Published : Aug 03, 2022, 06:45 PM ISTUpdated : Aug 03, 2022, 08:17 PM IST
यादगिरी (कर्नाटक)। महाराष्ट्र और कर्नाटक में नाग पंचमी के शुभ दिन पर लोग कोबरा सांप की विशेष पूजा करते हैं। मगर एक मंदिर ऐसा भी है, जहां अनोखे तरीके से सिर्फ बिच्छुओं की पूजा की जाती है। पूरे कर्नाटक के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र से हजारों की संख्या श्रद्धालु यहां विशेष आशीर्वाद लेने आते हैं। यह मेला लगता है कर्नाटक के यादगिरी जिले के गुरुमतकल कस्बा स्थित कंडाकुर कोंडामई पहाड़ी पर स्थित मंदिर में। इस दिन भक्त, चाहे वह बुजुर्ग हो या फिर बच्चा, महिला हो या पुरूष, बिच्छुओं को अपने शरीर पर रखते हैं और बिच्छू पूरे शरीर पर घूमता-टहलता रहता है। आइए तस्वीरों के जरिए इस हैरतअंगेज कारनामे को देखते हैं।
जुलाई से अगस्त महीने के दौरान और विशेषकर नाग पंचमी पर यह पहाड़ी लाल बिच्छुओं से भर जाएगी। लोग यहां आते हैं और इन बिच्छुओं को पत्थरों से निकालकर शरीर पर रखते हैं।
210
ऐसा दावा किया जाता है कि आज तक किसी भी भक्त को बिच्छुओं ने काटा नहीं है। भक्त भी इन्हें शरीर पर रखकर रोमांचकारी पलों का अनुभव लेते हैं।
310
ये बिच्छु भक्तों के शरीर पर विचरण करते हैं। इसके बाद वे खुद-ब-खुद शरीर से उतर जाते हैं। कहा यह भी जाता है कि अगर किसी को बिच्छु ने काट भी लिया, तो वहीं पवित्र विभूति लगा ले। इससे जहर का असर नहीं होगा। साथ ही दर्द भी गायब हो जाएगा।
410
वैसे तो यहां वर्षभर लोग आते ही रहते हैं, मगर नाग पंचमी को यहां विशेष रूप से भक्तों की मौजूदगी होती है। कर्नाटक की ही नहीं आसपास के राज्यों से भी यहां लोग आते हैं।
510
कोंडामाई मंदिर कंडाकुर में कोंडामाई पहाड़ी पर स्थित है। दावा किया जाता है कि यह मंदिर ब्रिटिश काल से अस्तित्व में है। कोंडामाई का अर्थ होता है बिच्छुओं की देवी।
610
दावा किया जाता है कि नाग पंचमी पर अगर भक्त यहां आते हैं और देवी से कुछ मांगे तो उनकी मनोकामना पूरी होती है। बहुत से भक्तों का कहना है कि वे हर साल यहां दर्शन-पूजन करने आते हैं।
710
साथ ही, अगर वे पहाड़ी पर कोई माता का नाम लेकर कोई भी पत्थर हटाएं तो नीचे से बिच्छू निकलेगा। हालांकि, दावा यह भी किया जाता है कि नाग पंचमी के बाद ये बिच्छू गायब हो जाते हैं।
810
लोगों का कहना है कि यहां बिच्छू सिर्फ नाग पंचमी पर ही दिखाई देते हैं। इसके बाद अगर यहां कोई आता है, तो उन्हें बिच्छू नहीं दिखाई देंगे। यहां महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना से भक्त आते हैं।
910
कोंडामाई पहाड़ी नम लाल और रेतीली मिट्टी से ढंकी है। ऐसी जगह बिच्छुओं के प्रजनन के लिए अनुकूल होता है। हालांकि, कोई भी बिच्छू जहरीले नहीं होते।
1010
भक्तों का मानना है कि माता के आशीर्वाद की वजह से बिच्छू जहरीले नहीं होते। कुछ साल पहले गुलबर्गा यूनिवर्सिटी की एक टीम इस जगह जांच के लिए आई। तब उन्हें बिच्छुओं ने काट लिया। मगर भगवान की पूजा की, जिसके बाद जहर का असर खत्म हुआ और टीम वापस लौट गई।
वायरल न्यूज(Viral News Updates): Read latest trending news in India and across the world. Get updated with Viral news in Hindi at Asianet Hindi News