
भागदौड़ भरी लाइफ में बढ़ता वजन एक बड़ी प्रॉब्लम बन चुकी है। पहले मोटापा सिर्फ उम्र बढ़ने के साथ होता था, लेकिन अब बच्चे, युवा और ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों में यह ज्यादा दिखता है। WHO के अनुसार, वर्ल्ड में अरबों लोग ओवरवेट से परेशान हैं। भारत में भी पिछले कुछ सालों में मोटापे के केस बढ़े हैं। इसकी वजह सिर्फ ज्यादा खाना नहीं, बल्कि हमारी चेंज होती लाइफ स्टाइल, कम फिजिकल एक्टिविटीज, टेंशन और नींद की कमी भी है।
हम जो भी खाना खाते हैं, उससे बॉडी को कैलोरी (एनर्जी) मिलती है। यह एनर्जी हमारे चलने-फिरने, काम करने और शरीर के रूटीन कामों में खत्म होती है। अगर आप हर दिन जितनी कैलोरी खर्च करते हैं, उससे ज्यादा कैलोरी खा जाते हैं, तो बची हुई एनर्जी बॉडी में फैट के रूप में इकट्ठा होने लगती है। इसी वजह से वजन धीरे-धीरे बढ़ जाता है। इसे Calorie Surplus भी कहते हैं।
बार-बार स्नैकिंग, जंक फूड, मीठे लिक्विड और ज्यादा भोजन करने से बॉडी में एक्स्ट्रा कैलोरी जमा होती है।
ऑफिस में घंटों बैठना, कम चलना, लिफ्ट का ज्यादा यूज करना और रेगुलर योग-एक्सरसाइज ना करना वजन बढ़ाते हैं।
हर दिन 6 घंटे से कम नींद लेने पर भूख कंट्रोल करने वाले हार्मोन (Leptin और Ghrelin) डिस्टर्ब होते हैं। इस वजह ज्यादा खाने की भूख लगती है।
टेंशन के दौरान बॉडी में कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन बढ़ता है, जिससे मीठा और तला-भुना खाने की इच्छा ज्यादा होती है।
थायरॉयड, पीसीओएस (PCOS), इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी कंडीशन कुछ लोगों में वजन बढ़ाने में मदद करती हैं। इन केस में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और चेकअप करवाना चाहिए।
कोल्ड ड्रिंक, पैकेट जूस और ज्यादा शुगर वाली चाय-कॉफी में छिपी कैलोरी बहुत तेजी से वजन बढ़ाती है।
चिप्स, पिज्जा, बर्गर, बिस्किट, केक और पैकेज्ड स्नैक्स में जरूरत से ज्यादा कैलोरी, नमक और शरीर को नुकसान करने वाले एलीमेंट होते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिज्म कुछ स्लो हो जाता है। अगर खान-पान और एक्टविटिज पहले जैसी ही रहे, तो वजन बढ़ सकता है।
कुछ दवाएं (जैसे स्टेरॉयड या कुछ मेंटल हेल्थ रिलेटेड मेडिसिन) भी वजन बढ़ाती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद ना करें।
कुछ लोगों में मोटापे की हिस्ट्री जेनेटिक होती है, लेकिन सही खान-पान और एक्टिव लाइफ स्टाइल से इसका असर कम किया जा सकता है।
नहीं। कई लोग नॉर्मल खाना खाते हैं, लेकिन दिनबर बैठे रहते हैं। वहीं कुछ लोग टेंशन, खराब नींद या हार्मोनल प्रॉब्लम की वजह से भी बढ़ते वजन से जूझते दिखते हैं।
डॉक्टर अक्सर BMI (Body Mass Index) का यूज करते हैं। BMI एक शुरुआती अलार्म है, यह बॉडी का पूरा पिक्चर नहीं बताता। इसके लिए अन्य जांच करवानी चाहिए। अगर आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है या बिना वजह बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
नहीं। कम खाना या फैड डाइट लेने से शुरुआत में वजन कम दिख सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसे बनाकर रखना मुश्किल होता है। इससे पोषण की कमी, वीकनेस और वजन फिर से बढ़ने का खतरा रहता है।
जिम मददगार है, लेकिन सिर्फ जिम काफी नहीं है। वजन कम करने में बैलेंस्ड खान-पान और रेगुलर एक्टविटिजी दोनों का रोल होता है। अगर एक्सरसाइज के बाद जरूरत से ज्यादा कैलोरी खा ली जाए, तो वजन कम करना मुश्किल हो जाएगा।
दिल्ली के 42 वर्षीय एक बैंक कर्मचारी का वजन 96 किलो हो गया। डॉक्टर ने उन्हें हर दिन 30–40 मिनट वाक करने, शुगर मिक्स्ड लिक्विड छोड़ने और बाहर का खाना कम करने को कहा। करीब एक साल में उन्होंने लगभग 18 किलो वजन कम किया। ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर में भी इप्रूवमेंट दिखा।
लखनऊ की 34 वर्षीय एक टीचर ने किसी महंगी डाइट की जगह घर का खाना, सीढ़ियों का यूज और हर दिन 8 से 10 हजार कदम चलने का टारगेट बनाया। धीरे-धीरे उनका वजन कम हुआ और वे पहले से ज्यादा एनर्जेटिक फील करने लगीं।
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