कौन हैं सोनम वांगचुक? क्या करती हैं सोनम वांगचुक की पत्नी? एक अनोखे अविष्कार की वजह से दुनिया जान गई इनका नाम

Published : Jul 17, 2026, 05:50 PM ISTUpdated : Jul 17, 2026, 05:56 PM IST
Who is Sonam Wangchuk

सार

Who is Sonam Wangchuk: कौन हैं सोनम वांगचुक? उनका एजुकेशन- करियर, परिवार में कौन-कौन हैं? जानिए उनकी जिंदगी, परिवार, शिक्षा और समाज के लिए किए गए बड़े काम और उपलब्धियां।

Sonam Wangchuk Biography: सोनम वांगचुक भारत के अच्छे इंजीनियर, शिक्षा सुधारक (Education Reformer), इनोवेटर और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। वे लद्दाख के रहने वाले हैं। उन्होंने शिक्षा, जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए कई ऐसे प्रयोग किए हैं, जिनकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है। उन्हें कृत्रिम ग्लेशियर यानी आइस स्तूप (Ice Stupa) बनाने की टेक्निक के लिए विशेष पहचान मिली। सोनम वांगचुक SECMOL (Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh) के फाउंडर भी हैं, जहां बच्चों को किताबों के साथ-साथ जीवन से जुड़ी पैक्टिकल नॉलेज (व्यावहारिक शिक्षा) दी जाती है।

सोनम वांगचुक का शुरुआती जीवन

सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के उलेटोकपो (Uleytokpo) गांव में हुआ। उस समय उनके गांव में कोई स्कूल नहीं था। इसलिए उनकी शुरुआती पढ़ाई उनकी मां ने घर पर ही अपनी मातृभाषा में कराई। करीब 9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर के स्कूल भेजा गया। वहां भाषा अलग होने के कारण उन्हें पढ़ाई में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यही अनुभव बाद में उनके एजुकेशन सिस्टम में सुधार के काम की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।

सोनम वांगचुक के परिवार में कौन-कौन?

सोनम वांगचुक ऐसे परिवार से आते हैं, जहां शिक्षा और समाज सेवा को प्रयोरिटी दी जाती है। सोनम वांगचुक के परिवार में-

  • पिता: सोनम वांग्याल, जो जम्मू-कश्मीर सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर थे।
  • माता: तेजरिंग वांगमो, बचपन में सोनम को घर पर पढ़ाया।
  • पत्नी: गीतांजलि जे. अंग्मो, एक सोशल उद्यमी (Social Entrepreneur), शिक्षाविद और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक (Co-Founder) हैं।

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सोनम वांगचुक की पढ़ाई और करियर

सोनम वांगचुक ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने जॉब करने के बजाय एजुकेशन और समाज में सुधार लगाने का रास्ता चुना। 1988 में उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर SECMOL की स्थापना की। इसका मकसद उन छात्रों को नई राह देना था जो पारंपरिक एजुकेशन सिस्टम में पीछे रह जाते थे। यहां बच्चों को खेती, सौर ऊर्जा, इंजीनियरिंग, उद्यमिता (entrepreneurship) और लाइफ स्किल्स भी सिखाए जाते हैं।

आइस स्तूप (Ice Stupa) क्या है?

लद्दाख में गर्मियों के दौरान पानी की भयंकर कमी हो जाती है। इस समस्या का समाधान खोजते हुए सोनम वांगचुक ने आइस स्तूप टेक्निक डेवलप की। इसमें सर्दियों में बहते पानी को फव्वारे की तरह ऊपर छोड़कर शंकु (Cone) के साइज में जमा दिया जाता है। यह बर्फ गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलती है और किसानों को फसलों के लिए पानी मिलता है। जैसे- घर में रखा बर्फ का बड़ा टुकड़ा धीरे-धीरे पिघलता है और लंबे समय तक ठंडक देता है। उसी प्रकार आइस स्तूप कई हफ्तों तक खेतों को पानी देता है।

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फिल्म '3 इडियट्स' से क्या है संबंध?

फिल्म 3 Idiots के किरदार फुनसुख वांगडू का रोल लंबे समय तक सोनम वांगचुक से प्रेरित माना जाता रहा। हालांकि आमिर खान और अन्य फिल्म के लोगों ने इसका खंड़न किया है।

सोनम वांगचुक को कौन-कौन सा अवार्ड मिला?

सोनम वांगचुक को कई नेशनल और इंटरनेशनल अवार्ड मिल चुके हैं। जैसे -

  • रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018)
  • रोलेक्स अवॉर्ड फॉर एंटरप्राइज
  • कई इंटरनेशनल इन्वायरमेंट और इनोवेशन अवार्ड

पर्यावरण बचाने में क्या है सोनम वांगचुक का रोल?

सोनम वांगचुक लगातार हिमालय, ग्लेशियर और लद्दाख के पर्यावरण प्रोटेक्शन के लिए काम करते रहे हैं। उनका मानना है जब तक हिमालय सुरक्षित रहेगा, तब तक करोड़ों लोगों को पानी मिलता रहेगा।

सोनम वांगचुक की लाइफ के रोचक फैक्ट

  • उनका गांव इतना दूर था कि 9 साल तक वे स्कूल नहीं जा सके।
  • शुरुआती पढ़ाई उनकी मां ने घर पर कराई।
  • उन्होंने 1988 में SECMOL की स्थापना की।
  • आइस स्तूप टेक्निक की वर्ल्ड लेबल पर तारीफ हुई।
  • वे सौर ऊर्जा आधारित इमारतों और तकनीकों पर लंबे समय से काम कर रहे हैं।
  • उन्हें 2018 का रेमन मैग्सेसे अवार्ड मिला। इसे एशिया का नोबेल भी कहते हैं।
  • पत्नी गीतांजलि जे. अंग्मो भी एजुकेशन और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक्टिव हैं।
  • उन्होंने इंडियन आर्मी के लिए सोलर पावर से गर्म रहने वाले टेंट डेवलप करने में हेल्प की।
  • वे शिक्षा को रटने के बजाय प्रयोग और अनुभव से सीखने पर जोर देते हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण, हिमालय और जल संकट जैसे सोशल इश्यूज पर वे लगातार जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं।

कॉन्टेन्ट सोर्सः Ramon Magsaysay Award Foundation, SECMOL, National Institute of Technology (NIT) Srinagar.

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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