Published : Feb 26, 2020, 01:58 PM ISTUpdated : Feb 27, 2020, 04:53 PM IST
नई दिल्ली. दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां लगभग हर धर्म के लोग एक साथ रहते हैं। यहां राम और रहीम का नाम एक साथ लिया जाता है। हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक माने जाने वाले इस देश को मानों किसी की नजर लग गई हो। इन दिनों इस देश में जैसा माहौल चल रहा है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। देश की राजधानी दिल्ली में हालात भयावह हो गए हैं। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर राजधानी धधक रही है। उत्तर पूर्वी इलाकों में हिंसा की वजह से तनाव का माहौल है। इसमें 34 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। 250 लोग जख्मी हैं। हिंसा की शुरुआत 23 फरवरी को हुई, जब CAA का विरोध और समर्थन करने वाले पक्ष आमने सामने आए। इसके बाद से हिंसक झड़पें बढ़ती गईं। हालांकि, मंगलवार रात से स्थिति काबू में है। सरकार ने दिल्ली में हिंसा रोकने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को सौंपी है। वे लगातार सक्रिय हैं। यहां तक की उन्होंने मंगलवार देर रात हिंसा वाली जगहों का भी दौरा किया। हिंसा के कारण दिल्ली के चार इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया। पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद बेटे चार दिनों में कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्हें देखने के बाद आपका कलेजा कांप उठेगा। हालांकि, 26 फरवरी से दिल्ली में माहौल शांत है। आइये दिखाते हैं कैसे हैं भारत की राजधानी दिल्ली के हालत...
शाहीनबाग में सीएए के विरोध में करीब 2 महीने से ज्यादा वक्त से महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं। 23 फरवरी की सुबह कुछ महिलाएं जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। दोपहर होते-होते मौजपुर में भी कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
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शाम को भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया, वह दिल्ली में दूसरा शाहीन बाग नहीं बनने देंगे। वे भी अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतर आए हैं। उन्होंने लिखा, सीएए के समर्थन में मौजपुरा में प्रदर्शन। मौजपुर चौक पर जाफराबाद के सामने। कद बढ़ा नहीं करते। एड़ियां उठाने से। सीएए वापस नहीं होगा। सड़कों पर बीवियां बिठाने से।'
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भाजपा समर्थकों के सड़क पर उतरने के बाद मौजपुर चौराहे पर ट्रैफिक दोनों तरफ से बंद हो गया है। समर्थन में लोग सड़कों पर बैठ गए हैं। इसी दौरान सीएए का विरोध करने वाले और समर्थन करने वाले दो गुटों में पत्थरबाजी हुई। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
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चांदबाग़ में हिंसा के बाद गलियों में गश्ती करती पुलिस टीम। यहां बंद दुकानों में भी जबरदस्त ढंग से तोड़-फोड़ की गई।
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दिल्ली के शिव बिहार में हिंसा के बाद ऐसा माहौल देखने को मिला। पूरी सड़कें पत्थरों से पटी पड़ी थीं।
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दंगाइयों ने स्कूलों को भी नहीं बक्शा। स्कूल में जमकर तोड़फोड़ की गई। स्कूलों में बेहद बुरी तरह तोड़-फोड़ की गई। जो तस्वीरें सामने हैं, वो इसकी भयावहता साफ़ दिखा रही है।
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मुस्तफाबाद में हिंसा के बाद कैद हुई ये तस्वीर। दीवार पर लिखा मैसेज क्या वाकई इस हिंसा के दौरान देखने को मिला, ये बड़ी बात है।
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हिंसा को शांत करवाने में पुलिस और मिलिट्री का बड़ा हाथ है। उन्होंने माहौल को शांत करवाने में अहम रोल प्ले किया।
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दिल्ली हिंसा में सबसे ज्यादा गोकुलपुरी, भजनपुरा, मौजपुर जाफराबाद इलाके प्रभावित हैं।
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दिल्ली हिंसा पर अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की सीमा को सीज करने की मांग की।
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फायर सर्विस सूत्रों के अनुसार, रात में दिल्ली सर्विस के पास 350 से ज्यादा कॉल आईं। इसमें लगभग 30 से 35 कॉल ऐसी थी, जो आगजनी की घटना से संबंधित थीं। ।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार, 24 फरवरी को मौजपुर, कर्दमपुरी चांद बाग, भजनपुरा, करावल नगर आदि इलाकों में ज्यादा हिंसा हुई।
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हिंसा के दौरान पुलिसवालों पर भी पथराव हुआ। पुलिसकर्मियों से उनके सरकारी पिस्टल भी लूट ली गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 सरकारी पिस्टल गायब होने की खबर है।
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हिंसा और आगजनी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने सोमवार शाम को पूरे उत्तर पूर्वी जिले में धारा 144 लगा दिया थी।
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दिल्ली में बढ़ती हिंसा की वजह से राज्य के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि 25 फरवरी को नॉर्थ ईस्ट दिल्ली जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रहेंगे।
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दिल्ली हिंसा में कई गाडि़यों को फूंक दिया गया।
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25 फरवरी की सुबह से मौजपुर, बाबरपुर और जाफराबाद इलाके में पथराव की घटना रुक-रुक कर सामने आई।
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दिल्ली हिंसा में एक डीएसपी समेत सैंकड़ों लोग घायल हैं। हिंसा को कंट्रोल करने के लिए पुलिस के जवानों ने आंसू गैस के गोले दागे।
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दिल्ली में चार दिनों से हिंसा हो रही है। अमित शाह ने इसे लेकर हाई लेवल मीटिंग ली।
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दो गुटों के बीच हुई इस हिंसा में कई लोग जान गंवा चुके हैं। सड़कों पर जली गाड़ियां हिंसा की भयावहता दिखाने के लिए काफी है।
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हिंसा के बाद सड़कों पर बस जली गाड़ियां नजर आ रही है। हिंसा में जानवर बन चुके इंसानों की करतूत देखता कुत्ता।
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हिंसा के दौरान अपने हाथों से सिर ढंककर बचाव करता दिखा बच्चा।
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उत्पातियों ने कई धार्मिक जगहों को निशाना बनाया। तोड़-फोड़ की और फिर आग लगा दी।
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हिंसा में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। साथ ही कई को चोटें आईं।
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सेना ने इलाकों को कवर कर हिंसक तत्वों पर कार्यवाई की। कई उपद्रवियों को पुलिस ने कैद किया।
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सड़कों पर सिर्फ जली गाड़ियां और सन्नाटा ही देखने को मिल रहा है।
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पुलिस के खौफ से परे लोग सड़कों पर अचानक आकर उपद्रव करते नजर आए।
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पुलिस सहायता केंद्र भी उपद्रवियों से नहीं बच पाया।
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इस हिंसा में प्रकृति को भी जमकर नुकसान पहुंचाया गया। उत्पातियों ने जमकर पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचाया।
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दंगाइयों ने गैराज में खड़ी गाड़ियों को भी नहीं बक्शा। उन्हें भी जला दिया गया।
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इस हिंसा में जितनी गाड़ियां जलाई गईं, उसका कोई आंकड़ा सामने नहीं आया। दंगों के बाद सड़कों पर मात्र गाड़ियों के राख और ढेर नजर आए।
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हिंसा में अपनी रोजी-रोटी छीनते देख रहा बच्चा। कई दुकानें तोड़ दी गई और उनमें आग लगा दी गई।
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दंगे शांत होने के बाद सड़कों पर सिर्फ जली गाड़ियां ही नजर आईं। इसके अलावा पूरी सड़कें पत्थरों से पटे पड़े थे।
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