे ने तर्क दिया कि यह मामला मौत की सजा देने के लिए दुर्लभ से दुर्लभ मानदंड में फिट नहीं है। लम्बोरे ने कहा, हमने फांसी नहीं देने की गुहार लगाई क्योंकि अपराध पागलपन में किया गया था। ऐसी कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं है जिसमें दिखाया गया हो कि वह अपनी मां की हत्या के बाद उसके शरीर के अंगों को खाया हो। 

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