अगर सक्सेस रहा ड्रैगन का यह अजीब रिसर्च तो कभी बूढ़े नहीं होंगे चीनी, बढ़ चुकी है चूहों की उम्र

Published : Jan 21, 2021, 06:12 PM ISTUpdated : Jan 21, 2021, 06:28 PM IST

दुनिया में कोरोना वायरस फैलाकर मौत का 'तांडव' कराने वाला चीन लगातार कुछ न कुछ अजीब रिसर्च करता रहता है। अब यह इंसान की आयु बढ़ाने की कोशिश में लगा है। चीन के वैज्ञानिक जीन थैरेपी से बुढ़ापे पर कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने इस थैरेपी से चूहों की उम्र 25 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। यानी अगर चीन का यह रिसर्च इंसानों पर भी सक्सेस रहा, तो उसकी आयु भी कुछ साल और बढ़ जाएगी।

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अगर सक्सेस रहा ड्रैगन का यह अजीब रिसर्च  तो कभी बूढ़े नहीं होंगे चीनी, बढ़ चुकी है चूहों की उम्र
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बता दें कि शरीर के अंदर कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन्स (genes) स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी खराबी से ही इंसान को बीमारियां होती हैं। बुढ़ापा आदि भी जैनेटिक प्रक्रिया है। वैज्ञानिक लंबे समय से खराब जीन्स को हेल्दी जीन्स में बदलने पर रिसर्च कर रहे हैं। अगर चीन की यह जीन्स थैरेपी सक्सेस रही, तो इंसान की उम्र बढ़ सकती है।
 

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चीन की इस रिसर्च का खुलासा किया है। इसमें बताया गया है कि साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन जर्नल में इस जीन्स थैरेपी पर एक रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इसका प्रयोग अभी चूहों पर किया गया है। इससे उनकी उम्र 25 प्रतिशत तक बढ़ गई। इस थैरेपी में Kat7 नामक जीन्स को निष्क्रिय किया जाता है। यही जीन्स बुढ़ापा लाता है।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि चाइनीज एकडेमी ऑफ साइंसेंस के इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजी के प्रोफेसर कू जिंग और उनकी टीम ने यह जीन थैरेपी ईजाद की है। कू जिंग को एजिंग और रीजेनेरेटिव मेडिसिन का एक्सपर्ट माना जाता है।

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इस थैरपी के बाद 6-8 महीने में चूहों में परिवर्तन दिखने लगा था। उनमें सक्रियता आ गई। वे पहले जैसे फुर्तीले नजर आने लगे। कहा जा रहा है कि जीन थैरेपी से चूहो की उम्र 25 प्रतिशत तक बढ़ गई।

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चाइनीज एकडेमी ऑफ साइंसेंस के इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजी के अन्य विभागों ने हजारों जीन्स की जांच के बाद ऐसे 100 जीन्स का पता लगाया है, जो बुढ़ापे के लिए जिम्मेदार होते हैं। बता दें कि  Kat7 नामक जीन्स सिर्फ चूहों नहीं, सभी स्तनधारियों में मौजूद होता है।

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हालांकि इंसानों के शरीर में  Kat7 नामक जीन की जांच के लिए परमिशन की जरूरत पड़ेगी। इससे पहले यह देखना होगा कि यह रिसर्च इंसानों के लिए कहीं घातक तो नहीं है।

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