
ABVP vs NSUI History: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 का रिजल्ट आ चुका है। चार सेंट्रल पोस्ट में से तीन पर ABVP के उम्मीदवार जीते हैं। यश डबास प्रेसिडेंट, रिया छावड़ी सेक्रेटरी और लक्ष्य राज सिंह जॉइंट सेक्रेटरी चुने गए हैं। वहीं, वाइस प्रेसिडेंट पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की है। इस चुनाव में ABVP और NSUI के बीच मुकाबला एक बार फिर चर्चा में रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये दोनों छात्र संगठन कब और कैसे बने, इनका इतिहास कैसा रहा है? आइए जानते हैं पूरी कहानी...
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की शुरुआत आजादी के बाद छात्र संगठनों के एक राष्ट्रीय मंच के तौर पर हुई। ABVP के मुताबिक, संगठन की गतिविधियां 1948 के आसपास शुरू हुई थीं और 9 जुलाई 1949 को इसे औपचारिक तौर पर रजिस्टर किया गया। संगठन के रिकॉर्ड के मुताबिक, इसका पहला सम्मेलन 1948 में अंबाला में हुआ था। ABVP के अनुसार, इसका काम कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस से जुड़े छात्र मुद्दों के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर काम करना रहा है। संगठन खुद को किसी राजनीतिक पार्टी की शाखा या विंग नहीं बताता और अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे एक स्वतंत्र सामाजिक संगठन कहता है।
एबीवीपी के अपने रिकॉर्ड के मुताबिक, 1949 से 1959 के बीच संगठन ने अलग-अलग राज्यों, शैक्षणिक संस्थानों और यूनिवर्सिटी कैंपस में अपना नेटवर्क बढ़ाया। 1952 में साक्षरता अभियान से जुड़े कार्यक्रम किए गए और 1956 से नियमित राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुए। इसके बाद संगठन की गतिविधियां छात्र शिक्षा, कैंपस कार्यक्रमों और सामाजिक मुद्दों तक फैलती गईं। यानी ABVP की शुरुआत किसी एक यूनिवर्सिटी के चुनाव से नहीं हुई थी। इसका शुरुआती फोकस देशभर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्र गतिविधियों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करने पर रहा।
NSUI (National Students' Union of India) की शुरुआत ABVP के करीब दो दशक बाद हुई। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 9 अप्रैल 1971 को NSUI की स्थापना हुई थी। इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अलग-अलग राज्यों के छात्र संगठनों को मिलाकर राष्ट्रीय स्तर का छात्र संगठन बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया था। NSUI के गठन में KSU (Kerala Students' Union) और वेस्ट बंगाल स्टेट छात्र संगठन (West Bengal State Chhatra Parishad) को मिलाया गया था। इस तरह दोनों संगठनों को एक राष्ट्रीय छात्र संगठन के रूप में जोड़ा गया और NSUI अस्तित्व में आया।
ABVP और NSUI के बीच एक बड़ा अंतर उनके संगठनात्मक संबंध को लेकर है। ABVP अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में खुद को स्वतंत्र सामाजिक संगठन बताता है और किसी राजनीतिक पार्टी की शाखा या विंग नहीं मानता। वहीं कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट NSUI को इंडियन नेशनल कांग्रेस का स्टूडेंट विंग बताती है। NSUI के इतिहास में 1971 के बाद छात्र मुद्दों, शिक्षा और कैंपस से जुड़े सवालों पर संगठन के काम का जिक्र मिलता है। कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में NSUI की शुरुआत को छात्र समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने से जोड़ा गया है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में ABVP और NSUI लंबे समय से सक्रिय हैं। DUSU में प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी जैसे चार सेंट्रल पदों के लिए चुनाव होता है। DUSU के मुताबिक, प्रेसिडेंट यूनियन का प्रमुख होता है, जबकि वाइस प्रेसिडेंट प्रेसिडेंट की मदद करता है। सेक्रेटरी प्रशासनिक काम, रिकॉर्ड और आधिकारिक पत्राचार (Correspondence) संभालता है और जॉइंट सेक्रेटरी वित्तीय रिकॉर्ड, कार्यक्रमों, कैंपस कम्युनिकेशन और छात्र शिकायतों से जुड़े काम देखता है। यही वजह है कि इन पदों के लिए दोनों संगठनों में कड़ी टक्कर देखने को मिलती है।
2026 के DUSU चुनाव में ABVP ने चार में से तीन सेंट्रल पद जीते। यश डबास ने 24,576 वोट लेकर प्रेसिडेंट पद, रिया छावड़ी ने 21,650 वोट लेकर सेक्रेटरी पद और लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट लेकर जॉइंट सेक्रेटरी पद जीता। वाइस प्रेसिडेंट पद पर निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व NSUI से जुड़े रहे दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। इस रिजल्ट के साथ एक बार फिर DUSU चुनाव के केंद्र में ABVP और NSUI की सीधी चुनावी टक्कर रही, जबकि इस बार वाइस प्रेसिडेंट पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत भी रिजल्ट का अहम हिस्सा रही।