
Jagannath Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा वर्ल्ड के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। करोड़ों लोग इस यात्रा को टीवी और सोशल मीडिया के जरिए लाइव देखते हैं। रथयात्रा सिर्फ भगवान जगन्नाथ के रथ पर सवार होकर मंदिर से बाहर आने का उत्सव नहीं है। इसके पीछे कई ऐसी परंपराएं, मान्यताएं और रोचक फैक्ट हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान सालभर विराजमान रहते हैं, लेकिन साल में सिर्फ एक बार अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडीचा मंदिर जाते हैं। यह यात्रा भगवान के अपनी मौसी के घर जाने का प्रतीक है।
रथयात्रा का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि तीनों रथ हर साल नए बनाए जाते हैं। पुराने रथों का दोबारा यूज नहीं होता है। कुछ खास लकड़ी से तय परंपराओं के अनुसार इसे बनाया जाता है। इस काम को पूरा करने में सैकड़ों कारीगरों को कई सप्ताह लगता है।
रथयात्रा में तीन अलग-अलग रथ निकलते हैं। तीनों रथों का साइज, कलर, ध्वज और सजावट भी अलग होती है।
भगवान के रथ की रस्सी खींचना विशेष पुण्य का काम माना जाता है। इस वजह से लाखों श्रद्धालु रथ को खींचते हैं।
रथयात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा पर भगवान को 108 कलशों के जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान बीमार हो जाते हैं और लगभग 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते। इस अवधि को अनसर (Anasara) कहा जाता है।
रथयात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति महाराज सोने की झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। इस परंपरा को छेरा पहंरा कहा जाता है। इसका संदेश है कि भगवान के सामने राजा और आम इंसान सभी समान हैं।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां सामान्य मूर्तियों से अलग होती है। इनकी बड़ी गोल आंखें और विशिष्ट आकृति सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा हैं। मूर्तियां अधूरी अवस्था में ही स्थापित कर दी गई थीं।
रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ सीधे वापस नहीं लौटते। वे गुंडीचा मंदिर में कुछ दिनों तक विराजते हैं। इसके बाद वापसी यात्रा होती है, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है।
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस और कई अन्य देशों में भी जगन्नाथ रथयात्रा निकलती है। ISKCON ने इस परंपरा को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाती है।
रथयात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भगवान किसी एक वर्ग या समुदाय के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के हैं। रथ खींचने, दर्शन करने और सेवा करने का अवसर सभी को समान रूप से मिलता है।
Content References: Shree Jagannath Temple Administration (SJTA), Puri, Odisha Tourism Department, Ministry of Culture, Government of India, Skanda Purana (Purushottama Mahatmya), Brahma Purana एवं Padma Purana, ISKCON के प्रकाशन