
6 महीने बाद बच्चे को मां के दूध के अलावा सॉलि़ड फूड देना शुरू किया जाता है। इस दौरान पेरेंट्स कुछ आम गलतियां करते हैं, जिसके कारण बच्चे का न्यूट्रिशन कम हो सकता है। बच्चों की डॉक्टर माधवी भरद्वाज सोशल मीडिया के माध्यम से बताती हैं कि पेरेंट्स 6 महीने के बच्चे को सॉलिड फूड तो देना शुरू कर देते हैं लेकिन कुछ गलतियां ग्रोथ में कमी का कारण बन सकती है।
डॉक्टर कहती हैं कि आपको 6 महीने के बच्चे को दाल या चावल का सिर्फ पानी नहीं देना है बल्कि पूरी दाल और चावल को अच्छी तरीके से मैश करके खिलाना है। अगर बच्चे का पेट पानी से ही भर जाएगा, तो उसे न्यूट्रिशन नहीं मिल पाएगा। अक्सर पेरेंट्स यह गलती जरूर करते हैं।
6 महीने के हो चुके बच्चों को अक्सर पेरेंट्स दूध की अधिक मात्रा देते हैं। वहीं सॉलि़ड फूड बहुत थोड़ा देते हैं। जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। आप बच्चे को ब्रेस्टफीड करा रही हैं या अगर फॉर्मूला मिल्क दे रही हैं, तो उसे कंटीन्यू करें लेकिन में मेन मील जरूर खिलाएं।
डॉक्टर माधवी भरद्वाज कहती हैं कि बच्चों को सिर्फ फलों का रस ना पिलाएं। अगर बच्चे को पूरा न्यूट्रिशन देना चाहते हैं, तो उसे पूरा का पूरा फल देना सही रहेगा। कोशिस करें कि सॉफ्ट फल जैसे कि केला, आम, सेब आदि को हल्का मैश करके दें।
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अक्सर पेरेंट्स 6 महीने के बच्चे को चाय में बिस्किट डिप करके खिलाते हैं, जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। अगर आप बच्चे को इस तरह के मैदा फूड्स खाने की आदत डाल देंगे, तो उन्हें यह सब चीजें बहुत अच्छी लगेगी और बच्चे ज्यादा मात्रा में खाना पसंद करेंगे।
अगर बच्चे को जुकाम हो जाता है, तो पेरेंट्स उसे फल से लगाकर दूध देना भी बंद कर देते हैं। आपको इससे पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और फिर बच्चे का डाइट प्लान रेडी करना चाहिए।
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