सूर्य ग्रहण के दौरान क्यों बदल जाता है जानवरों का व्यवहार? कीड़े-मकौड़ों की एक्टिविटी भी बदलती है, जानें वजह

Published : Aug 10, 2026, 02:33 PM IST
Solar Eclipse Animal Behavior

सार

Solar Eclipse Effects on Animals: सूर्य ग्रहण के दौरान अचानक जानवरों और पक्षियों का व्यवहार क्यों बदल जाता है? क्या वे इस खगोलीय घटना को इंसानों से पहले भांप लेते हैं? जानिए अंधेरा छाते ही प्रकृति में होने वाले हैरान करने वाले बदलावों के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य।

Solar Eclipse Animal Behavior: सूर्य ग्रहण एक ऐसा खगोलीय घटनाक्रम है, जिसमें कुछ समय के लिए चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इससे सूर्य की रोशनी का एक हिस्सा या पूरा हिस्सा धरती तक पहुंचने से रुक जाता है। खासकर पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान दिन के समय अचानक अंधेरा छाने लगता है और कुछ मिनटों के लिए माहौल रात जैसा हो जाता है। इस अचानक बदलाव का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों पर भी देखा गया है। वैज्ञानिकों ने सूर्य ग्रहण के दौरान पक्षियों, कीड़ों, चमगादड़ों और कुछ दूसरे जीवों के बिहैवियर में बदलाव रिकॉर्ड किए हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या जानवर सूर्य ग्रहण को समझ लेते हैं? आइए जानते हैं।

सूर्य ग्रहण होते ही दिन जैसा माहौल क्यों बदल जाता है?

जानवरों के बिहैवियर को समझने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सूर्य ग्रहण के दौरान वातावरण में क्या बदलता है। सूर्य की रोशनी अचानक कम होने लगती है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ समय के लिए दिन में काफी अंधेरा हो सकता है। तापमान में भी गिरावट आती है और वातावरण की रोशनी तेजी से बदलती है। कई जानवर अपने आसपास की रोशनी और टेंप्रेचर में होने वाले बदलाव के आधार पर यह तय करते हैं कि कब एक्टिव होना है और कब आराम करना है। इसलिए ग्रहण के दौरान उनका बिहैवियर भी बदल जाता है।

पक्षी अचानक अपने घोंसले की तरफ क्यों लौटने लगते हैं?

पक्षियों की रोजमर्रा की एक्विटिजी काफी हद तक सूरज की रोशनी से जुड़ी होती हैं। सुबह रोशनी होने पर कई पक्षी एक्टिव होते हैं और शाम को अंधेरा होने पर अपने ठिकाने की ओर लौटते हैं। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान अचानक अंधेरा बढ़ने पर कुछ पक्षी शाम जैसा व्यवहार करने लगते हैं। कुछ प्रजातियां उड़ान कम करकती हैं, जबकि कुछ अपने बसेरे या घोंसले की ओर लौट जाती हैं। ग्रहण के दौरान पक्षियों की आवाज और उनकी एक्टिविटीज में बदलाव भी देखे गए हैं।

क्या पक्षी सूर्य ग्रहण को रात समझ लेते हैं?

पूरी तरह नहीं। कुछ पक्षी सूर्य ग्रहण को सामान्य रात समझते हैं। उनके शरीर में मौजूद जैविक घड़ी यानी circadian rhythm दिन और रात के साइकल को पहचानने में मेन रोल निभाती है। ग्रहण के दौरान अचानक होने वाला अंधेरा इस नेचुरल साइन को कुछ समय के लिए प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि कुछ पक्षियों में शाम या रात से जुड़े बदलाव दिखाई देते हैं।

कीड़े-मकौड़ों की एक्टिविटी क्यों बढ़ सकती है?

सूर्य ग्रहण के दौरान सिर्फ पक्षियों में ही बदलाव नहीं देखा जाता। कुछ कीड़े और दूसरे छोटे जीव भी प्रकाश में बदलाव के प्रति सेंसेटिव (संवेदनशील) होते हैं। कुछ ऐसे कीट जो आमतौर पर शाम या रात में एक्टिव होते हैं, ग्रहण के दौरान कम रोशनी होने पर अपनी एक्टिविटीज स्टार्ट करते हैं। वहीं दिन में एक्टिव रहने वाले कुछ कीड़े शांत हो सकते हैं। इसकी वजह मुख्य रूप से उनकी biological clock और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता है। मतलब ग्रहण उनके लिए अचानक बदलते हुए दिन के संकेत जैसा काम करता है।

चमगादड़ और निशाचर जीवों पर क्या असर पड़ता है?

चमगादड़ जैसे निशाचर जीव आमतौर पर रात में ज्यादा एक्टिव होते हैं। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान दिन में अचानक अंधेरा होने पर इस तरह के जीवों की एक्टिविटीज बढ़ जाती है। यह व्यवहार इसलिए दिलचस्प है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में दिन की रोशनी उन्हें आराम करने का संकेत देती है। ग्रहण के दौरान रोशनी अचानक कम होने से उनके नॉर्मल व्यवहार में थोड़े समय के लिए बदलाव आता है।

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क्या जानवर डर जाते हैं?

  • नहीं। कई बार जो व्यवहार इंसानों को असामान्य या डरावना लगता है, वह असलियत में उनके नेचुरल सिस्टम की प्रतिक्रिया हो सकता है।
  • अचानक अंधेरा, तापमान में बदलाव और एनवायरमेंट में होने वाला परिवर्तन उनके लिए असामान्य स्थिति जरूर है। इसलिए कुछ जानवर शांत होते हैं, कुछ अपने ठिकाने पर लौट सकते हैं और कुछ की गतिविधि बढ़ सकती है।

क्या सभी जानवरों पर एक जैसा असर होता है?

नहीं। सूर्य ग्रहण का असर हर प्रजाति पर अलग-अलग हो सकता है। किसी जानवर का रूटीन, उसके रहने का वातावरण, प्रजाति और प्रकाश पर उसकी निर्भरता जैसे कई वजह उसके बिहैवियर को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि किसी एक ग्रहण के दौरान देखे गए व्यवहार को दुनिया के सभी जानवरों पर लागू नहीं किया जा सकता।

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तो क्या जानवर सूर्य ग्रहण को पहले से जान लेते हैं?

इसका कोई पक्का वैज्ञानिक प्रूफ नहीं है कि जानवर सूर्य ग्रहण को इंसानों की तरह पहले से भांप लेते हैं। हालांकि उनकी इंद्रियां रोशनी, तापमान और एनवायरमेंट में होने वाले बदलावों को जल्दी महसूस कर सकती हैं। इसलिए ग्रहण शुरू होने पर उनका बिहैवियर बदलता हुआ दिखाई देता है। इसे किसी रहस्यमयी शक्ति के बजाय नेचुरल और जैविक प्रतिक्रिया (Biological Reaction) के रूप में समझना ज्यादा सही है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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