
बारिश का मौसम सब्जी बोने के लिए बढ़िया माना जाता है। इस दौरान, ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती हैं और फल अपने आप तेजी से आने लगता है। अगर आप भी मानसून सीजन में गार्डिनिंग करने की सोच रही हैं तो बेसिक फूलों के अलावा छत या बालकनी में लौकी लगाएं। यह ऐसी सब्जी हैं जिसकी डिमांड पूरी साल बनी रहती है। यह बहुत जल्द तैयार होने वाली फसल है। इतना ही नहीं,90% पानी के साथ यह विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होती है। अगर इसकी बुआई सही से की जाए तो उत्पादन अच्छा हो सकता है।
लौकी की इस किस्म को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) वाराणसी ने विकसित किया है, जो यूपी के किसानों के बीच लोकप्रिय किस्म है। इसके फल बेलनाकार, हरे रंग के होने के साथ वजन में 700-800 ग्राम तक होते हैं। यह गर्मी-बारिश के मौसम के लिए बेहतरीन है।
लौक की इस वैरायटी को भी IRAI द्वारा विकसित किया है। इसके फल सीधे और आकर्षक होते हैं। वजन लगभग 500 से 600 ग्राम होता है। इसे गर्मी-बरसात किसी भी मौसम में लगाया जा सकता है।
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लौक की यह किस्म जल्द तैयार होती है। इसके फल छोटे और बेलनाकार होते हैं। साथ ही लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं।
लौकी की काशी किरण वैरायटी भी अच्छी मानी जाती है। यह गोल आकार के हल्के हरे फल आते हैं। प्रति पौधा 13-14 फल मिलने की संभावना रहते हैं। अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है, जिसमें रोग लगने का खतरा भी कम रहता है।
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लौकी की अच्छी पैदावार के लिए बलुई मिट्टी, दोमट मिट्टी और जल निकासी वाली मिट्टी बेहतरीन मानी जाती है।
अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो 7-10 दिन में अंकुर निकल जाते हैं। लगभग 35-45 दिनों में फूल आने लगते हैं, वहीं 50-70 दिनों में पहली लौकी तोड़ने लायक हो जाती है।
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