
Famous Gurus of India: कामयाबी की कहानी अक्सर एक नाम से जुड़ी दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे कई ऐसे लोग होते हैं जिन्होंने सही समय पर सही सलाह दी। किसी ने मुश्किल दौर में भरोसा बढ़ाया, किसी ने हुनर पहचाना और किसी ने रास्ता दिखाया। भारत के कई बड़े राजनेता, अभिनेता, बिजनेसमैन और खिलाड़ी भी अपने सफर में ऐसे गुरुओं या मेंटर्स का योगदान मानते रहे हैं। आइए जानते हैं मोदी-अमिताभ बच्चन से लेकर विराट कोहली तक...किस दिग्गज के पीछे कौन-सा गुरु या मार्गदर्शक रहा।
गुजरात के RSS नेता लक्ष्मणराव इनामदार ने युवा नरेंद्र मोदी को संघ के काम से जोड़ा और उनके शुरुआती राजनीतिक जीवन को दिशा दी। मोदी ने उन्हें अपना महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना।
अमित शाह के राजनीतिक सफर में नरेंद्र मोदी का रोल काफी महत्वपूर्ण रही। शाह की ऑफिशियल वेबसाइट भी मोदी को उनका राजनीतिक मेंटर बताती है।
इंदिरा गांधी के राजनीतिक जीवन पर उनके पिता और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का गहरा प्रभाव था। राजनीति और सार्वजनिक जीवन की बारीकियां उन्होंने घर के माहौल से सीखीं।
राजीव गांधी शुरू में राजनीति से दूर रहना चाहते थे, लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति संभाली। उनके राजनीतिक जीवन में मां इंदिरा गांधी सबसे बड़ी प्रेरणा रहीं।
वाजपेयी के शुरुआती राजनीतिक सफर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा। उनके साथ काम करते हुए वाजपेयी की राजनीतिक पहचान मजबूत हुई।
आडवाणी के विचारों और राजनीतिक ट्रेनिंग पर जनसंघ के शुरुआती नेताओं का प्रभाव रहा। खासकर दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा ने उन्हें दिशा दी।
छात्र आंदोलन के दौर में जयप्रकाश नारायण से जुड़ना नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। जेपी आंदोलन ने उन्हें सक्रिय राजनीति में पहचान दी।
महाराष्ट्र के दिग्गज नेता यशवंतराव चव्हाण को शरद पवार का राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है। उनके साथ काम करके पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति की बारीकियां समझीं।
ममता बनर्जी ने छात्र राजनीति और आंदोलन की राजनीति से अपना सफर शुरू किया। जेपी आंदोलन की विचारधारा और संघर्ष की राजनीति ने उनके शुरुआती राजनीतिक सोच को प्रभावित किया।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे के साथ काम करने से केजरीवाल को राष्ट्रीय पहचान मिली। हालांकि, बाद में दोनों के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए।
अमिताभ ने ख्वाजा अहमद अब्बास को अपनी पहली फिल्म में मौका देने के लिए याद किया और ऋषिकेश मुखर्जी को अपना ‘गॉडफादर’ माना।
दिल्ली में थिएटर के दिनों में बैरी जॉन ने शाहरुख को अभिनय की बारीकियां सिखाईं। खुद शाहरुख भी कहते रहे हैं कि उनकी सफलता का पूरा श्रेय सिर्फ उन्हें नहीं दिया जा सकता। इसमें उनके मेंटर का बड़ा रोल है।
NSD में कई बार असफल होने के बाद बैरी जॉन ने मनोज बाजपेयी को थिएटर में ट्रेनिंग दी। मनोज बाजपेयी ने उन्हें अपना मेंटर और जिंदगी में बड़ा बदलाव लाने वाला इंसान बताया।
मॉडलिंग से फिल्मों की तरफ बढ़ते समय प्रदीप गुहा ने प्रियंका को करियर में सपोर्ट किया। प्रियंका ने उन्हें अपना मजबूत सपोर्टर और ‘forever champion’ बताया।
ऋचा ने कम उम्र में बैरी जॉन से अभिनय सीखने की इच्छा जताई थी। बाद में उन्होंने उनके ट्रेनिंग से थिएटर और अभिनय की नींव मजबूत की।
वरुण धवन ने बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल से ट्रेनिंग ली। उनके लिए यह ट्रेनिंग कैमरे के सामने अभिनय की बुनियादी समझ डेवलप करने का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
राणा ने भी बैरी जॉन से एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। साउथ फिल्म इंडस्ट्री से लेकर बॉलीवुड तक उनके सफर में थिएटर ट्रेनिंग ने परफॉर्मेंस की समझ डेवलप करने में हेल्प की।
कुणाल कपूर ने बैरी जॉन के साथ एक्टिंग कोचिंग ली और थिएटर की दुनिया से अपनी अभिनय यात्रा को स्ट्रॉन्ग किया।
दीया मिर्जा भी बैरी जॉन से ट्रेनिंग लेने वाले कलाकारों में शामिल रही हैं। उनका स्कूल कई चर्चित कलाकारों के लिए शुरुआती ट्रेनिंग का सेंटर रहा।
‘Slumdog Millionaire’ से वर्ल्ड में पहचान बनाने वाली फ्रीडा पिंटो ने भी बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल प्रोग्राम में ट्रेनिंग ली थी।
