इस शहर में जमीन के नीचे बने हैं घर, 52°C की झुलसाने वाली गर्मी में भी रहता है ठंडा

Published : Jul 21, 2026, 05:04 PM IST
Underground City Coober Pedy

सार

Underground City: दुनिया में एक ऐसी जगह है, जहां की 60% आबादी जमीन के नीचे बने घरों में रहती है। बाहर 52°C की झुलसाने वाली गर्मी में भी नेचुरल इंसुलेशन से अंदर का टेंपरेचर 23°C रहता है।

Underground City Coober Pedy: दुनियाभर में ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) का असर तेजी से बढ़ रहा है। भीषण गर्मी, हीटवेव और रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। जहां 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में एसी (Air Conditioner) भी जवाब दे जाते हैं, वहीं इस दुनिया में एक ऐसा अनोखा शहर भी है, जहां लोग जमीन के नीचे (Underground City) रहते हैं। बाहर भले ही 52°C की झुलसाने वाली धूप हो, लेकिन ज़मीन के अंदर बने इन मकानों में बिना एसी या पंखे के तापमान 23°C से 24°C तक बना रहता है। आइए जानते हैं यह अनोखा शहर कहां है और यहां लोग जमीन के नीचे घर क्यों बनाते हैं...

कहां है यह अनोखा शहर?

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड शहर से करीब 848 किलोमीटर उत्तर में कूबर पेडी (Coober Pedy) बसा है। पहली नजर में यह इलाका किसी रेगिस्तान जैसा लगता है, जहां चारों तरफ सिर्फ गुलाबी-लाल रंग की मिट्टी के टीले दिखाई देते हैं। इस शहर में कुल करीब 2,500 लोग रहते हैं, जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत लोग जमीन के नीचे खुदे हुए घरों (Dugouts) में रहते हैं। यहां सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि चर्च, सुपरमार्केट, रेस्तरां, बार, म्यूजियम और टेंट लगाने वाले कैंपसाइट्स भी ज़मीन के नीचे ही बनाए गए हैं।

जमीन के नीचे घर बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

इस इलाके में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 50 से 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इतनी तेज गर्मी में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में लोगों ने सालों पहले एक ऐसा तरीका अपनाया जिससे बिना ज्यादा बिजली खर्च किए घर हमेशा ठंडे रहें। धरती के अंदर कुछ मीटर नीचे तापमान लगभग 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहता है। यही वजह है कि यहां बने घरों में गर्मी हो या सर्दी, तापमान लगभग एक जैसा रहता है।

52°C की गर्मी में भी बिना AC कैसे रहता है 23°C तापमान?

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, जब गर्मियों में कूबर पेडी का तापमान 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब इतनी भयंकर गर्मी होती है कि आसमान से पक्षी गिर जाते हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों को फ्रिज में रखना पड़ता है। लेकिन जमीन के नीचे लाइफ काफी रिलैक्स वाली रहती है। जमीन के नीचे 4 मीटर (13 फीट) की गहराई पर बलुआ पत्थर (Sandstone) का कुदरती इंसुलेशन मिलता है। इससे बाहर चाहे 52°C की गर्मी हो या सर्दियों में रात का तापमान 2-3°C गिर जाए, अंदर का तापमान हमेशा 23°C से 24°C पर फिक्स रहता है। जब ऊपर रहने वाले लोग एसी और हीटर चलाने के लिए भारी-भरकम बिजली का बिल भरते हैं, तब अंडरग्राउंड रहने वाले लोग जीरो बिजली खर्च में कुदरती ठंडक का मजा लेते हैं। जमीन के नीचे मक्खियों, मच्छरों या अन्य कीड़ों का नामो-निशान नहीं होता है। इसके अलावा बाहर के शोर और प्रदूषण से भी पूरा बचाव रहता है।

जमीन के अंदर ये अनोखे अंडरग्राउंड घर कैसे बनते हैं?

कूबर पेडी में 'ओपल' (Opal) नाम के कीमती पत्थर की माइनिंग (खनन) होती है। यहां की बलुआ चट्टानें काफी नरम होती हैं, जिन्हें आसानी से काटा जा सकता है। आज के समय में टनलिंग मशीनों के जरिए मात्र एक महीने के अंदर 3-बेडरूम वाला शानदार अंडरग्राउंड घर (Dugouts) तैयार हो जाता है। कई लोगों ने अपने अंडरग्राउंड मकानों में अंडरग्राउंड स्विमिंग पूल, गेमिंग रूम, बड़े-बड़े बाथरूम और मेहराबदार दरवाज़े (Arched Doorways) बना रखे हैं जो किसी महल जैसे दिखते हैं। जहां बड़े शहरों में मकानों की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं यहां कम बजट में भी नेचुरल इंसुलेशन वाले मजबूत घर उपलब्ध हैं।

जमीन के नीचे कब से लोग रह रहे हैं?

तुर्की की डेरिनकुयू (Derinkuyu, Turkey)

जमीन के नीचे रहना कोई नया ट्रेंड नहीं है। मानव इतिहास में लोग हजारों सालों से मुश्किल मौसम और हमलों से बचने के लिए अंडरग्राउंड सहारा लेते रहे हैं। तुर्की के कप्पाडोसिया (Cappadocia) क्षेत्र में 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बनाई गई 'डेरिनकुयू' नाम की एक विशाल भूमिगत गुफा यानी शहर है। यहां एक समय में 20,000 लोग, उनके मवेशी, चर्च, अस्तबल और कुएँ ज़मीन के नीचे मौजूद थे। बाहर का तापमान चाहे जो हो, अंदर हमेशा 13°C रहता है।

चीन के एयर रेड शेल्टर्स (Chongqing, China)

कुछ समय पहले जब चीन में 35°C से ऊपर की भीषण हीटवेव आई, तो लोगों को गर्मी से बचाने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध (World War 2) के समय बने अंडरग्राउंड शेल्टर्स को खोलना पड़ा। जहां लोगों को शिफ्ट भी किया गया।

क्या हर जगह जमीन के नीचे घर बनाना पॉसिबल है?

भले ही कूबर पेडी का मॉडल ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने का बेहतरीन जरिया दिख रहा हो, लेकिन इसे हर जगह लागू करना आसान नहीं है। क्योंकि कूबर पेडी का मौसम बेहद शुष्क (Arid) है। जिन इलाकों में बारिश ज्यादा होती है या भूजल स्तर (Water Table) ऊपर होता है, वहां अंडरग्राउंड घरों में सीलन (Dampness and Groundwater), पानी का रिसाव और काली फफूंद (Black Mould) की बड़ी समस्या हो सकती है। इसके अलावा ऑक्सीजन की सप्लाई और घर की नमी को बाहर निकालने के लिए सही तरीके से वेंटिलेशन पाइप लगाना बेहद जरूरी होता है।

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