जब हम बीमार पड़ते हैं, तो डॉक्टर हमें कई तरह की दवाइयां लिखते हैं। इनमें टैबलेट और कैप्सूल सबसे ज्यादा होते हैं। लेकिन क्या आप इन दोनों के बीच का असली अंतर जानते हैं? टैबलेट कैसे बनती है और कैप्सूल कैसे काम करता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
फार्मा कंपनियां दवा के एक्टिव इंग्रीडिएंट्स (Active Ingredients) और अन्य चीजों को मिलाकर, भारी दबाव डालकर टैबलेट बनाती हैं। यह एक ठोस रूप है। कंपनियां इसे एक तय डोज के हिसाब से बनाती हैं। इससे मरीज को दवा की सही मात्रा मिलती है। टैबलेट बनाना काफी सस्ता पड़ता है। आप इसे आसानी से स्टोर और ट्रांसपोर्ट कर सकते हैं। सही जगह रखने पर ये लंबे समय तक खराब नहीं होतीं। कुछ टैबलेट्स के ऊपर एक खास कोटिंग होती है। यह कोटिंग दवा के कड़वे स्वाद को छिपाती है और इसे निगलना आसान बनाती है। कुछ खास कोटिंग वाली टैबलेट्स पेट के बजाय सीधे आंतों में जाकर घुलती हैं। कुछ टैबलेट्स शरीर में धीरे-धीरे दवा रिलीज करती हैं। हर टैबलेट एक जैसी काम नहीं करती। कुछ पानी या मुंह में जल्दी घुल जाती हैं, तो कुछ को चबाकर खाना पड़ता है। इसलिए टैबलेट को कैसे खाना है, यह हमेशा डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
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कैप्सूल क्या है और इसकी खासियत क्या है?
कैप्सूल एक खास तरह के बाहरी खोल (Shell) में बंद दवा होती है। इस खोल के अंदर दवा पाउडर, छोटे कणों या लिक्विड के रूप में रहती है। कंपनियां इस खोल को जिलेटिन या पौधों से मिलने वाले पदार्थों से बनाती हैं। कैप्सूल मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं। पहला, हार्ड कैप्सूल, जिसके अंदर पाउडर या छोटे कण होते हैं। दूसरा, सॉफ्टजेल कैप्सूल, जो मुलायम होता है और इसके अंदर लिक्विड या तेल वाली दवा होती है। जब आप कैप्सूल खाते हैं, तो इसका बाहरी खोल पाचन तंत्र में जाकर टूट जाता है और अंदर की दवा शरीर में रिलीज हो जाती है। इस खोल की वजह से आपको दवा का कड़वा स्वाद या महक नहीं आती। कैप्सूल की सतह चिकनी होती है, इसलिए मरीज इसे आसानी से निगल लेते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कैप्सूल हमेशा टैबलेट से जल्दी काम करेगा। दवा शरीर में कितनी जल्दी घुलेगी, यह उसके अंदर मौजूद चीजों और बनाने के तरीके पर निर्भर करता है। डॉक्टर की सलाह के बिना मरीज को कभी भी कैप्सूल खोलकर उसकी दवा नहीं खानी चाहिए।
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टैबलेट या कैप्सूल: कौन जल्दी असर करता है और कौन है सस्ता?
बहुत से लोग सोचते हैं कि टैबलेट और कैप्सूल में से कौन बेहतर है। सच तो यह है कि कोई एक हमेशा दूसरे से बेहतर नहीं होता। दवा का असर उसके इंग्रीडिएंट्स, डोज और शरीर में घुलने के तरीके पर निर्भर करता है। टैबलेट बनाने में कम खर्च आता है, इसलिए कंपनियां इन्हें अक्सर सस्ता बेचती हैं। वहीं, कुछ कैप्सूल जल्दी असर कर सकते हैं, लेकिन कंपनियां कुछ टैबलेट्स भी तेजी से घुलने के लिए बनाती हैं। कैप्सूल चिकने होते हैं, इसलिए मरीज इन्हें आसानी से निगल लेते हैं, लेकिन बड़े कैप्सूल निगलने में दिक्कत भी कर सकते हैं। कैप्सूल दवा के कड़वे स्वाद को पूरी तरह छिपा लेता है, जबकि टैबलेट में इसके लिए खास कोटिंग करनी पड़ती है। स्टोरेज की बात करें तो टैबलेट नमी को कैप्सूल से बेहतर तरीके से झेल सकती है। डॉक्टर की सलाह पर आप कुछ टैबलेट्स को आधा तोड़कर खा सकते हैं, लेकिन आपको कैप्सूल कभी भी खोलकर या तोड़कर नहीं खाना चाहिए।
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जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों में क्या अंतर है?
टैबलेट और कैप्सूल के साथ-साथ आपको जेनेरिक और ब्रांडेड दवाइयों का अंतर भी समझना चाहिए। बीमारी पर असर करने वाले मुख्य तत्व को 'एक्टिव इंग्रीडिएंट' कहते हैं। जब कोई कंपनी दवा को इसी मूल नाम से बेचती है, तो उसे जेनेरिक दवा कहते हैं, जैसे पैरासिटामोल। वहीं, जब कोई फार्मा कंपनी इसी दवा को अपना एक खास नाम देकर बेचती है, तो वह ब्रांडेड दवा बन जाती है। नई दवा बनाने में कंपनियां रिसर्च और टेस्टिंग पर बहुत खर्च करती हैं। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को यह रिसर्च दोबारा नहीं करनी पड़ती, इसलिए वे जेनेरिक दवाइयां काफी सस्ती बेचती हैं। क्वालिटी और असर के मामले में जेनेरिक दवाइयां बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों की तरह ही काम करती हैं। हालांकि, इनका रंग, आकार या स्वाद अलग हो सकता है। सस्ती होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जेनेरिक दवा खराब है। दवा बदलने से पहले आप हमेशा अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह जरूर लें।
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दवाइयां खाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
आप टैबलेट खाएं या कैप्सूल, उन्हें सही तरीके से लेना बहुत जरूरी है। कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से बच सकते हैं। आप हमेशा डॉक्टर की बताई गई डोज ही लें। जल्दी ठीक होने के चक्कर में आप कभी भी ज्यादा टैबलेट या कैप्सूल न खाएं। अपनी मर्जी से आप टैबलेट को पीसकर या तोड़कर न खाएं। ऐसा करने से दवा का असर बदल सकता है। टैबलेट को तोड़ना सुरक्षित है या नहीं, यह आप हमेशा फार्मासिस्ट से पूछें। आप कैप्सूल को कभी भी खोलकर न खाएं, जब तक कि डॉक्टर ने ऐसा करने को न कहा हो। दवा खाने से पहले आप उसकी एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें। अगर दवा का रंग, महक या आकार बदल गया है, तो आप उसे बिल्कुल इस्तेमाल न करें।
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