
Solar Eclipse Corona: जब आसमान में पूर्ण सूर्य ग्रहण यानी Total Solar Eclipse होता है, तो दिन के उजाले में कुछ मिनटों के लिए ऐसा नजारा दिखाई देता है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। चंद्रमा धीरे-धीरे सूर्य को ढकता है और आखिर में जब सूर्य पूरी तरह छिप जाता है, तब उसके चारों ओर एक चमकता हुआ सफेद और हल्का-सा मोती जैसा घेरा नजर आता है। इसी खूबसूरत हिस्से को सूर्य का कोरोना (Solar Corona) कहते हैं। सवाल है- जब सूर्य का मुख्य हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है, तो यह चमकता हुआ घेरा दिखाई कैसे देता है? क्या यह सूर्य की कोई अलग परत है? यह इतना गर्म क्यों है? जानिए इसके पीछे का रहस्य।
कोरोना सूर्य के वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है। सूर्य को केवल एक ठोस गेंद समझना सही नहीं है। उसके चारों ओर अलग-अलग परतों वाला बेहद गर्म गैस और प्लाज्मा का वातावरण मौजूद है। सूर्य की दिखाई देने वाली सतह को फोटोस्फीयर (Photosphere) कहा जाता है। इसके ऊपर क्रोमोस्फीयर और फिर सबसे बाहरी हिस्सा कोरोना होता है। कोरोना सूर्य की सतह से बहुत दूर तक फैला हुआ है और अंतरिक्ष में धीरे-धीरे फैलता जाता है। यही एरिया आगे चलकर Solar Wind यानी सौर हवा का स्रोत बनता है।
सामान्य दिनों में सूर्य की चमक इतनी तेज होती है कि कोरोना की बेहद हल्की रोशनी हमारी आंखों तक आसानी से नहीं पहुंच पाती। सूर्य की मुख्य डिस्क की रोशनी कोरोना को लगभग पूरी तरह ढक देती है। लेकिन Total Solar Eclipse के दौरान चंद्रमा लगभग पूरी सौर डिस्क को ढक लेता है। इस समय सूर्य की तेज रोशनी सामने से दिखाई नहीं देती और उसके आसपास मौजूद बेहद कमजोर कोरोना का प्रकाश उभरकर सामने आता है। तभी सूर्य के चारों ओर सफेद रंग का चमकता हुआ 'मुकुट' जैसा सर्कल दिखाई देता है। इसी वजह से इसे Corona कहा जाता है। लैटिन भाषा में Corona का अर्थ 'मुकुट' या 'crown' होता है।
कोरोना खुद किसी बल्ब की तरह प्रकाश पैदा नहीं करता। इसकी चमक मुख्य रूप से सूर्य के प्रकाश के उसके अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनों से बिखरने के कारण दिखाई देती है। इसे Thomson scattering कहा जाता है। कोरोना में बेहद गर्म और आयनाइज्ड गैस यानी प्लाज्मा मौजूद होता है। जब सूर्य का प्रकाश इन मुक्त इलेक्ट्रॉनों से टकराता है, तो उसका कुछ हिस्सा अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान यही बिखरी हुई रोशनी हमें सूर्य के चारों ओर चमकीले सफेद सर्कल के रूप में दिखाई देती है।
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कोरोना केवल देखने में खूबसूरत नहीं है, बल्कि इसका पृथ्वी पर भी असर पड़ता है। कोरोना से लगातार आवेशित कणों की एक धारा अंतरिक्ष में निकलती रहती है, जिसे सौर हवा (Solar Wind) कहा जाता है। जब सूर्य पर शक्तिशाली विस्फोट या कोरोनल मास इजेक्शन (CME) जैसी घटनाएं होती हैं, तो बड़ी मात्रा में आवेशित कण अंतरिक्ष में फैल जाते हैं। अगर ऐसी गतिविधियां पृथ्वी की ओर आती हैं, तो वे हमारी तकनीक को इंपैक्ट कर सकती हैं। इनमें सैटेलाइट, रेडियो कम्युनिकेशन और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम शामिल हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक सूर्य और उसके कोरोना का लगातार रिसर्च करते हैं।
वैज्ञानिक केवल सूर्य ग्रहण के दौरान ही कोरोना का रिसर्च नहीं करते। इसके लिए खास उपकरणों से सूर्य की चमक को कृत्रिम रूप से रोककर कोरोना को देखा जाता है। ऐसे उपकरणों को Coronagraph कहा जाता है। इसके अलावा अंतरिक्ष में मौजूद Solar Mission या Sun Study Mission भी कोरोना की तस्वीरें और डेटा जुटाते हैं। इससे वैज्ञानिक सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र, सौर हवा और अंतरिक्ष मौसम को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश करते हैं।
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान कोरोना को देखना एक अद्भुत अनुभव है, लेकिन ग्रहण के अधिकांश फेज में सूर्य को डायरेक्ट नंगी आंखों से देखना सेफ नहीं है। सामान्य sunglasses सूर्य की तेज रोशनी से आंखों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करते। इसलिए ग्रहण देखने के लिए solar viewing glasses या उचित solar filter का इस्तेमाल करना चाहिए।
Total Solar Eclipse हमें सूर्य का वह चेहरा दिखाता है, जिसे सामान्य परिस्थितियों में देखना मुश्किल है। चंद्रमा कुछ मिनटों के लिए सूर्य की चमकीली डिस्क को ढक देता है और उसके पीछे छिपा सूर्य का विशाल, गर्म और रहस्यमयी वायुमंडल सामने आ जाता है। यानी ग्रहण सिर्फ आसमान में होने वाला खूबसूरत नजारा नहीं है। यह वैज्ञानिकों के लिए सूर्य के सबसे बाहरी और सबसे रहस्यमय हिस्सों को करीब से समझने का एक दुर्लभ प्राकृतिक मौका भी है।