Published : Apr 12, 2020, 05:33 PM ISTUpdated : Apr 12, 2020, 05:46 PM IST
मुंबई. लॉकडाउन के बीच सरकार ने रामायण और महाभारत को फिर से टीवी टेलीकास्ट करने का फैसला लिया। इन दिनों लोग एक बार फिर से टीवी पर रामायण देख पा रहे हैं। रामायण के कई पात्र ऐसे थे, जो लोगों को हमेशा से ही भाते हैं। इन्हीं में से एक चरित्र भरत का भी है, जिसे रामायण में संजय जोग ने प्ले किया था। दर्शकों ने उनके किरदार को खूब पसंद किया था और लोग आज भी उन्हें पसंद ही करते हैं। संजय ने भरत के किरदार को जीवंत कर दिया था।
हालांकि, संजय जोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। 24 साल पहले 27 नवंबर, 1995 को उनका निधन हो गया था। उनके मौत की वजह लीवर का फेल होना बताया जाता है। किसी समय में वो हाईप्रोफाइल एक्टर के तौर पर जाने जाते थे, और किस्मत देखो उनकी जब मौत हुई तो किसी को भी कानों कान खबर नहीं हुई।
28
खबरों में कहा जाता है कि रामानंद सागर ने उन्हें पहले लक्ष्मण के रोल के लिए तय किया था, लेकिन उनके पास अन्य प्रोजेक्ट्स और बिजी शेड्यूल की वजह से वक्त का अभाव था, लेकिन रामानंद सागर उन्हें छोड़ना नहीं चाहते थे, क्योंकि उनका मानना था कि उन्हें ऐसे सरल स्वभाव और झील सी आंखों वाला व्यक्ति नहीं मिलेगा।
38
संजय जोग अपनी इसी खासियत की वजह से रामायण में भरत बने और वो भी अपने इस सरल स्वभाव के किरदार से लोगों के दिल में जगह बनाने में कामयाब रहे, उन्हें दर्शकों से खूब प्यार मिला और सभी उन्हें रियल लाइफ में भरत समझने लगे।
48
संजय जोग का जन्म नागपुर में हुआ था। उन्होंने रामायण के अलावा 50 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। इनमें उनकी अधिक फिल्में मराठी भाषा में थीं। बाकी बची मूवीज में कुछ गुजराती और बॉलीवुड की फिल्में थी।
58
नागपुर में जन्में संजय जोगी को लेकर कहा जाता है कि वो एक किसान था और खेतों में हल चलाया करते थे। एक बार वो खेती के काम से ही मुंबई में आए तो मराठी मल्टीस्टारर फिल्म 'जिद्द' उन्हें ऑफर हुई। इस फिल्म से ही संजय का करियर चल पड़ा। इसी बीच उन्होंने अनिल कपूर के साथ 'जिगरवाला' साइन की।
68
अनिल कपूर की इस फिल्म से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद संजय ने 'अपना घर' और ऐसी और भी दूसरी हिंदी फिल्मों में काम किया।
78
संजय को 'रामायण' में रोल कैसे मिला, इसकी कहानी भी दिलचस्प है। उन्होंने एक गुजराती फिल्म 'माया बाजार' में महाभारत के अभिमन्यु का रोल प्ले किया था। उसमें उनके मेकअप मैन थे गोपाल दादा। रामानंद सागर की 'रामायण' में भी गोपाल दादा ही मेकअप का जिम्मा संभाल रहे थे। सीरियल के लिए कास्टिंग चल रही थी और गोपाल दादा ने ही रामानंद सागर को संजय जोग का नाम सुझाया।
88
हिंदी और अंग्रेजी के अलावा संजय जोग को 5 भाषाओं का ज्ञान था। साल 1994 में उनकी आखिरी फिल्म 'बेटा हो तो ऐसा' आई थी। 1980 के दशक में एक स्टेज शो में वह 'महाभारत' के शकुनी मामा बने थे। संजय जोग के जानने वाले बताते हैं कि वह हमेशा एक सपना देखते थे कि पुणे में जमीन खरीदकर खेती करेंगे। लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका।
मनोरंजन जगत की सबसे खास खबरें अब एक क्लिक पर। फिल्में, टीवी शो, वेब सीरीज़ और स्टार अपडेट्स के लिए Bollywood News in Hindi और Entertainment News in Hindi सेक्शन देखें। टीवी शोज़, टीआरपी और सीरियल अपडेट्स के लिए TV News in Hindi पढ़ें। साउथ फिल्मों की बड़ी ख़बरों के लिए South Cinema News, और भोजपुरी इंडस्ट्री अपडेट्स के लिए Bhojpuri News सेक्शन फॉलो करें — सबसे तेज़ एंटरटेनमेंट कवरेज यहीं।