उज्जैन. 2 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरूआत हो चुकी है। हिंदू धर्म में श्राद्ध की व्यवस्था इसलिए की गई है कि मनुष्य साल में एक बार अपने पितरों को याद कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सके। श्राद्ध का अर्थ अपने पितरों से प्रति व्यक्त की गई श्रद्धा से है। जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष होता है, उसके लिए भी श्राद्ध पक्ष का समय विशेष होता है क्योंकि इन 16 दिनों में किए गए कर्मों के आधार पर ही पितृ दोष से मुक्ति मिलना संभव है। जिन लोगों को पितृ दोष होता है, उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे-
जिनकी कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके यहां संतान होने में समस्याएं आती हैं या संतान नहीं होती। संतान हो जाए तो उनमें से कुछ अधिक समय तक जीवित नहीं रहती।
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जिन्हें पितृ दोष होता है, ऐसे लोगों के घर में धन की कमी रहती है। किसी न किसी रूप में धन की हानि होती रहती है।
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जिन्हें पितृ दोष होता है, उनके परिवार में शादी होने में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं। कुछ लोगों को शादी भी नहीं होती।
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पितृ दोष के कारण घर-परिवार में किसी न किसी कारण झगड़ा होता रहता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव बना रहता है।
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अगर बार-बार व लंबे समय तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटना पड़े तो ये भी पितृ दोष का कारण हो सकता है।
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पितृ दोष होने के कारण परिवार का एक न एक सदस्य हमेशा बीमार रहता है। यह बीमारी भी जल्दी ठीक नहीं होती।
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लड़की के विवाह में परेशानियां आती हैं। या तो विवाह में देरी होती है या मनचाहा वर नहीं मिल पाता।
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श्राद्ध पक्ष में पितृ दोष से मुक्ति के लिए ये उपाय करें
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श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, शक्कर, सब्जी और दक्षिणा दान करें।
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श्राद्ध नहीं कर सकते तो किसी नदी में काले तिल डालकर तर्पण करे। इससे भी पितृ दोष में कमी आती है।
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विद्वान ब्राह्मण को एक मुट्ठी काले तिल दान करने मात्र से ही पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।
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श्राद्ध पक्ष में पितरों को याद कर गाय को चारा खिला दे। इससे भी पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।
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सूर्यदेव को अर्ध्य देकर प्रार्थना करें कि आप मेरे पितरों को श्राद्धयुक्त प्रणाम पहुंचाएं और उन्हें तृप्त करें।
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