रतन टाटा ने जेआरडी टाटा को अपना सबसे बड़ा मेंटर बताया था। उन्होंने कहा था- जेआरडी उनके लिए पिता और भाई जैसे थे।
मुकेश अंबानी ने अपने पिता धीरूभाई अंबानी के साथ बहुत करीब से कारोबार सीखा। रिलायंस जिस तरह से आगे बढ़ा, उसमें धीरूभाई की सोच का प्रभाव है।
अनिल अंबानी के शुरुआती कारोबारी ट्रेनिंग और सोच पर भी धीरूभाई अंबानी का प्रभाव रहा। परिवार के बिजनेस को समझने का मौका उन्हें बचपन से मिला। हालांकि इस समय वो काफी संघर्ष कर रहे हैं।
इंडियन IT बिजनेस के शुरुआती दौर में एफसी कोहली जैसी हस्तियों ने टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की दिशा में नई पीढ़ी को प्रभावित किया। मूर्ति के करियर में शुरुआती टेक्निकल नॉलेज का भी बड़ा रोल रहा।
पिता हाशम प्रेमजी की अचानक मृत्यु के बाद 21 साल की उम्र में अजीम प्रेमजी को फैमिली बिजनेस संभालना पड़ा। इसी जिम्मेदारी ने उन्हें कम उम्र में बिजनेस की दुनिया में उतार दिया।
आनंद महिंद्रा की सोच पर बिजनेस के साथ कला, इतिहास और मानवता की शिक्षा का असर रहा। हार्वर्ड में पढ़ाई ने उनकी अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़कर सोचने की स्टाइल को स्ट्रॉन्ग किया।
Ola के फाउंडर भाविश अग्रवाल ने रतन टाटा को अपना पर्सनल हीरो और मार्गदर्शक बताया है। टाटा ने 2015 में Ola में इन्वेस्ट किया और भाविश के सफर में पर्सनल इंट्रेस्ट भी लिया।
OYO के फाउंडर रितेश अग्रवाल के लिए रतन टाटा का समर्थन बड़ा मोड़ था। टाटा ने 2015 में उनकी कंपनी में पर्सनल इन्वेस्टमेंट किया और यंग बिजनेसमैन पर भरोसा जताया।
इंडियन IT जगत में सीनियर बिजनेसमैन ने अगली पीढ़ी के CEO और एंटरप्रेन्योर को सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि मैनेजमेंट और लीडरशिप की ट्रेनिंग भी दी। प्रेमजी के साथ काम करने वाले कई लोगों ने उनके लीडरशिप को सीखने का अनुभव बताया है।
जेआरडी टाटा ने खुद एक ऐसे कारोबारी परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसमें बिजनेस के साथ संस्थान बनाने और समाज के लिए काम करने को महत्व दिया गया। टाटा समूह की संस्थागत सोच कई पीढ़ियों से डेवलप हुई।
आचरेकर ने सचिन की शुरुआती प्रतिभा को निखारा और उन्हें अनुशासन के साथ लगातार अभ्यास करना सिखाया। सचिन हमेशा अपने बचपन के गुरु को सम्मान से याद करते रहे हैं।
कोहली बचपन से ही राजकुमार शर्मा की कोचिंग में रहे। उन्होंने टेक्नीक के साथ डिसिप्लीन, मेहनत और मेंटल स्ट्रेंथ पर भी काम किया।
रांची में शुरुआती क्रिकेट के दौरान कोच केशव बनर्जी ने धोनी की प्रतिभा पहचानी और उन्हें विकेटकीपिंग तथा क्रिकेट को गंभीरता से लेने के लिए इंस्पायर किया।
नीरज के करियर में कई कोचों का योगदान रहा। शुरुआती दौर में नसीम अहमद और बाद में उवे हॉन, क्लॉस बार्टोनिएट्ज जैसे कोचों ने उनकी टेक्निक और ट्रेनिंग को अलग-अलग लेबल पर डेवलप किया।
गोपीचंद की अकादमी में ट्रेनिंग ने सिंधु के करियर को मजबूत आधार दिया। इसी दौर में उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर लगातार बड़ी सफलताएं हासिल कीं।
गोपीचंद ने साइना के करियर के शुरुआती और महत्वपूर्ण दौर में कोच के रूप में बड़ी भूमिका निभाई। बाद में अलग कोच के साथ काम करने के बावजूद साइना गोपीचंद के योगदान को कभी नहीं भूली।
शूटिंग में हाइंज रेनकमेयर ने बिंद्रा की टेक्निक और मानसिक तैयारी को बेहतर करने में भूमिका निभाई। बिंद्रा के ओलंपिक सफर में इस ट्रेनिंग का खास रोल रहा।
एटकिंसन ने मैरी कॉम की टेक्निक, ताकत, डिफेंस और स्ट्रेटजी पर वर्क किया। मैरी ने खुद माना था कि उनके ट्रेनिंग में एटकिंसन की प्लानिंग का बड़ा योगदान था।
सेना में गुरदेव सिंह से ट्रेनिंग और बाद में आर्थर हॉवर्ड जैसे कोचों की टेक्निकल सलाह ने मिल्खा सिंह की दौड़ को नई दिशा दी। हॉवर्ड ने उनकी शुरुआती टेक्निक और रेस स्ट्रेटजी पर खास काम किया।
गोपीचंद खुद खिलाड़ी से कोच बने और बाद में भारत के कई बड़े बैडमिंटन खिलाड़ियों को तैयार किया। उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि एक खिलाड़ी खुद भी आगे चलकर गुरु बन सकता है।
इसलिए जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ टैलेंट काफी नहीं है। सही गुरु, सही समय पर मिली सलाह और उस सलाह पर लगातार मेहनत - ये तीनों मिलकर किसी नॉर्मल शुरुआत को असाधारण सफलता में बदल सकते हैं।