
FOMO Symptoms: आज के समय में हम हर मिनट सोशल मीडिया पर किसी न किसी की नई फोटो, रील्स, वीडियो, पोस्ट, नई नौकरी, विदेश यात्रा, नई कार या शादी की तस्वीरें देखते हैं। इन्हें देखकर कई बार मन में एक सवाल आता है- "सबकी जिंदगी इतनी अच्छी चल रही है, सिर्फ मैं ही पीछे क्यों हूं?" यहीं से शुरू होता है FOMO, यानी Fear of Missing Out। आसान भाषा में कहें तो FOMO वह फीलिंग है, जिसमें इंसान को लगता है कहीं वह किसी अच्छे मौके, अनुभव या खुशी से पीछे तो नहीं रह गया है। यह सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। यह पढ़ाई, नौकरी, इन्वेस्टमेंट, फ्रेंडशिप, रिलेशन और यहां तक कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी देखने को मिलता है।
FOMO का पूरा नाम Fear of Missing Out है। इसका मतलब है इंसान को हर समय यह डर बना रहता है कि दूसरे लोग उससे बेहतर कर रहे हैं और वह कुछ महत्वपूर्ण चीज खो रहा है। जैसे- आपके दोस्त घूमने गए और आप नहीं जा सके। किसी ने शेयर बाजार से अच्छा मुनाफा कमाया और आपको लगा आपने मौका गंवा दिया। किसी साथी को प्रमोशन मिला और आपको लगने लगा कि आप पीछे रह गए। इन सभी कंडीशन्स में FOMO महसूस होता है।
1. सोशल मीडिया का इंपैक्टः आज लोग अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे पल ही सोशल मीडिया पर दिखाते हैं। जब हम लगातार दूसरों की सफलता देखते हैं, तो हमें लगता है हमारी जिंदगी उतनी अच्छी नहीं है।
2. खुद की तुलना दूसरों से करनाः हर इंसान का सफर अलग होता है। लेकिन जब हम अपनी तुलना किसी और के अचीवमेंट्स से करते हैं, तो FOMO बढ़ने लगता है।
3. हर मौके को पकड़ने की इच्छाः कई लोगों को लगता है अगर उन्होंने किसी पार्टी, इन्वेस्टमेंट, जॉब या इवेंट को छोड़ दिया तो वे जिंदगी में पीछे रह जाएंगे।
4. अकेलापनः जो लोग खुद को सामाजिक रूप से अकेला महसूस करते हैं, उनमें भी FOMO की संभावना ज्यादा हो सकती है।
मानसिक तनावः बार-बार यह सोचना कि दूसरे लोग बेहतर जिंदगी जी रहे हैं, तनाव और चिंता (Stress and Anxiety) बढ़ा सकता है।
गलत फैसले: FOMO की वजह से लोग बिना सोचे-समझे इन्वेस्ट कर देते हैं, महंगी चीजें खरीद लेते हैं या ऐसे फैसले ले लेते हैं जिनका बाद में पछतावा होता है। जैसेः अगर किसी ने सिर्फ इसलिए किसी शेयर में पैसा लगा दिया क्योंकि बाकी लोग लगा रहे थे, तो यह FOMO का इंपैक्ट हो सकता है।
नींद पर इंपैक्टः बार-बार मोबाइल चेक करना और हर अपडेट जानने की इच्छा नींद की क्वालिटी खराब कर सकती है।
रिश्तों पर असरः अगर इंसान हर समय ऑनलाइन दुनिया में उलझा रहे, तो परिवार और दोस्तों के साथ बिताया समय कम हो सकता है।
नहीं, कभी-कभी FOMO लोगों को नई चीजें सीखने, बेहतर अवसर खोजने और खुद को आगे बढ़ाने के लिए मोटीवेट भी करता है। लेकिन जब यह डर आपकी मानसिक शांति, फैसलों या रिश्तों पर असर डालने लगे, तब इसे कंट्रोल करना जरूरी हो जाता है।
जैसेः मोनिका के सभी दोस्त नई-नई जगह घूमने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे थे। उसे लगा कि उसकी जिंदगी बहुत सिंपल है। उसने बिना जरूरत के महंगी ट्रिप बुक कर ली, जबकि उसका बजट इसकी इजाजत नहीं देता था। बाद में उसे आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अगर मोनिका अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से फैसला करती, तो वह FOMO का शिकार नहीं बनती।
1. FOMO शब्द पहली बार कब आया?
मार्केटिंग एक्सपर्ट डॉ. डैन हरमन (Dr. Dan Herman) ने 1996 में "Fear of Missing Out" शब्द का यूज किया था। बाद में यह शब्द मनोविज्ञान (साइकोलॉजी-Psychology) और सोशल मीडिया रिसर्च में फेमस हो गया।
2. सोशल मीडिया से गहरा संबंध
कई रिसर्च बताते हैं सोशल मीडिया का ज्यादा यूज और FOMO के बीच क्लियर संबंध पाया गया है। लगातार दूसरों की पोस्ट देखने से तुलना की भावना बढ़ जाती है।
3. युवाओं में ज्यादा देखा जाता है
रिसर्च के मुताबिक, यूथ में FOMO का अनुभव औरों की अपेक्षा ज्यादा पाया जाता है, क्योंकि वे सोशल मीडिया का ज्यादा यूज करते हैं।
4. मानसिक स्वास्थ्य पर असर
FOMO को चिंता (Anxiety), तनाव और जिंदगी में कुछ कम मिलने से कनेक्ट पाया गया है। हालांकि, हर इंसान पर इसका इंपैक्ट एक जैसा नहीं होता।
5. अब JOMO भी हो रहा है वायरल
FOMO से अलग JOMO (Joy of Missing Out) का ट्रेंड भी बढ़ रहा है। इसका मतलब है हर चीज़ में शामिल होने के बजाय अपनी शांति, समय और पसंद को महत्व देना।