उज्जैन. ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में मृत पूर्वजों की आत्मा पितृ लोक से धरती पर आती है। यदि हम श्राद्ध आदि विधि से उन्हें संतुष्ट कर देते हैं तो पितृ आशीर्वाद देते हैं। इसलिए पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष में हम अपने पितरों के लिए विशेष उपाय करते है, जिससे उनकी आत्मा संतुष्ट हो और उनका आशीर्वाद हम पर सदा बना रहे। इस बार पितृ पक्ष 2 से 17 सितंबर तक चलेगा, जिसमें श्राद्ध कर्म किया जा सकता है। इस दौरान ये उपाय करें…
पितृ पक्ष में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना चाहिए। गीता पाठ के बाद दान करना चाहिए।
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पितृ पक्ष में हर रोज कौओं को भोजन कराने के लिए घर की छत पर छोटे-छोटे टुकड़े में खाना रखें।
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श्राद्ध पक्ष में गरुड़ पुराण का पाठ करवाएं और उसका पुण्य फल अपने गौत्र के पितरों को अर्पित करें। इससे पितृ संतुष्ट होते हैं।
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श्राद्ध में रोज कुत्तों को रोटी अवश्य खिलाएं। मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलानी चाहिए।
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यदि आप किसी कारण तर्पण नहीं कर पा रहे हों तो अपने पूर्वजों के नाम से सफेद मिठाई का दान गरीब व असहाय बच्चों में करें।
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पितृ पक्ष में पशु पक्षियों को अन्न-जल देने से विशेष लाभ होता है। इन्हें भोजन देने से पितृगण संतुष्ट होते हैं।
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पितृ पक्ष में पहली रोटी गाय को और अंतिम रोटी कुत्ते को खिलाएं।
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श्राद्ध पक्ष में किसी गौशाला में हरी घास दान करें।
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